प्र१.
पुस्तक की वर्तमानकाल वाली दस-वाक्य तालिका पूरी दीजिए (पृष्ठ 180)।
उत्तर
यह परिशिष्ट की सबसे उपयोगी तालिका है — दस वाक्य, दोनों वाच्यों में, तीनों पुरुष और तीनों वचन मिलाकर। पुस्तक इसे ‘अधः वर्तमानकाले कर्तरि कर्मणि च कतिचन वाक्यानि प्रदत्तानि सन्ति।’ शीर्षक से देती है।
| क्र.सं. | कर्तरि प्रयोगः / कर्तृवाच्यम् | कर्मणि प्रयोगः / कर्मवाच्यम् |
|---|---|---|
| १. | बालकः श्लोकं पठति। | बालकेन श्लोकः पठ्यते। |
| २. | सा कवितां लिखति। | तया कविता लिख्यते। |
| ३. | सुनीता फलानि खादति। | सुनीतया फलानि खाद्यन्ते। |
| ४. | शिक्षकः ग्रन्थालयं गच्छति। | शिक्षकेण ग्रन्थालयः गम्यते। |
| ५. | सः दुर्गुणान् त्यजति। | तेन दुर्गुणाः त्यज्यन्ते। |
| ६. | अहम् इक्षुरसं पिबामि। | मया इक्षुरसः पीयते। |
| ७. | सञ्जयः लेखनीः ददाति। | सञ्जयेन लेखन्यः दीयन्ते। |
| ८. | आरक्षकाः चोरान् नयन्ति। | आरक्षकैः चोराः नीयन्ते। |
| ९. | राधा पूजां करोति। | राधया पूजा क्रियते। |
| १०. | मित्राणि चलच्चित्रं पश्यन्ति। | मित्रैः चलच्चित्रं दृश्यते। |
पंक्ति ६ को धीरे-धीरे देखिए —
कर्तरि : अहम् (प्रथमा) इक्षुरसम् (द्वितीया) पिबामि (उत्तमपुरुष एकवचन)
कर्ता प्रथमा → तृतीया : अहम् → मया
कर्म द्वितीया → प्रथमा : इक्षुरसम् → इक्षुरसः
क्रिया अब कर्म (एकवचन) के अनुसार, तथा सदा प्रथमपुरुष में : पिबामि → पीयते
कर्मणि : मया इक्षुरसः पीयते।
कर्तरि : अहम् (प्रथमा) इक्षुरसम् (द्वितीया) पिबामि (उत्तमपुरुष एकवचन)
कर्ता प्रथमा → तृतीया : अहम् → मया
कर्म द्वितीया → प्रथमा : इक्षुरसम् → इक्षुरसः
क्रिया अब कर्म (एकवचन) के अनुसार, तथा सदा प्रथमपुरुष में : पिबामि → पीयते
कर्मणि : मया इक्षुरसः पीयते।
पंक्ति ६ सबसे अधिक सिखाती है: कर्तरि में क्रिया उत्तमपुरुष ‘पिबामि’ थी, पर कर्मणि में प्रथमपुरुष ‘पीयते’ हो गई। कारण यह है कि अब क्रिया कर्म ‘इक्षुरसः’ का अनुसरण करती है, और ‘इक्षुरसः’ प्रथमपुरुष का पद है। कर्मवाच्य में क्रिया मध्यम या उत्तमपुरुष में तभी जाएगी जब कर्म स्वयं ‘त्वाम्/माम्’ जैसा पद हो — जैसे ‘सः मां पश्यति’ → ‘तेन अहं दृश्ये’।
पंक्ति ३ और ७ में वचन देखिए: ‘फलानि’ तथा ‘लेखन्यः’ बहुवचन हैं, इसलिए क्रिया भी बहुवचन में गई — खाद्यन्ते, दीयन्ते। पर पंक्ति १० में कर्ता ‘मित्राणि’ बहुवचन होते हुए भी कर्म ‘चलच्चित्रम्’ एकवचन है, अतः क्रिया एकवचन में ही रही — दृश्यते। यही ‘क्रियापदं कर्मपदम् अनुसरति’ का जीवित प्रमाण है।