कक्षा ९ गणित अध्याय 7 सोचिए और विचार कीजिए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
आप ₹1 का सिक्का उछालिए और अपने मित्र से इसके परिणाम का अनुमान लगाने को कहिए। क्या आप देखते हैं कि आपका मित्र चित या पट का अनुमान लगा सकता है परंतु निश्चित रूप से परिणाम ज्ञात नहीं कर सकता है? यही यादृच्छिकता है! सभी संभावित परिणाम ज्ञात होते हैं परंतु प्रत्येक विशिष्ट या व्यक्तिगत प्रयास अप्रत्याशित होता है।
उत्तर

हाँ — और ध्यान देने योग्य बात यह है कि ज्ञान ठीक कहाँ जाकर रुक जाता है।

  • सिक्का हाथ से छूटने से पहले ही आपके मित्र को पूरी प्रतिदर्श समष्टि S = {H, T} ज्ञात है।
  • उसे यह भी ज्ञात है कि प्रत्येक परिणाम की प्रायिकता 1/2 है।
  • परंतु इस विशेष उछाल में दोनों में से कौन-सा परिणाम आएगा, यह वह नहीं जान सकता।
ऐसा क्यों होता है: प्रायिकता प्रयोग के विषय में कथन है, किसी एक परीक्षण के विषय में नहीं। P(चित) = 1/2 कहने से इस उछाल का आधा पूर्वानुमान नहीं हो जाता; इसका अर्थ है कि यदि यह उछाल अनेक बार दोहराई जाए तो लगभग आधी बार चित आएगा। एक अकेले परीक्षण में "आधा" जैसा कुछ होता ही नहीं — या तो चित आएगा या पट।
एक उछाल पर अनुमान सही होने की प्रायिकता = 1/2
20 उछालों में सही अनुमानों की अपेक्षित संख्या ≈ 20 × 1/2 = 10

अर्थात आपका मित्र कितनी भी चतुराई से अनुमान लगाए, लगभग आधी बार ही सही होगा — और यही सबसे स्पष्ट प्रमाण है कि सिक्का वास्तव में यादृच्छिक है। यदि कोई अनुमान-नियम दीर्घावधि में आधे से अधिक बार सही होता, तो सिक्का निष्पक्ष नहीं होता।

यह कीजिए: ₹1 का सिक्का 20 बार उछालिए और मित्र से हर बार पहले ही अनुमान कहलवाइए। सही अनुमान गिनिए। अब अनुमान का नियम बदलिए — सदा "चित", या एकांतर क्रम में चित, पट, चित, पट। सभी नियमों का परिणाम 20 में से 10 के आस-पास ही रहेगा। सिक्के को मात नहीं दी जा सकती।
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