कक्षा ९ गणित अध्याय 6 पाठ्य प्रश्न के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
चित्र 6.6 — मेसोपोटामियाई षट्भुज-वृत्त तुलना। क्या आप देख सकते हैं कि यह क्यों π > 3 दर्शाता है?
उत्तर

हाँ। 1 त्रिज्या वाले वृत्त के अंतर्गत बने षट्भुज का परिमाप ठीक 6 है, जबकि उसे घेरने वाला वृत्त उससे लंबा है।

O 1 1
अंतर्गत नियमित षट्भुज की प्रत्येक भुजा त्रिज्या के बराबर है, अतः परिमाप 6 है।
एक भुजा पर केंद्र पर बना कोण = 360° ÷ 6 = 60°
दोनों त्रिज्याएँ समान हैं, अतः त्रिभुज समद्विबाहु है
शीर्ष कोण 60° होने से शेष दोनों कोण भी 60°-60° हैं
∴ त्रिभुज समबाहु है, अतः प्रत्येक भुजा = त्रिज्या = 1

षट्भुज का परिमाप = 6 < परिधि = 2π
∴ π > 3
ऐसा क्यों होता है: षट्भुज के एक शीर्ष से अगले शीर्ष तक सीधी भुजा से जाना सबसे छोटा मार्ग है; चाप से जाना घुमावदार मार्ग है। छह ऐसे घुमाव मिलकर वृत्त को षट्भुज से लंबा बना देते हैं। π के विषय में यह सबसे सरल कठोर कथन है, और मेसोपोटामिया के गणितज्ञों ने लगभग 1900 सामान्य संवत पूर्व इसी से अशोधित मान 3 को अस्वीकार करके 3 + 1/8 = 3.125 अपनाया।
प्र2.
चित्र 6.7 — आर्किमिडीज-विधि में ‘अंतर्गत’ और ‘परिगत’ बहुभुजों का उपयोग किया गया है। क्या आप देख सकते हैं कि अंतर्गत और परिगत षट्भुज का यह चित्र हमें बताता है कि क्यों π का मान 3 और 2√3 के मध्य है? (संकेत — बौधायन-पाइथागोरस प्रमेय का उपयोग कीजिए।)
उत्तर

अंतर्गत षट्भुज निचली सीमा देता है (पिछला प्रश्न)। परिगत षट्भुज ऊपरी सीमा देता है, और वहीं बौधायन-पाइथागोरस प्रमेय की आवश्यकता पड़ती है।

वृत्त की त्रिज्या 1 लीजिए। परिगत षट्भुज की प्रत्येक भुजा वृत्त को अपने मध्यबिंदु पर स्पर्श करती है। केंद्र O को उस स्पर्श-बिंदु M से और भुजा के एक सिरे A से मिलाइए। तब OM = 1 (त्रिज्या, भुजा पर लंब) और ∠AOM = 60° का आधा = 30°।

समकोण त्रिभुज OMA में: ∠OMA = 90°, ∠AOM = 30°, अतः ∠OAM = 60°
OA = 2 × AM (30° के सम्मुख भुजा कर्ण की आधी होती है)
बौधायन-पाइथागोरस से: OA² = OM² + AM²
(2·AM)² = 1² + AM²
4AM² − AM² = 1 ⟹ AM² = 1/3 ⟹ AM = 1/√3

पूरी भुजा = 2AM = 2/√3
परिमाप = 6 × 2/√3 = 12/√3 = 4√3
परिधि < बाहरी षट्भुज का परिमाप
2π < 4√3
∴ π < 2√3 ≈ 3.46

π > 3 के साथ मिलाकर: 3 < π < 2√3
ऐसा क्यों होता है: वृत्त दोनों ओर से दब जाता है। भीतरी षट्भुज उसमें समाया है, अतः वृत्त उससे लंबा है; वृत्त बाहरी षट्भुज में समाया है, अतः उससे छोटा है। आर्किमिडीज ने जब-जब भुजाएँ दोगुनी कीं — 12, 24, 48, 96 — दोनों बहुभुज वृत्त से और सटते गए और सीमाओं का अंतर घटता गया, यहाँ तक कि वे 3 1071 < π < 3 17 कह सके।
संकेत: ध्यान दीजिए कि इस तर्क में कहीं कुछ मापा नहीं गया। यह प्रमाण है, प्रयोग नहीं — और इसीलिए यह रील पर धागा लपेटने से कहीं अधिक शक्तिशाली है।
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