कक्षा ९ गणित अध्याय 5 सोचिए और विचार कीजिए के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन2026-09-08
प्र1.
किसी समतल पर स्थित दो बिंदुओं से कितने वृत्त होकर जाते हैं?
उत्तर
अनंत वृत्त।
ऐसा क्यों होता है: A और B से होकर जाने वाले वृत्त का केंद्र O ऐसा होना चाहिए कि OA = OB हो, अर्थात O, AB के लंब समद्विभाजक पर हो। इसके विपरीत, उस लंब समद्विभाजक का प्रत्येक बिंदु O एक वृत्त देता है — त्रिज्या OA लीजिए, और चूँकि OB = OA है, वृत्त B से भी होकर जाएगा। लंब समद्विभाजक पर अनंत बिंदु हैं, अत: ऐसे अनंत वृत्त हैं — रेखा के प्रत्येक बिंदु के लिए एक।
AB के लंब समद्विभाजक का प्रत्येक बिंदु A और B से होकर जाने वाले किसी वृत्त का केंद्र है।
प्र2.
क्या A और B से होकर जाते हुए सभी संभावित त्रिज्याओं वाले वृत्त विद्यमान होते हैं? A और B से होकर जाते हुए सबसे छोटे वृत्त की त्रिज्या क्या है? A और B से होकर जाते हुए सबसे बड़े वृत्त की त्रिज्या क्या है?
उत्तर
नहीं — सभी त्रिज्याएँ संभव नहीं हैं। केवल AB की आधी लंबाई या उससे बड़ी त्रिज्याएँ ही मिलती हैं।
मान लीजिए AB = c है और केंद्र O, AB के मध्यबिंदु M से h दूरी पर है।
तब OA² = OM² + MA², अर्थात r² = h² + (c/2)²
अत: r = √(h² + c²/4) ≥ c/2 प्रत्येक h ≥ 0 के लिए।
सबसे छोटी त्रिज्या = c/2 = ½ AB, जो h = 0 पर प्राप्त होती है, अर्थात जब केंद्र AB का मध्यबिंदु हो। उस वृत्त में AB एक व्यास है।
सबसे बड़ी त्रिज्या कोई नहीं है। h बढ़ाने पर r भी बढ़ता जाता है, अत: त्रिज्या जितनी चाहें उतनी बड़ी ली जा सकती है पर कोई अधिकतम मान नहीं है।
ऐसा क्यों होता है: AB ऐसे प्रत्येक वृत्त की जीवा है और कोई जीवा व्यास से बड़ी नहीं हो सकती। अत: सदैव 2r ≥ AB, अर्थात r ≥ ½AB। ½AB से छोटी त्रिज्याएँ असंभव हैं और ½AB से बड़ी प्रत्येक त्रिज्या वास्तव में प्राप्त होती है।
प्र3.
जैसे-जैसे आप रेखाखंड AB से लंब समद्विभाजक के अनुदिश दूर होते जाते हैं तो A और B से होकर जाते हुए वृत्तों की त्रिज्याएँ बढ़ती हैं या घटती हैं?
उत्तर
त्रिज्याएँ बढ़ती हैं।
r = √(h² + (AB/2)²) जहाँ h = केंद्र की AB के मध्यबिंदु से दूरी
h ↑ ⇒ h² ↑ ⇒ h² + (AB/2)² ↑ ⇒ r ↑
ऐसा क्यों होता है: A वृत्त पर ही रहता है, अत: त्रिज्या दूरी OA है। O को AB से लंब समद्विभाजक के अनुदिश दूर ले जाने पर वह A से भी दूर होता जाता है — समकोण त्रिभुज OMA में खड़ी भुजा लंबी होती जाती है जबकि क्षैतिज भुजा MA का मान ½AB स्थिर रहता है, अत: कर्ण OA बढ़ता है।
प्र4.
जैसे-जैसे आप लंब समद्विभाजक के अनुदिश जाते हैं तो क्या उस बिंदु से निर्मित A और B से होकर जाता हुआ वृत्त अधिक वक्रीय या कम वक्रीय प्रतीत होता है?
उत्तर
कम वक्रीय — A और B के बीच का चाप अधिक से अधिक चपटा दिखाई देता है।
ऐसा क्यों होता है: वक्रता त्रिज्या से निर्धारित होती है — छोटा वृत्त तीव्रता से मुड़ता है, बड़ा वृत्त धीरे-धीरे। प्रश्न 3 से त्रिज्या बढ़ती जाती है, अत: A और B के पास चाप चपटा होता जाता है। सीमा में, जब केंद्र अनंत की ओर चला जाता है, A और B से होकर जाता चाप सीधी रेखा AB में बदल जाता है।
क्या आप जानते हैं? इसीलिए क्षितिज सीधा दिखाई देता है। आप लगभग 6400 किलोमीटर त्रिज्या वाले वृत्त पर खड़े हैं, अत: कुछ मीटर की दूरी में वक्रता इतनी कम होती है कि दिखाई ही नहीं देती।
प्र5.
एक समतल पर आपको दो बिंदु A और B दिए गए हैं। आप उसी समतल पर ऐसे कितने वर्ग बना सकते हैं जिनकी सीमारेखा पर A और B स्थित हों? उसी समतल पर आप ऐसे कितने वर्ग बना सकते हैं जिनके कोने के बिंदु A और B हों?
उत्तर
(क) A और B सीमारेखा पर कहीं भी: अनंत वर्ग।
रेखाखंड AB खींचिए। किसी भी आकार का वर्ग लीजिए — उसे खिसकाकर और घुमाकर ऐसा किया जा सकता है कि उसकी सीमारेखा A और B दोनों से होकर जाए। आकार पर भी कोई प्रतिबंध नहीं है, अत: ऐसे अनंत वर्ग हैं।
(ख) A और B वर्ग के कोने (शीर्ष) हों: ठीक 3 वर्ग।
स्थिति 1 — AB एक भुजा हो: वर्ग AB के दोनों ओर बनाया जा सकता है → 2 वर्ग
स्थिति 2 — AB एक विकर्ण हो: शेष दो शीर्ष निश्चित हो जाते हैं, AB के दोनों ओर एक-एक → 1 वर्ग
कुल = 2 + 1 = 3 वर्ग
A और B शीर्ष हों तो केवल तीन वर्ग बनते हैं — दो में AB भुजा है और एक में विकर्ण।
इतना अंतर क्यों: "सीमारेखा पर" कहने से आकार और झुकाव दोनों स्वतंत्र रह जाते हैं, अत: उत्तरों का पूरा परिवार बनता है। "कोने पर" कहते ही एक पूरी भुजा या पूरा विकर्ण निश्चित हो जाता है, और भुजा (तथा किस ओर बनाना है) या विकर्ण जान लेने पर वर्ग पूरी तरह निर्धारित हो जाता है।
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