ΔABD को केवल दो टुकड़ों में काटकर ΔACD ढका जा सकता है — एक ही सीधी कटान पर्याप्त है।
स्थिति स्मरण कीजिए — AD, ΔABC की माध्यिका है, अतः BD = DC और ar(ΔABD) = ar(ΔACD)। दोनों त्रिभुजों में भुजा AD उभयनिष्ठ है और उनके आधार BD, DC एक ही रेखा पर समान हैं।
मान लीजिए M, AB का मध्यबिंदु है। कटान M से D तक कीजिए।
इससे ΔABD दो भागों ΔMBD और ΔAMD में बँट जाता है।
अब ΔMBD को M के परितः 180° घुमाइए।
B ↦ A (क्योंकि M, AB का मध्यबिंदु है), और D ↦ D′, जहाँ M, DD′ का मध्यबिंदु है।
MD ∥ AC (ΔABC में मध्यबिंदु प्रमेय: M और D क्रमशः AB और BC के मध्यबिंदु हैं),
तथा MD = ½AC, अतः BD की प्रतिकृति AC पर आ बैठती है और D′ उसी पर होता है।
घुमाया गया टुकड़ा और ΔAMD मिलकर ΔACD को ठीक-ठीक ढक लेते हैं। अतः दो टुकड़े, एक सीधी कटान MD और एक आधा घूर्णन।
ऐसा क्यों होता है: किसी रेखाखंड के मध्यबिंदु के परितः आधा घूर्णन एक दृढ़ गति है जो उसके दोनों सिरों को आपस में बदल देती है। AB का मध्यबिंदु धुरी चुनने से B, A पर आ जाता है, और मध्यबिंदु प्रमेय यह सुनिश्चित करती है कि कटान MD, AC के अनुदिश इशारा करे ताकि टुकड़ा ठीक बैठे। कहीं और काटेंगे तो टुकड़े या तो ऊपर चढ़ जाएँगे या रिक्ति छोड़ देंगे।
यह कीजिए: दोनों त्रिभुज कागज़ से काटकर जाँचिए। फिर अगला, कठिन प्रश्न पूछिए जो अगला "सोचिए और विचार कीजिए" बक्सा पूछता है — क्या समान क्षेत्रफल वाले किन्हीं दो बहुभुजों को एक-दूसरे में काटा-जोड़ा जा सकता है? (हाँ — यही वैलेस–बोल्याई–गेरवियन प्रमेय है।)