प्र१.
तीनों वाच्य एक दृष्टि में — सब कालों और कृदन्तों की तुलनात्मक तालिका दीजिए।
उत्तर
एक ही विचार को तीनों वाच्यों में देखिए — पहले सकर्मक धातु (पठ्) से कर्तरि और कर्मणि, फिर अकर्मक धातु (हस्) से कर्तरि और भावे। यह तालिका पूरे परिशिष्ट का निचोड़ है।
| रूप-प्रकार | कर्तरि (सकर्मक) | कर्मणि | कर्तरि (अकर्मक) | भावे |
|---|---|---|---|---|
| वर्तमान (लट्) | बालकः श्लोकं पठति। | बालकेन श्लोकः पठ्यते। | बालकः हसति। | बालकेन हस्यते। |
| भूत (कृदन्त) | बालकः श्लोकं पठितवान्। | बालकेन श्लोकः पठितः। | बालकः हसितवान्। | बालकेन हसितम्। |
| विधि (लिङ्) | बालकः श्लोकं पठेत्। | बालकेन श्लोकः पठितव्यः / पठनीयः | बालकः हसेत्। | बालकेन हसितव्यम् / हसनीयम् |
| कर्ता की विभक्ति | प्रथमा | तृतीया | प्रथमा | तृतीया |
| कर्म की विभक्ति | द्वितीया | प्रथमा | कर्म है ही नहीं | |
| क्रिया किसके अनुसार | कर्ता के | कर्म के | कर्ता के | किसी के नहीं — सदा प्र.पु. एकवचन |
| कृदन्त का लिङ्ग-वचन | कर्ता जैसा | कर्म जैसा | कर्ता जैसा | सदा नपुंसक, प्रथमा, एकवचन |
पूरे परिशिष्ट का एक-पंक्ति सार: «जिसका पद प्रथमा में है, क्रिया उसी का अनुसरण करती है — और यदि प्रथमा में कोई है ही नहीं, तो क्रिया एकवचन में जम जाती है।» इस एक वाक्य से तीनों वाच्यों की क्रिया का रूप निकाला जा सकता है।