प्र1.
ऐसी अनिश्चितता कभी-कभी उपयोगी हो सकती है! उदाहरण के लिए, एक क्रिकेट प्रतियोगिता में खिलाड़ियों का कौन-सा दल पहले बल्लेबाजी करेगा, यह निर्णय करने के लिए सिक्का उछाला जाना एक न्यायसंगत विधि है। क्या आप व्याख्या कर सकते हैं कि ऐसा क्यों है?
उत्तर
क्योंकि सिक्का दोनों कप्तानों को ठीक समान अवसर देता है और किसी को भी परिणाम पर प्रभाव डालने का कोई साधन नहीं देता।
सिक्का निष्पक्ष है ⇒ P(चित) = P(पट) = 1/2
कप्तान A के टॉस जीतने की प्रायिकता = 1/2
कप्तान B के टॉस जीतने की प्रायिकता = 1/2
कप्तान A के टॉस जीतने की प्रायिकता = 1/2
कप्तान B के टॉस जीतने की प्रायिकता = 1/2
ऐसा क्यों होता है: कोई विधि न्यायसंगत तभी है जब वह समान भी हो और अनियंत्रणीय भी। सिक्का दोनों शर्तें पूरी करता है। वह सममितीय है, अतः उसके एक ओर अधिक बार गिरने का कोई भौतिक कारण नहीं है — पुस्तक इसी गुण को निष्पक्ष होना कहती है। और यादृच्छिक उछाल का अर्थ है कि सिक्का बिना किसी हस्तक्षेप के स्वतंत्रतापूर्वक गिरता है, अतः कौशल, शक्ति, वरिष्ठता या घरेलू मैदान का लाभ परिणाम को नहीं बदल सकता। कौन 'कॉल' करेगा, इससे भी अंतर नहीं पड़ता — 'चित' कहने और 'पट' कहने, दोनों की प्रायिकता 1/2 ही है।
यहाँ अनिश्चितता ही सबसे बड़ा गुण है। यदि परिणाम का पूर्वानुमान लगाया या उसे तय किया जा सकता, तो प्रबल पक्ष उसे तय कर लेता। चूँकि कोई ऐसा नहीं कर सकता, इसलिए दोनों दल परिणाम को घटित होने से पहले ही स्वीकार कर लेते हैं।
क्या आप जानते हैं? यही तर्क क्रिकेट के बाहर भी काम आता है — चुनाव में बराबरी टूटने पर पर्ची निकालना, परीक्षा-कक्ष में यादृच्छिक स्थान आवंटन, या विद्यालय-सभा के लिए बक्से से एक पर्ची निकालना। हर स्थिति में न्यायसंगतता इसी से आती है कि प्रत्येक प्रतिभागी की प्रायिकता समान है, किसी की चतुराई से नहीं।