नियम — आत्मनेपद के लोट् प्रत्यय हैं — ताम्, इताम्, अन्ताम् / स्व, इथाम्, ध्वम् / ऐ, आवहै, आमहै। ध्यान दीजिए, उत्तमपुरुष में ए के स्थान पर ऐ हो जाता है (वर्धे → वर्धै) — यही लोट् की सबसे स्पष्ट पहचान है।
| ‘वृधु’- धातुः, लोट्-लकारः — पृष्ठ 203 | |||
|---|---|---|---|
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमपुरुषः | वर्धताम् | वर्धेताम् | वर्धन्ताम् |
| मध्यमपुरुषः | वर्धस्व | वर्धेथाम् | वर्धध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | वर्धै | वर्धावहै | वर्धामहै |
प्रयोग — तव यशः वर्धताम्। (तुम्हारा यश बढ़े) · त्वं विद्यया वर्धस्व। (तुम विद्या से बढ़ो) · वयं सर्वे वर्धामहै। (हम सब बढ़ें)