कक्षा ९ संस्कृत अध्याय 4 न खलु वयस्तेजसो हेतुः के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-08

इस अध्याय के बारे में

यह क्या है — ‘शब्दरूपाणि’ शारदा का चौथा परिशिष्ट है (पृष्ठ 184–198)। परिशिष्ट पाठ नहीं होता — उसमें न श्लोक होते हैं, न कथा, न अभ्यासाद् जायते सिद्धिः जैसा प्रश्न-खण्ड। यहाँ केवल सुबन्त रूपों की तालिकाएँ हैं, जिन्हें देखकर छात्र अपना लिखा हुआ रूप मिलाता है। केवल हलन्त शब्द — बड़ी बात यह है कि यह परिशिष्ट अजन्त (स्वरान्त) शब्द जैसे बालक, लता, मुनि, साधु, पितृ नहीं देता । वे कक्षा ६–८ में आ चुके हैं। यहाँ केवल व्यञ्जनान्त/हलन्त शब्द हैं — न्, स्, द्, ज्, च्, त्, व्, श्, ष् में समाप्त होने वाले — क्योंकि इन्हीं में विद्यार्थी सबसे अधिक भूल करता है। पुस्तक का क्रम — पहले पुंलिङ्गशब्दाः (पृष्ठ 184–188, दस शब्द), फिर स्त्रीलिङ्गरूपाणि (पृष्ठ 189–192, आठ शब्द), फिर नपुंसकलिङ्गरूपाणि (पृष्ठ 193–197, दस शब्द), और अन्त में पृष्ठ 198 पर सुप्-प्रत्ययाः की तालिका। हर तालिका में सात विभक्तियाँ तथा सम्बो

  1. शब्दरूपाणि
  2. सुप्-प्रत्ययाः
  3. ‘न्’ कारान्तः पुंलिङ्गः
  4. ‘स्’ कारान्तः पुंलिङ्गः
  5. ‘द्’ तथा ‘ज्’ कारान्तः पुंलिङ्गः
  6. स्त्रीलिङ्गरूपाणि
  7. स्त्रीलिङ्गरूपाणि
  8. नपुंसकलिङ्गरूपाणि
  9. नपुंसकलिङ्गरूपाणि
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