| समास | प्रधान पद | विग्रह में क्या आता है | समस्तपद का स्वभाव | उदाहरण |
|---|---|---|---|---|
| अव्ययीभावः | पूर्वपद (अव्यय) | समीपे · अभावः · अनतिक्रम्य · दिने दिने | नपुंसक, एकवचन, अव्यय — रूप नहीं बदलता | उपनगरम्, यथाशक्ति, प्रतिदिनम् |
| तत्पुरुषः | उत्तरपद | पूर्वपद पर कोई विभक्ति (द्वितीया–सप्तमी) | लिङ्ग-वचन उत्तरपद के अनुसार | रामदूतः, वृक्षमूलम्, कार्यकुशलः |
| • कर्मधारयः | उत्तरपद | दोनों पद एक ही विभक्ति में; इव / एव / इति | वही | नीलमेघः, मेघश्यामः, आम्रवृक्षः |
| • द्विगुः | उत्तरपद | पूर्वपद संख्यावाची; ‘समाहारः’ | प्रायः स्त्रीलिङ्ग या नपुंसक एकवचन | त्रिलोकी, पञ्चवटी |
| • नञ्-प्रभृतिः | उत्तरपद | पूर्वपद अ / कु / प्र / अति / निर् आदि | वही | अधर्मः, कुपुत्रः, कुम्भकारः |
| द्वन्द्वः | दोनों (सब) पद | प्रत्येक पद के बाद ‘च’ | इतरेतर — द्वि/बहुवचन · समाहार — नपुंसक एकवचन | रामकृष्णौ, धर्मार्थकाममोक्षाः, पाणिपादम् |
| बहुव्रीहिः | अन्यपद (बाहर का) | अन्त में यस्य / येन / यस्मै / यस्मात् / यस्मिन् / यं … सः | पूरा समास विशेषण बन जाता है | पीताम्बरः, चक्रपाणिः, दशाननः |
पूर्वपद प्रधान → अव्ययीभाव · उत्तरपद प्रधान → तत्पुरुष
दोनों प्रधान → द्वन्द्व · अन्यपद प्रधान → बहुव्रीहि