प्र1.
स्रोत से ध्वनि आपके कान तक कैसे पहुँचती है? ध्वनि वायु से होकर संचरण (propagate) करती है परंतु क्या यह ठोसों एवं द्रवों से होकर भी गमन करती है?
उत्तर
ध्वनि किसी भौतिक माध्यम से होकर कान तक पहुँचती है, और हाँ — यह गैसों के साथ-साथ ठोसों और द्रवों से होकर भी गमन करती है।
स्रोत अपने पास के कणों को दोलित कर देता है। ये कण अपने पड़ोसियों से टकराकर संपीडन आगे बढ़ाते हैं; पड़ोसी आगे बढ़ाते हैं; और इस प्रकार विक्षोभ कण-दर-कण कर्णपटल तक पहुँच जाता है। यह कार्य करने वाला पदार्थ माध्यम कहलाता है।
- ठोस: क्रियाकलाप 10.3 — डेस्क पर कान रखकर सुनने पर खरोंच की ध्वनि वायु की तुलना में कहीं अधिक स्पष्ट सुनाई देती है।
- द्रव: क्रियाकलाप 10.4 — जल में डूबे दो चम्मचों की टकराहट भी सुनाई देती है।
- गैस: वायु से होकर सामान्य श्रवण।
ठोसों में ध्वनि सबसे अच्छी तरह क्यों चलती है: ठोस में कण पास-पास और मज़बूती से बँधे होते हैं, अतः धक्का अगले कण तक लगभग तुरंत पहुँच जाता है। गैस में कण दूर-दूर होते हैं और टकराने से पहले कुछ दूरी तय करते हैं, अतः विक्षोभ धीरे-धीरे बढ़ता है। इसीलिए ध्वनि ठोसों में सबसे तीव्र (स्टील ≈ 5000 m s⁻¹), द्रवों में कम (जल ≈ 1500 m s⁻¹) और गैसों में सबसे धीमी (वायु ≈ 340 m s⁻¹) होती है।