कक्षा ९ संस्कृत अध्याय 3 वर्तमानकाले कर्तरि तथा कर्मणि के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र१.
पुस्तक की वर्तमानकाल वाली दस-वाक्य तालिका पूरी दीजिए (पृष्ठ 180)।
उत्तर

यह परिशिष्ट की सबसे उपयोगी तालिका है — दस वाक्य, दोनों वाच्यों में, तीनों पुरुष और तीनों वचन मिलाकर। पुस्तक इसे ‘अधः वर्तमानकाले कर्तरि कर्मणि च कतिचन वाक्यानि प्रदत्तानि सन्ति।’ शीर्षक से देती है।

क्र.सं.कर्तरि प्रयोगः / कर्तृवाच्यम्कर्मणि प्रयोगः / कर्मवाच्यम्
१.बालकः श्लोकं पठति।बालकेन श्लोकः पठ्यते।
२.सा कवितां लिखति।तया कविता लिख्यते।
३.सुनीता फलानि खादति।सुनीतया फलानि खाद्यन्ते।
४.शिक्षकः ग्रन्थालयं गच्छति।शिक्षकेण ग्रन्थालयः गम्यते।
५.सः दुर्गुणान् त्यजति।तेन दुर्गुणाः त्यज्यन्ते।
६.अहम् इक्षुरसं पिबामि।मया इक्षुरसः पीयते।
७.सञ्जयः लेखनीः ददाति।सञ्जयेन लेखन्यः दीयन्ते।
८.आरक्षकाः चोरान् नयन्ति।आरक्षकैः चोराः नीयन्ते।
९.राधा पूजां करोति।राधया पूजा क्रियते।
१०.मित्राणि चलच्चित्रं पश्यन्ति।मित्रैः चलच्चित्रं दृश्यते।
पंक्ति ६ को धीरे-धीरे देखिए —
कर्तरि : अहम् (प्रथमा) इक्षुरसम् (द्वितीया) पिबामि (उत्तमपुरुष एकवचन)
कर्ता प्रथमा → तृतीया : अहम् → मया
कर्म द्वितीया → प्रथमा : इक्षुरसम् → इक्षुरसः
क्रिया अब कर्म (एकवचन) के अनुसार, तथा सदा प्रथमपुरुष में : पिबामि → पीयते
कर्मणि : मया इक्षुरसः पीयते
पंक्ति ६ सबसे अधिक सिखाती है: कर्तरि में क्रिया उत्तमपुरुष ‘पिबामि’ थी, पर कर्मणि में प्रथमपुरुष ‘पीयते’ हो गई। कारण यह है कि अब क्रिया कर्म ‘इक्षुरसः’ का अनुसरण करती है, और ‘इक्षुरसः’ प्रथमपुरुष का पद है। कर्मवाच्य में क्रिया मध्यम या उत्तमपुरुष में तभी जाएगी जब कर्म स्वयं ‘त्वाम्/माम्’ जैसा पद हो — जैसे ‘सः मां पश्यति’ → ‘तेन अहं दृश्ये’।
पंक्ति ३ और ७ में वचन देखिए: ‘फलानि’ तथा ‘लेखन्यः’ बहुवचन हैं, इसलिए क्रिया भी बहुवचन में गई — खाद्यन्ते, दीयन्ते। पर पंक्ति १० में कर्ता ‘मित्राणि’ बहुवचन होते हुए भी कर्म ‘चलच्चित्रम्’ एकवचन है, अतः क्रिया एकवचन में ही रही — दृश्यते। यही ‘क्रियापदं कर्मपदम् अनुसरति’ का जीवित प्रमाण है।
प्र२.
वाच्य-परिवर्तन की चरणबद्ध विधि क्या है, और क्या ये नियम सब कालों में लगते हैं?
उत्तर

हाँ, लगते हैं। पुस्तक पृष्ठ 180 पर स्पष्ट कहती है — «कर्तरि प्रयोगस्य कर्मणि प्रयोगस्य पूर्वोक्ताः नियमाः वर्तमानादिषु सर्वेषु कालेषु अन्वयं प्राप्नुवन्ति। क्रियापदानां रूपाणि तत्तत्काले (लकारानुगुणम्) भवन्ति।» अर्थात् विभक्ति का नियम हर लकार में वही रहता है; बदलती केवल क्रिया की शक्ल है।

वाच्य-परिवर्तन के चार चरण —
चरण १ — कर्ता पहचानिए, उसे प्रथमा से तृतीया में कीजिए। (बालकः → बालकेन)
चरण २ — कर्म पहचानिए, उसे द्वितीया से प्रथमा में कीजिए। (श्लोकम् → श्लोकः)
चरण ३ — धातु में ‘य’ जोड़कर आत्मनेपद का प्रत्यय लगाइए। (पठ् + य + ते)
चरण ४ — क्रिया का वचन कर्म के अनुसार मिलाइए, पुरुष सामान्यतः प्रथमपुरुष। (श्लोकः → पठ्यते, श्लोकाः → पठ्यन्ते)
उत्तर — बालकेन श्लोकः पठ्यते
काल / लकारकर्तरिकर्मणिटिप्पणी
वर्तमान (लट्)बालकः श्लोकं पठति।बालकेन श्लोकः पठ्यते।ति → ते
भूत (लङ्)बालकः श्लोकम् अपठत्।बालकेन श्लोकः अपठ्यत।त् → त, आदि में ‘अ’
भविष्यत् (लृट्)बालकः श्लोकं पठिष्यति।बालकेन श्लोकः पठिष्यते।ष्यति → ष्यते
आज्ञा (लोट्)बालकः श्लोकं पठतु।बालकेन श्लोकः पठ्यताम्।तु → ताम्
विधि (विधिलिङ्)बालकः श्लोकं पठेत्।बालकेन श्लोकः पठ्येत।एत् → एत
पुस्तक भूतकाल के लिए लकार क्यों नहीं, कृदन्त क्यों चुनती है: पृष्ठ 180 पर लिखा है — «भूतकाले लङ्-लृट्-आदीनां लकाराणां प्रयोगः भवति। तथैव कृदन्तेषु भूतकाले कर्तरि ‘क्तवतु’ प्रत्ययस्य कर्मणि ‘क्त’ प्रत्ययान्तस्य च प्रयोगः भवति।» दोनों चलते हैं, पर संस्कृत साहित्य और परीक्षा — दोनों में भूतकाल के लिए कृदन्त (पठितवान् / पठितः) अधिक प्रचलित है, इसलिए पुस्तक उसी की तालिका देती है। ऊपर की तालिका में लङ् का रूप तुलना के लिए दिया गया है।
प्र३.
अभ्यास के लिए (स्वयं करें) — वर्तमानकाल का वाच्य-परिवर्तन
उत्तर
अभ्यास के लिए (स्वयं करें) — ये प्रश्न पुस्तक में नहीं हैं। परिशिष्ट ३ पर शारदा कोई अभ्यास नहीं देती; ये केवल स्वयं जाँच के लिए यहाँ जोड़े गए हैं।
  1. कर्मवाच्य बनाइए — ‘छात्राः पाठं स्मरन्ति।’
    उत्तर — छात्रैः पाठः स्मर्यते। (कर्म ‘पाठः’ एकवचन है, अतः क्रिया भी एकवचन।)
  2. कर्मवाच्य बनाइए — ‘माता ओदनं पचति।’
    उत्तर — मात्रा ओदनः पच्यते।
  3. कर्तृवाच्य बनाइए — ‘तेन पुस्तकानि क्रीयन्ते।’
    उत्तर — सः पुस्तकानि क्रीणाति। (तृतीया ‘तेन’ → प्रथमा ‘सः’; प्रथमा ‘पुस्तकानि’ → द्वितीया ‘पुस्तकानि’ — नपुंसक में रूप एक-सा रहता है; क्रिया अब कर्ता के अनुसार एकवचन।)
  4. कर्मवाच्य बनाइए — ‘वयं संस्कृतं पठामः।’
    उत्तर — अस्माभिः संस्कृतं पठ्यते। (‘वयम्’ का तृतीया बहुवचन ‘अस्माभिः’ है; कर्म ‘संस्कृतम्’ नपुंसक एकवचन, अतः क्रिया एकवचन प्रथमपुरुष।)
  5. नीचे के वाक्य में भूल खोजिए — ‘बालकेन श्लोकाः पठ्यते।’
    उत्तर — क्रिया गलत है। कर्म ‘श्लोकाः’ बहुवचन है, अतः क्रिया भी बहुवचन होगी — बालकेन श्लोकाः पठ्यन्ते।
  6. ‘सः मां पश्यति’ का कर्मवाच्य लिखिए।
    उत्तर — तेन अहं दृश्ये। (यहाँ कर्म ‘माम्’ था, जो प्रथमा में ‘अहम्’ हो गया; अतः क्रिया उत्तमपुरुष एकवचन ‘दृश्ये’ में गई — यही वह विरल स्थिति है जिसमें कर्मवाच्य की क्रिया प्रथमपुरुष में नहीं रहती।)
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