कक्षा ९ संस्कृत अध्याय 3 कर्तरि प्रयोगे पुरुषव्यवस्था के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र१.
मध्यमपुरुष तथा उत्तमपुरुष का नियम क्या है — पुस्तक के रंगीन उदाहरणों सहित बताइए।
उत्तर

पुस्तक कर्ता के सर्वनाम से पुरुष तय करती है, क्रिया से नहीं। पृष्ठ 178 पर पहले मध्यमपुरुष, फिर उत्तमपुरुष, अन्त में प्रथमपुरुष — तीनों के नियम और ‘यथा’ के उदाहरण छपे हैं, जिनमें कर्ता और क्रिया दोनों नीले रंग में उभारे गए हैं ताकि जोड़ी दिखाई दे।

मध्यमपुरुषः — «कर्तृपदं यदि ‘त्वं/युवां/यूयं’ भवति तर्हि क्रियापदं सर्वदा मध्यमपुरुषस्य एकवचने/द्विवचने/बहुवचने भवति।»
उत्तमपुरुषः — «कर्तृपदं यदि ‘अहम्/आवां/वयं’ भवति तर्हि क्रियापदं सर्वदा उत्तमपुरुषस्य एकवचने/द्विवचने/बहुवचने भवति।»
पुरुषःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
मध्यमपुरुषःत्वं श्लोकं पठसि।युवां श्लोकं पठथः।यूयं श्लोकं पठथ।
उत्तमपुरुषःअहं श्लोकं पठामि।आवां श्लोकं पठावः।वयं श्लोकं पठामः।
ध्यान रखने योग्य बात: कर्म ‘श्लोकम्’ तीनों पंक्तियों में ज्यों-का-त्यों है — बदल केवल कर्ता और क्रिया रहे हैं। यही पिछले खण्ड का नियम है : क्रियापद कर्ता का अनुसरण करता है। दूसरी बात — मध्यमपुरुष के प्रत्यय सि · थः · थ हैं और उत्तमपुरुष के मि · वः · मः; इन्हीं छह अक्षरों से पुरुष पहचाना जा सकता है, चाहे धातु कोई भी हो।
अनुवाद में सावधानी: हिन्दी ‘तुम पढ़ते हो’ का संस्कृत ‘त्वं पठसि’ है, ‘पठति’ नहीं। और ‘हम दोनों पढ़ते हैं’ के लिए संस्कृत में अलग द्विवचन है — आवां पठावः। हिन्दी में द्विवचन नहीं होता, इसीलिए यही खाना सबसे अधिक छूटता है।
प्र२.
प्रथमपुरुष का नियम क्या है — पुस्तक की बारह-वाक्य वाली तालिका पूरी दीजिए।
उत्तर

प्रथमपुरुष की परिभाषा पुस्तक ‘शेष सब’ के रूप में देती है — जो कर्ता न मध्यमपुरुष का हो, न उत्तमपुरुष का, वह प्रथमपुरुष का है। «कर्तृपदं यदि ‘त्वं/युवा/यूयम् अथवा अहम्/आवां/वयम् एतेभ्यः भिन्नं भवति तर्हि क्रियापदं सर्वदा प्रथमपुरुषस्य एकवचने/द्विवचने/बहुवचने भवति।»

इसका अर्थ है — सः, सा, तौ, ते, ताः जैसे सर्वनाम और युवकः, बालिका, रामः, नद्यः जैसी सब संज्ञाएँ प्रथमपुरुष में ही आती हैं। पुस्तक ने इसी को दिखाने के लिए चार पंक्तियों × तीन वचनों की यह तालिका छापी है, जिसमें पुंलिङ्ग-स्त्रीलिङ्ग सर्वनाम और पुंलिङ्ग-स्त्रीलिङ्ग संज्ञा — चारों प्रकार आ जाते हैं।

प्रकारएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
सर्वनाम (पुंलिङ्ग)सः श्लोकं पठति।तौ श्लोकं पठतः।ते श्लोकं पठन्ति।
सर्वनाम (स्त्रीलिङ्ग)सा श्लोकं पठति।ते श्लोकं पठतः।ताः श्लोकं पठन्ति।
संज्ञा (पुंलिङ्ग)युवकः श्लोकं पठति।युवकौ श्लोकं पठतः।युवकाः श्लोकं पठन्ति।
संज्ञा (स्त्रीलिङ्ग)बालिका श्लोकं पठति।बालिके श्लोकं पठतः।बालिकाः श्लोकं पठन्ति।
तालिका यह भी सिखाती है: चारों पंक्तियों में क्रियापद एक ही हैं — पठति · पठतः · पठन्ति। कर्ता पुंलिङ्ग हो या स्त्रीलिङ्ग, सर्वनाम हो या संज्ञा — क्रिया पर लिङ्ग का कोई असर नहीं पड़ता, केवल वचन का पड़ता है। संस्कृत की क्रिया लिङ्ग नहीं देखती; यही हिन्दी से बड़ा भेद है (हिन्दी में ‘पढ़ता है / पढ़ती है’ में लिङ्ग दिखता है)।
नाम का भ्रम मिटाइए: संस्कृत का प्रथमपुरुष वही है जिसे अंग्रेज़ी व्याकरण third person कहता है, और संस्कृत का उत्तमपुरुष अंग्रेज़ी का first person। क्रम उलटा है। परीक्षा में ‘क्रियापदस्य पुरुषं लिखत’ पूछे जाने पर यही उलटफेर सबसे अधिक अंक कटवाता है।
पुस्तक की छपाई में एक चूक: प्रथमपुरुष के नियम-वाक्य में पुस्तक ‘त्वं/युवा/यूयम्’ छापती है, जबकि ऊपर मध्यमपुरुष के नियम में उसी सर्वनाम का शुद्ध रूप ‘युवां’ (युवाम्) दिया है। ‘युवा’ का अर्थ तो ‘जवान’ होता है; यहाँ अभिप्रेत युवाम् (तुम दोनों) ही है। साथ ही यहाँ खुला उद्धरण-चिह्न (‘) बन्द नहीं किया गया है। हमने पुस्तक जैसा है वैसा ही उद्धृत किया है — पढ़ते समय ‘युवाम्’ समझिए।
प्र३.
अभ्यास के लिए (स्वयं करें) — पुरुष तथा वचन
उत्तर
अभ्यास के लिए (स्वयं करें) — ये प्रश्न पुस्तक में नहीं हैं। परिशिष्ट ३ पर शारदा कोई अभ्यास नहीं देती; ये केवल स्वयं जाँच के लिए यहाँ जोड़े गए हैं।
  1. उचित क्रियापद चुनिए — ‘यूयं ग्रामं ______ (गच्छथ / गच्छन्ति / गच्छामः)।’
    उत्तर — गच्छथ। कर्ता ‘यूयम्’ है, अतः क्रिया मध्यमपुरुष बहुवचन में।
  2. ‘आवां पाठं स्मरावः।’ — इसका पुरुष तथा वचन बताइए।
    उत्तर — उत्तमपुरुष, द्विवचन। कर्ता ‘आवाम्’ (हम दोनों) उत्तमपुरुष द्विवचन है।
  3. ‘नद्यः सागरं गच्छन्ति।’ — यह किस पुरुष का वाक्य है और क्यों?
    उत्तर — प्रथमपुरुष। ‘नद्यः’ न मध्यमपुरुष का सर्वनाम है, न उत्तमपुरुष का — अतः पुस्तक के नियमानुसार शेष सब प्रथमपुरुष में जाते हैं।
  4. ‘बालिके श्लोकं पठतः।’ में ‘पठतः’ एकवचन क्यों नहीं है?
    उत्तर — ‘बालिके’ स्त्रीलिङ्ग द्विवचन (दो बालिकाएँ) है, अतः क्रिया भी प्रथमपुरुष द्विवचन ‘पठतः’ हुई। यहाँ ‘बालिके’ को सम्बोधन एकवचन समझ लेना आम भूल है।
  5. ‘त्वं गीतं गायसि’ को उत्तमपुरुष बहुवचन में बदलिए।
    उत्तर — वयं गीतं गायामः। (कर्ता त्वम् → वयम्, क्रिया गायसि → गायामः; कर्म ‘गीतम्’ अपरिवर्तित।)
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