पुस्तक की परिभाषा (पृष्ठ 175) —
अव्ययीभावसमासस्य भेदाः प्रायः त्रयस्त्रिंशत् सन्ति। तेषु केचन प्रसिद्धाः भेदाः एव अत्र प्रदर्शिताः।
हिन्दी अर्थ — जिसमें पूर्वपद का अर्थ प्रधान हो, वह अव्ययीभाव है। नाम का अर्थ है — ‘जो अव्यय नहीं था, वह अव्यय बन जाता है’। पुस्तक बताती है कि इसके लगभग तैंतीस भेद होते हैं; यहाँ केवल कुछ प्रसिद्ध भेद ही दिखाए गए हैं (तालिका में बीस)।
| प्रश्न | अव्ययीभाव में उत्तर |
|---|---|
| प्रधान पद कौन ? | पूर्वपद — जो प्रायः अव्यय या उपसर्ग है (उप, निर्, अनु, प्रति, यथा, आ, अभि, स, अधि, सु, अति, पारे, मध्ये) |
| समस्तपद का लिङ्ग-वचन ? | सदा नपुंसकलिङ्ग, एकवचन — और वह पूरा पद अव्यय बन जाता है, अतः रूप कभी नहीं बदलता |
| विग्रह किस प्रकार का ? | प्रायः अस्वपदविग्रह — अव्यय का अर्थ खोलने के लिए बाहर से शब्द लाना पड़ता है (उप → समीपे, निर् → अभावः) |
| पहचान का सबसे सरल चिह्न ? | समस्तपद प्रायः ‘-म्’ पर समाप्त होता है और वाक्य में क्रियाविशेषण की तरह काम करता है — उपनगरम्, प्रतिदिनम्, यथाशक्ति |