कक्षा ९ संस्कृत अध्याय 3 कर्तृवाच्यम् के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र१.
कर्तरि प्रयोग के वे तीन नियम कौन-से हैं जो पुस्तक पृष्ठ 177 पर देती है?
उत्तर

पुस्तक तीन बुलेट-बिन्दुओं में पूरा कर्तृवाच्य कह देती है। ये तीनों वाक्य ज्यों-के-त्यों नीचे हैं, साथ में हिन्दी अर्थ और यह भी कि हर नियम व्यवहार में क्या करता है।

पुस्तक का नियम (संस्कृत)हिन्दी अर्थव्यवहार में इसका मतलब
कर्तरि प्रयोगे कर्तृवाचकं पदं ‘प्रथमाविभक्तौ’ भवति।कर्तरि प्रयोग में कर्ता का बोध कराने वाला पद प्रथमा विभक्ति में होता है।बालक, सुनीत, आरक्षकाः — कर्ता पर कोई ‘द्वारा’ नहीं, सीधा प्रथमा।
कर्मवाचकं पदं ‘द्वितीयाविभक्तौ’ भवति।कर्म का बोध कराने वाला पद द्वितीया विभक्ति में होता है।श्लोकम्, कविताम्, चोरान् — ‘कर्मणि द्वितीया’ का सीधा प्रयोग।
क्रियापदं कर्तृपदानुगुणं भवति।क्रियापद कर्ता के अनुरूप होता है।कर्ता का पुरुष तथा वचन जो हो, क्रिया भी उसी पुरुष-वचन में — पठति / पठतः / पठन्ति।
पुस्तक का विवेचन — «तन्नाम कर्तृपदं यद्वचनयुक्तं भवति क्रियापदमपि तद्वचनयुक्तमेव भवति।»
अर्थात् — कर्ता जिस वचन में हो, क्रिया भी उसी वचन में होती है।
कर्ता एकवचन → क्रिया एकवचन  ·  कर्ता द्विवचन → क्रिया द्विवचन  ·  कर्ता बहुवचन → क्रिया बहुवचन
«कर्मपदेन सह तस्य कोऽपि सम्बन्धः न भवति।» — कर्म से क्रिया का कोई सम्बन्ध नहीं।
‘कर्ता प्रधान है’ का यही अर्थ है: जिस पद के बदलने पर क्रिया बदल जाए, वही प्रधान है। कर्तरि प्रयोग में क्रिया केवल कर्ता के साथ बदलती है, कर्म के साथ नहीं — इसीलिए पुस्तक पृष्ठ 178 के आरम्भ में निष्कर्ष देती है : «अतः अत्र कर्ता प्रधानः भवति। क्रियापदं कर्तृपदम् अनुसरति।»
प्र२.
पुस्तक के ‘बालः चित्रं पश्यति’ और ‘बालः फलं खादति’ वाले उदाहरण क्या सिद्ध करते हैं?
उत्तर

ये दो पंक्तियाँ एक छोटा-सा प्रयोग (experiment) हैं — पहली पंक्ति में केवल कर्ता का वचन बदला गया है, दूसरी में केवल कर्म का। दोनों का परिणाम देखिए।

क : कर्ता का वचन बदला — क्रिया भी बदली
वचनकर्ता (प्रथमा)कर्म (द्वितीया)क्रियापद
एकवचनम्बालःचित्रम्पश्यति
द्विवचनम्बालौचित्रम्पश्यतः
बहुवचनम्बालाःचित्रम्पश्यन्ति
ख : कर्म का वचन बदला — क्रिया नहीं बदली
वचनकर्ता (प्रथमा)कर्म (द्वितीया)क्रियापद
एकवचनम्बालःफलम्खादति
द्विवचनम्बालःफलेखादति
बहुवचनम्बालःफलानिखादति
पुस्तक की अपनी पंक्तियाँ —
यथा — बालः चित्रं पश्यति। बालौ चित्रं पश्यतः। बालाः चित्रं पश्यन्ति।
बालः फलं खादति। बालः फले खादति। बालः फलानि खादति।
«अत्र सामान्यतया परिशीलयामः चेत् ‘बालः’ कर्ता, ‘फलं’ कर्म, ‘खादति’ क्रियापदम् अस्ति।»
निष्कर्ष जो पुस्तक निकालती है: «उपरि विद्यमानेषु वाक्येषु यत्र कर्तुः वचनपरिवर्तनम् अभवत् तत्र क्रियापदस्यापि वचनपरिवर्तनम् अभवत्। कर्मपदस्य वचनपरिवर्तनेन क्रियापदस्य वचनपरिवर्तनं न अभवत्।» — जहाँ कर्ता का वचन बदला वहाँ क्रिया का भी बदला; कर्म का वचन बदलने से क्रिया नहीं बदली। इसी से सिद्ध होता है कि कर्तरि प्रयोग में कर्ता प्रधान है।
परीक्षा में इसका उपयोग: यदि पूछा जाए ‘अस्मिन् वाक्ये कः प्रयोगः?’ तो कर्म का वचन मन-ही-मन बदलकर देखिए। क्रिया वैसी ही रही — कर्तरि प्रयोग। क्रिया भी बदल गई — कर्मणि प्रयोग। यह जाँच दस सेकंड में उत्तर दे देती है।
प्र३.
अभ्यास के लिए (स्वयं करें) — कर्तृवाच्य
उत्तर
अभ्यास के लिए (स्वयं करें) — ये प्रश्न पुस्तक में नहीं हैं। परिशिष्ट ३ पर शारदा कोई अभ्यास नहीं देती; ये केवल स्वयं जाँच के लिए यहाँ जोड़े गए हैं। पहले स्वयं लिखिए, फिर उत्तर देखिए।
  1. ‘छात्रा ग्रन्थं पठति।’ — इसे द्विवचन तथा बहुवचन में बदलिए।
    उत्तर — छात्रे ग्रन्थं पठतः। छात्राः ग्रन्थं पठन्ति। (केवल कर्ता तथा क्रिया बदले, कर्म ‘ग्रन्थम्’ वैसा ही रहा।)
  2. ‘सैनिकः शत्रुं जयति।’ — कर्म को बहुवचन कीजिए। क्रिया बदलेगी या नहीं?
    उत्तर — सैनिकः शत्रून् जयति। क्रिया नहीं बदलेगी, क्योंकि कर्तरि प्रयोग में क्रियापद कर्ता का अनुसरण करता है, कर्म का नहीं।
  3. इन वाक्यों में कर्ता, कर्म और क्रियापद अलग-अलग बताइए — ‘वानराः वृक्षान् आरोहन्ति।’
    उत्तर — कर्ता — वानराः (प्रथमा बहुवचन), कर्म — वृक्षान् (द्वितीया बहुवचन), क्रियापद — आरोहन्ति (प्रथमपुरुष बहुवचन)।
  4. ‘बालिका पुष्पाणि चिनोति।’ में क्रियापद एकवचन में क्यों है जबकि ‘पुष्पाणि’ बहुवचन है?
    उत्तर — क्योंकि क्रिया कर्ता ‘बालिका’ (एकवचन) का अनुसरण करती है; ‘पुष्पाणि’ कर्म है और कर्म से क्रिया का कोई सम्बन्ध नहीं — «कर्मपदेन सह तस्य कोऽपि सम्बन्धः न भवति।»
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