कक्षा ९ गणित अध्याय 6 पाठ्य प्रश्न के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
क्या आपने देखा कि क्यों दो त्रिभुजों को एक साथ रखकर समांतर चतुर्भुज बनाया गया है? (यदि आप आकृतियों में कोणों का अध्ययन करेंगे (जैसे ∠B'C'A' और ∠BCA) तो आप देखेंगे कि ऐसा क्यों होता है। वह प्रक्रिया स्मरण रखिए, जिससे हम यह ज्ञात करते हैं कि कौन-सी दो रेखाएँ समांतर हैं।)
उत्तर

हाँ — क्योंकि एकांतर कोणों की समता सम्मुख भुजाओं को समांतर होने पर विवश कर देती है।

ΔABC और उसकी सर्वांगसम प्रति ΔA′B′C′ लीजिए, और प्रति को इस प्रकार रखिए कि भुजा B′C′ ठीक भुजा CB पर बैठ जाए (B′, C पर और C′, B पर)। नई आकृति को ABDC कहिए, जहाँ D, A का प्रतिबिंब है।

सर्वांगसमता से ∠A′C′B′ = ∠ACB, अर्थात ∠DBC = ∠ACB।
ये AC और BD रेखाओं के लिए तिर्यक रेखा BC के साथ एकांतर कोण हैं।
एकांतर कोण समान ⟹ AC ∥ BD।

सर्वांगसमता से A′C′ = AC भी है, अर्थात BD = AC।
जिस चतुर्भुज की एक जोड़ी भुजाएँ समान और समांतर हों, वह समांतर चतुर्भुज होता है।
∴ ABDC एक समांतर चतुर्भुज है।

अतः समांतर चतुर्भुज का क्षेत्रफल = 2 × त्रिभुज का क्षेत्रफल, और चूँकि समांतर चतुर्भुज का आधार BC = b तथा ऊँचाई h त्रिभुज जैसी ही है,

2 × ar(ΔABC) = bh ⟹ ar(ΔABC) = ½ bh
ऐसा क्यों होता है: BC के मध्यबिंदु के परितः आधा घूर्णन (180°) त्रिभुज को उसकी प्रति पर ले जाता है। आधा घूर्णन प्रत्येक रेखा को उसके समांतर रेखा पर भेजता है, इसीलिए दोनों बाहरी भुजाएँ समांतर हो जाती हैं। यह आयत वाले तर्क से कहीं स्वच्छ है, क्योंकि आधे घूर्णन को इससे कोई मतलब नहीं कि त्रिभुज का कोई कोण अधिकोण है या नहीं।
प्र2.
यह संभव है, ऐसा कहकर हम आपको अचंभित होने से रोक सकते हैं परंतु हम आपको यह नहीं बताएँगे कि त्रिभुज के कम-से-कम कितने टुकड़ों की आवश्यकता होगी। यह पता लगाने का प्रयास स्वयं कीजिए!
उत्तर

ΔABD को केवल दो टुकड़ों में काटकर ΔACD ढका जा सकता है — एक ही सीधी कटान पर्याप्त है।

स्थिति स्मरण कीजिए — AD, ΔABC की माध्यिका है, अतः BD = DC और ar(ΔABD) = ar(ΔACD)। दोनों त्रिभुजों में भुजा AD उभयनिष्ठ है और उनके आधार BD, DC एक ही रेखा पर समान हैं।

मान लीजिए M, AB का मध्यबिंदु है। कटान M से D तक कीजिए।
इससे ΔABD दो भागों ΔMBD और ΔAMD में बँट जाता है।

अब ΔMBD को M के परितः 180° घुमाइए।
B ↦ A (क्योंकि M, AB का मध्यबिंदु है), और D ↦ D′, जहाँ M, DD′ का मध्यबिंदु है।
MD ∥ AC (ΔABC में मध्यबिंदु प्रमेय: M और D क्रमशः AB और BC के मध्यबिंदु हैं),
तथा MD = ½AC, अतः BD की प्रतिकृति AC पर आ बैठती है और D′ उसी पर होता है।

घुमाया गया टुकड़ा और ΔAMD मिलकर ΔACD को ठीक-ठीक ढक लेते हैं। अतः दो टुकड़े, एक सीधी कटान MD और एक आधा घूर्णन।

ऐसा क्यों होता है: किसी रेखाखंड के मध्यबिंदु के परितः आधा घूर्णन एक दृढ़ गति है जो उसके दोनों सिरों को आपस में बदल देती है। AB का मध्यबिंदु धुरी चुनने से B, A पर आ जाता है, और मध्यबिंदु प्रमेय यह सुनिश्चित करती है कि कटान MD, AC के अनुदिश इशारा करे ताकि टुकड़ा ठीक बैठे। कहीं और काटेंगे तो टुकड़े या तो ऊपर चढ़ जाएँगे या रिक्ति छोड़ देंगे।
यह कीजिए: दोनों त्रिभुज कागज़ से काटकर जाँचिए। फिर अगला, कठिन प्रश्न पूछिए जो अगला "सोचिए और विचार कीजिए" बक्सा पूछता है — क्या समान क्षेत्रफल वाले किन्हीं दो बहुभुजों को एक-दूसरे में काटा-जोड़ा जा सकता है? (हाँ — यही वैलेस–बोल्याई–गेरवियन प्रमेय है।)
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