प्र1.
जल में ध्वनि प्रकाश की अपेक्षा बहुत अधिक दूरी तक गमन करती है, इसलिए इसका उपयोग विभिन्न अंतर्जलीय अनुप्रयोगों में किया जाता है। महासागर की गहराई ज्ञात करने के लिए भेजा गया कोई सोनार संकेत 4 सेकंड में वापस लौटता है। यदि समुद्री जल में ध्वनि की चाल 1500 m s−1 है तो बताइए कि उस स्थान पर महासागर की गहराई कितनी होगी?
उत्तर
उस स्थान पर महासागर 3000 m (3 km) गहरा है।
4 s संकेत के नीचे जाने और वापस आने का कुल समय है।
कुल दूरी = चाल × समय = 1500 m s⁻¹ × 4 s = 6000 m
गहराई = कुल दूरी ÷ 2 = 6000 m ÷ 2 = 3000 m = 3 km
कुल दूरी = चाल × समय = 1500 m s⁻¹ × 4 s = 6000 m
गहराई = कुल दूरी ÷ 2 = 6000 m ÷ 2 = 3000 m = 3 km
अथवा एक ही चरण में: d = v t / 2 = (1500 m s⁻¹ × 4 s) / 2 = 3000 m।
प्रकाश या रेडार नहीं, सोनार ही क्यों: जल कुछ दसियों मीटर में ही प्रकाश को अवशोषित और प्रकीर्णित कर देता है, और रेडियो तरंगें तो लगभग तुरंत अवशोषित हो जाती हैं। दूसरी ओर ध्वनि जल में वायु की तुलना में लगभग 4 – 5 गुना तेज़ चलती है और क्षीण होने से पहले कई किलोमीटर तक जाती है। इसीलिए गहरे समुद्र की एकमात्र व्यावहारिक जाँच ध्वनि से होती है — जहाज़ सोनार (sound navigation and ranging) से ही समुद्र तल का मानचित्र बनाते हैं और पनडुब्बियाँ तथा जहाज़ों के अवशेष खोजते हैं।
संकेत: यदि किसी प्रश्न में लौटने का नहीं बल्कि केवल पहुँचने का समय दिया हो तो उसे आधा न कीजिए। ध्यान से पढ़िए कि दिया गया समय 'वापस लौटने में', 'प्रतिध्वनि के लिए' है या 'पहुँचने में'।