पहचान — पुस्तक की परिभाषा है — प्रायेण उत्तरपदार्थप्रधानः तत्पुरुषसमासः। अर्थात् जिसमें उत्तरपद (बाद वाला पद) प्रधान हो।
| प्रश्न | तत्पुरुष में उत्तर |
|---|---|
| प्रधान पद कौन ? | उत्तरपद — रामदूतः में ‘दूत’ |
| क्रिया का सम्बन्ध किससे ? | उत्तरपद से — ‘दूतः गच्छति’ |
| विग्रह में पूर्वपद का क्या होता है ? | उस पर कोई-न-कोई विभक्ति प्रकट हो जाती है — रामस्य दूतः |
| समस्तपद का लिङ्ग-वचन ? | उत्तरपद के अनुसार — वृक्षमूलम् नपुंसक, क्योंकि ‘मूलम्’ नपुंसक है |
विग्रह की पद्धति — तत्पुरुष का विग्रह करते समय पूर्वपद पर वही विभक्ति लगाइए जो अर्थ के अनुसार बनती है, और उत्तरपद को प्रथमा में रखिए :
नखभिन्नः → नखैः (तृतीया) भिन्नः
वृक्षमूलम् → वृक्षस्य (षष्ठी) मूलम्
पुस्तक तत्पुरुष के चार भेद देती है —
३. द्विगुः समासः (त्रिविधः) ४. नञ्-प्रभृतिः तत्पुरुषसमासः