पहचान — प्रायः अन्यपदार्थप्रधानः बहुव्रीहिः। जिसमें न पूर्वपद प्रधान हो, न उत्तरपद — बल्कि समास से बाहर का कोई तीसरा पद प्रधान हो।
| प्रश्न | बहुव्रीहि में उत्तर |
|---|---|
| प्रधान पद कौन ? | अन्यपद — जो समास में लिखा ही नहीं गया |
| विग्रह कैसे बनता है ? | अन्त में यस्य / येन / यस्मै / यस्मात् / यस्मिन् / यं … सः आता है |
| विग्रह स्वपद है या अस्वपद ? | सदा अस्वपदविग्रह — ‘यस्य सः’ बाहर से आता है |
| समस्तपद क्या करता है ? | वह पूरा-का-पूरा विशेषण बन जाता है, और जिसका विशेषण है उसी के लिङ्ग-वचन-विभक्ति लेता है |
पुस्तक का भेद-वृक्ष (पृष्ठ 174) —
१. सामान्यबहुव्रीहिः (षड् भेदाः) २. विशेषबहुव्रीहिः (नव भेदाः)
पुस्तक का उदाहरण — पुस्तकं हस्ते यस्य सः = पुस्तकहस्तः (बालकः)। कः सः पुस्तकहस्तः ? — प्रधान न पुस्तक है, न हाथ; प्रधान वह बालक है जिसके हाथ में पुस्तक है।