सूचना — ये प्रश्न पुस्तक में नहीं हैं। शारदा का परिशिष्टम् २ केवल नियम और तालिकाएँ देता है, कोई अभ्यास नहीं। नीचे के पद और उनके उत्तर केवल स्वयं जाँच के लिए यहाँ जोड़े गए हैं। पहले उत्तर ढँककर, प्रत्येक पद के साथ एक क्रियापद जोड़िए और पूछिए ‘क्रिया का सीधा सम्बन्ध किससे?’
१. ग्रामगतः — ग्रामगतः बालकः अस्ति। कः गतः ? — जो गया वह ‘गत’ है, ग्राम नहीं गया। उत्तरपद प्रधान → तत्पुरुष (विग्रह : ग्रामं गतः — द्वितीयातत्पुरुष)।
२. मातापितरौ — मातापितरौ वदतः। कौ वदतः ? — माता भी, पिता भी। उभयपद प्रधान → द्वन्द्व (विग्रह : माता च पिता च)। ध्यान दीजिए — क्रिया द्विवचन है।
३. चक्रपाणिः — चक्रपाणिः रक्षति। कः रक्षति ? — न चक्र रक्षा करता है, न हाथ; रक्षा करता है विष्णु। अन्यपद प्रधान → बहुव्रीहि (विग्रह : चक्रं पाणौ यस्य सः)।
४. यथाशक्ति — सः यथाशक्ति कार्यं करोति। कथं करोति ? — शक्ति का उल्लंघन किए बिना, अर्थात् ‘यथा’ के अर्थ में। पूर्वपद प्रधान → अव्ययीभाव (विग्रह : शक्तिम् अनतिक्रम्य — अस्वपदविग्रह)।
५. नीलकण्ठः — दो उत्तर सम्भव हैं, और यहीं विधि की परीक्षा है :
• यदि अर्थ है ‘नीला कण्ठ’ (जैसे — नीलकण्ठः शोभते, कण्ठ की बात हो रही है) → कर्मधारय (विशेषणपूर्वपद), विग्रह ‘नीलः कण्ठः’।
• यदि अर्थ है ‘जिसका कण्ठ नीला है, वह — शिव’ (नीलकण्ठः प्रसीदतु) → बहुव्रीहि, विग्रह ‘नीलः कण्ठः यस्य सः (शिवः)’।
निर्णय वाक्य से होगा, पद से नहीं — यही पुस्तक की विधि सिखाती है।
६. पञ्चवटी — रामः पञ्चवटीं गच्छति। विग्रह : पञ्चानां वटानां समाहारः। संख्या पूर्वपद में और समाहार का बोध → समाहारद्विगु (जो तत्पुरुष का ही भेद है)।
सबसे आम भूल: छात्र समस्तपद देखकर सीधे नाम लिख देते हैं। पर ‘नीलकण्ठः’ जैसे पद बिना वाक्य के अनिर्णीत रहते हैं। पहले वाक्य, फिर विग्रह, तब नाम — पुस्तक का क्रम यही है।