कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 10 सोचिए और बताइए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
ध्वनि उत्पन्न करने के विभिन्न साधनों की खोज कीजिए।
उत्तर

हर विधि अंततः एक ही बात पर आती है — किसी वस्तु को कंपन कराना। अंतर केवल इसमें है कि क्या कंपन कराया जा रहा है।

ध्वनि उत्पन्न करने की विधिक्या कंपन करता हैउदाहरण
खींचकर छोड़नातना हुआ तारसितार, वीणा, गिटार, एकतारा, रबड़ बैंड
प्रहार करनातना हुआ पटल अथवा धात्विक वस्तुतबला, ढोलक, मंजीरा, मंदिर की घंटी, स्वरित्र द्विभुज
फूँक मारनानली के भीतर का वायु स्तंभबाँसुरी, शहनाई, शंख, सीटी
गज से रगड़नातार, जिस पर गज फेरा जाता हैसारंगी, वायलिन
रगड़नारगड़ने वाले दोनों पृष्ठटिड्डे और झींगुर पंख या टाँगें रगड़ते हैं; श्यामपट्ट पर चाक की चरचराहट
पट्टियों के बीच से वायु निकालनावाक् तंतुबोलना, गाना, जंतुओं की पुकार
गर्म गैस का अचानक प्रसारवायु स्वयंपटाखा, मेघ गर्जन, गुब्बारे का फूटना, ध्वनि बूम
विद्युत संकेत से शंकु का कंपनस्पीकर का तनुपटमोबाइल फोन, रेडियो, लाउडस्पीकर
समान सूत्र: हर पंक्ति में कोई वस्तु आगे-पीछे गति करती है। यह गति पड़ोसी वायु को संपीडित और विरल करती है, और घनत्व का यही विक्षोभ ध्वनि कहलाता है।
प्र2.
विभिन्न प्रकार के संगीत वाद्ययंत्रों की एक सूची तैयार कीजिए और उनके कंपन करने वाले उन भागों की पहचान कीजिए जो ध्वनि उत्पन्न करते हैं।
उत्तर
वाद्ययंत्रवर्गध्वनि उत्पन्न करने वाला कंपित भागकंपन कैसे कराया जाता है
सितार, वीणा, सरोद, एकतारातत वाद्यतने हुए धातु के तार; तूँबा/ढाँचा ध्वनि को प्रबल करता हैखींचकर छोड़ना
सारंगी, वायलिनतत वाद्यतने हुए तारगज से रगड़ना
तबला, ढोलक, मृदंगम, डमरूअवनद्ध वाद्यढोलशीर्ष का तना हुआ पटल तथा भीतर की वायुप्रहार
बाँसुरी, शहनाई, सीटीसुषिर वाद्यखोखली नली के भीतर का वायु स्तंभफूँक मारना
हारमोनियमसुषिर वाद्यधातु की पतली रीडधौंकनी से भेजी वायु
मंजीरा, घंटी, घटमघन वाद्यधातु या मिट्टी का ढाँचा स्वयंप्रहार
स्वरित्र द्विभुजघन वाद्यदोनों भुजाएँनरम पैड पर टक्कर
अधिकांश वाद्ययंत्रों में एक से अधिक कंपित भाग क्यों: अकेला तार या रीड बहुत कम वायु को गति देता है, अतः ध्वनि क्षीण रहती है। वीणा का तूँबा, तबले का खोल और वायलिन का ढाँचा उसके साथ कंपन करते हैं और बहुत अधिक वायु को गति देते हैं — प्रति सेकंड अधिक ऊर्जा श्रोता तक पहुँचती है और ध्वनि प्रबल हो जाती है।
क्या आप जानते हैं? तबले के पटल के केंद्र पर लगा काला धब्बा — स्याही — पटल के कंपन का ढंग बदल देता है। इसी से भारतीय ढोल एक निश्चित स्वर पर स्वरबद्ध किए जा सकते हैं, जो संसार के अधिकांश ढोलों में संभव नहीं। सर सी. वी. रमन ने इसी का विस्तृत अध्ययन किया था।
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