कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 10 परियोजना कार्य के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
वर्तमान में अनेक लोग ईयरफोन का अत्यधिक उपयोग करते हैं। ऐसे शोध अध्ययनों का पता लगाइए यदि उपलब्ध हों, जो यह समझने के लिए किए गए हों कि ईयरफोन के अधिक उपयोग का सुनने की क्षमता पर क्या प्रभाव पड़ता है। यह भी जानिए कि श्रवण क्षमता का परीक्षण कैसे किया जाता है तथा निम्न, मध्यम और उच्च श्रवण क्षमता ह्रास निर्धारित करने के लिए डेसीबल की क्या सीमाएँ निर्धारित की गई हैं। श्रवण सहायक यंत्रों अथवा उपकरणों को खरीदने तथा निःशुल्क कर्णावर्त प्रतिरोपण से संबंधित सरकारी योजनाओं की जानकारी भी एकत्र कीजिए। इसके साथ अपने निष्कर्षों पर एक लेख भी लिखिए।
उत्तर

विधि। यह एक छोटी शोध परियोजना है, अतः तीन चरणों में काम कीजिए: सामग्री जुटाइए, व्यवस्थित कीजिए, फिर लिखिए।

  1. सामग्री जुटाइए। विश्वसनीय स्रोत लीजिए — सुरक्षित श्रवण पर WHO की रिपोर्ट, ICMR और AIIMS के अध्ययन, तथा सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की वेबसाइट। हर तथ्य के साथ उसका स्रोत और वर्ष अवश्य लिखिए।
  2. श्रवण परीक्षण समझिए। श्रव्यतामापी (audiometer) ज्ञात आवृत्ति के स्वर धीरे-धीरे बढ़ती प्रबलता पर बजाता है; जिस न्यूनतम स्तर पर श्रोता उसे सुन पाता है वही उस आवृत्ति पर उसकी श्रवण देहली है। देहली बनाम आवृत्ति का आलेख श्रव्यता आलेख (audiogram) कहलाता है।
  3. लिखिए — 400 – 600 शब्दों का लेख: ईयरफोन कान पर क्या प्रभाव डालते हैं, अध्ययनों में क्या मिला, ह्रास की श्रेणियाँ क्या हैं, और कौन-सी सहायता उपलब्ध है।

अच्छे लेख में ये बातें अवश्य होनी चाहिए

श्रवण ह्रास की श्रेणीश्रवण देहली (बेहतर कान)दैनिक जीवन में अर्थ
सामान्य20 dB से कमकोई कठिनाई नहीं
निम्न (mild)लगभग 20 – 35 dBधीमी वाणी या शोरगुल में बातचीत समझने में कठिनाई
मध्यम (moderate)लगभग 35 – 50 dBसामान्य बातचीत में कठिनाई; श्रवण यंत्र से प्रायः लाभ होता है
उच्च (severe)लगभग 65 – 80 dBसामान्य वाणी सुनाई नहीं देती; शक्तिशाली यंत्र या प्रतिरोपण चाहिए

नमूना उत्तर (लेख का आरंभ):

नमूना उत्तर: "प्रबलता डेसिबेल में मापी जाती है और डेसिबेल का पैमाना भ्रामक है: पत्तियों की सरसराहट कुछ ही dB की होती है, सामान्य वार्तालाप लगभग 60 dB का, और पटाखे 100 dB से भी अधिक — परंतु dB में थोड़ी-सी वृद्धि से भी ध्वनि तीव्रता में बहुत अधिक वृद्धि हो जाती है। ईयरफोन कान की नली के भीतर बैठते हैं, अतः उसी सेटिंग पर स्पीकर की तुलना में कर्णपटल तक कहीं अधिक प्रबल ध्वनि पहुँचती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन चेतावनी देता है कि 80 dB से ऊपर लंबे समय तक सुनना श्रवण के लिए जोखिम है, और भारत में महाविद्यालयीन विद्यार्थियों पर हुए अध्ययनों में अधिक ईयरफोन उपयोग करने वालों में मापने योग्य देहली-परिवर्तन मिले हैं। क्षति कर्णावर्त की रोम कोशिकाओं को होती है और वे कोशिकाएँ पुनः नहीं बनतीं — इसीलिए यह श्रवण ह्रास स्थायी होता है। भारत सरकार की ADIP योजना (दिव्यांगजनों को सहायक उपकरणों की खरीद/फिटिंग हेतु सहायता) के अंतर्गत श्रवण यंत्र निःशुल्क अथवा अनुदानित मूल्य पर दिए जाते हैं, और पात्र बच्चों के लिए निःशुल्क कर्णावर्त प्रतिरोपण भी इसी योजना में उपलब्ध है। राष्ट्रीय बधिरता निवारण एवं नियंत्रण कार्यक्रम जाँच और उपचार में सहायता करता है।"
सलाह के पीछे की भौतिकी: अधिक आयाम की तरंग अधिक ऊर्जा वहन करती है, और तीव्रता एकांक क्षेत्रफल से एकांक समय में पहुँचने वाली ऊर्जा है। ईयरफोन एक छोटे स्रोत को कर्णपटल के बिल्कुल पास रख देते हैं, अतः क्षेत्रफल अत्यंत छोटा होता है और मध्यम शक्ति पर भी तीव्रता ऊँची हो जाती है। इसीलिए '60/60 नियम' सुझाया जाता है — 60% से अधिक प्रबलता नहीं और एक बार में 60 मिनट से अधिक नहीं।
प्र2.
पोस्टर पेपर या गत्ते एवं आसंजक टेप की सहायता से एक शंकु बनाइए। मोबाइल फोन में कोई संगीत कार्यक्रम चला कर मोबाइल को शंकु से ढक दीजिए। शंकु के साथ और शंकु के बिना ध्वनि की प्रबलता की तुलना कीजिए। आप ध्वनि की विशेषताओं को मापने के लिए किसी अन्य मोबाइल फोन में उपलब्ध ऐप्प का भी उपयोग कर सकते हैं। विभिन्न आकारों के आवरण लेकर प्रयोग कीजिए और अपने अवलोकनों को अभिलेखित कीजिए। (यह क्रियाकलाप शिक्षक के मार्गदर्शन में कराई जाए।)
उत्तर

विधि। पोस्टर पेपर को शंकु के रूप में लपेटकर टेप लगाइए और सँकरे सिरे को इतना काटिए कि फोन का स्पीकर ठीक बैठ जाए। एक स्थिर स्वर या निश्चित संगीत, निश्चित प्रबलता सेटिंग पर चलाइए और मापक फोन लेकर एक निश्चित दूरी पर खड़े होइए। पहले शंकु के बिना dB पाठ्यांक लीजिए, फिर शंकु के साथ — प्रबलता सेटिंग या अपनी स्थिति बदले बिना।

व्यवस्था1 m पर प्रारूपी dB पाठ्यांककैसा सुनाई देता है
केवल फोनलगभग 62 dBपतली ध्वनि, सभी दिशाओं में फैलती है
सँकरा शंकुसामने लगभग 68 dB, बगल में कमसामने अधिक प्रबल, तीक्ष्ण दिशात्मक
चौड़ा शंकुसामने लगभग 66 dB, अधिक फैलावप्रबल पर कम दिशात्मक
शंकु के पीछेकेवल फोन से भी कमस्पष्ट रूप से धीमी

अच्छे उत्तर में यह अवश्य हो: दोनों स्थितियों में समान प्रबलता सेटिंग, हर पाठ्यांक के लिए समान दूरी, कई बार दोहराकर औसत, और शंकु के आगे तथा पीछे दोनों ओर के पाठ्यांक।

शंकु ध्वनि को प्रबल क्यों बना देता है: शंकु ऊर्जा उत्पन्न नहीं करता। उसके बिना ध्वनि फोन से लगभग गोलीय तरंगों के रूप में फैलती है और वही ऊर्जा तेज़ी से बढ़ते क्षेत्रफल में बँट जाती है, अतः तीव्रता शीघ्र घटती है। शंकु उसी ऊर्जा को एक सँकरे पुंज में मोड़ देता है, अतः आपके सामने के छोटे क्षेत्रफल से प्रति सेकंड अधिक ऊर्जा गुज़रती है। तीव्रता एकांक क्षेत्रफल से एकांक समय में ऊर्जा है, अतः सँकरा पुंज अधिक तीव्रता और अधिक अनुभूत प्रबलता देता है। इसका मूल्य यह है कि बगल और पीछे वालों को कम सुनाई देता है।
क्या आप जानते हैं? भोंपू (मेगाफोन), शहनाई का फैला हुआ मुख और पुराने ग्रामोफोन का हॉर्न इसी विचार पर बने हैं। कर्नाटक के बीजापुर स्थित गोल गुम्बज की मर्मरश्रावी गैलरी इसका उल्टा प्रयोग करती है — एक घुमावदार गुंबद जो धीमी-सी फुसफुसाहट को परावर्तित कर पूरे हॉल में पहुँचा देता है।
प्र3.
संगीत समारोहों और सम्मेलन कक्षों में मंच के पीछे की दीवारों तथा छतों का घुमावदार डिजाइन, समतल सतहों की तुलना में श्रोताओं के लिए ध्वनि की गुणवत्ता को कैसे श्रेष्ठ बनाता है? आप किसी वास्तुकार से परामर्श कर सकते हैं या इंटरनेट पर इस विषय में खोज सकते हैं।
उत्तर

मंच के पीछे और ऊपर की घुमावदार सतह ध्वनि को बाहर और नीचे की ओर श्रोताओं की ओर परावर्तित करती है, जिससे कलाकार की अधिक ऊर्जा श्रोताओं तक पहुँचती है और सभी सीटों तक अधिक समान रूप से पहुँचती है।

  • यह ध्वनि को एकत्र कर मोड़ देती है। ध्वनि परावर्तन के उन्हीं नियमों का पालन करती है जो प्रकाश के हैं: आपतन और परावर्तन की दिशाएँ आपतन बिंदु पर अभिलंब से समान कोण बनाती हैं। मंच के पीछे की घुमावदार सतह उस ध्वनि को पकड़ लेती है जो ऊपर और पीछे जा रही थी — जो अन्यथा व्यर्थ जाती — और उसे हॉल की ओर मोड़ देती है।
  • यह प्रबलता को समान करती है। ध्वनि के बड़े क्षेत्रफल में फैलने से तीव्रता घटती है, अतः पिछली सीटों पर ध्वनि अगली सीटों से बहुत कम होती। घुमावदार छत के पैनल इस प्रकार आकार और झुकाव में बनाए जाते हैं कि दूर की सीटों तक अतिरिक्त परावर्तित ध्वनि पहुँचे और आगे-पीछे लगभग समान स्तर मिले।
  • यह विलंब को नियंत्रित करती है। सीधी ध्वनि के लगभग 0.05 s के भीतर पहुँचा परावर्तन उसमें मिलकर उसे प्रबल कर देता है। 0.1 s के बाद पहुँचा परावर्तन पृथक प्रतिध्वनि के रूप में सुनाई देता और वाणी को अस्पष्ट कर देता। वास्तुकार घुमावदार सतहों को इस प्रकार रखते हैं कि हर परावर्तित पथ इतना छोटा रहे कि वह भ्रम नहीं, बल प्रदान करे।
  • समतल समांतर दीवारें अधिक हानिकारक हैं क्योंकि ध्वनि उनके बीच बार-बार परावर्तित होती रहती है, जिससे अत्यधिक अनुरणन और अस्पष्ट, धुँधली ध्वनि उत्पन्न होती है।
अवशोषक भी क्यों चाहिए: केवल परावर्तन से हॉल गूँजने लगेगा। ध्वनि-अवशोषक पैनल, गद्देदार कुर्सियाँ, पर्दे तथा अन्य मुलायम और छिद्रयुक्त सतहें अनावश्यक विलंबित परावर्तनों को सोख लेती हैं। लक्ष्य ऐसा अनुरणन होता है जो संगीत को समृद्ध बनाने के लिए पर्याप्त लंबा हो पर वाणी को स्पष्ट रखने के लिए पर्याप्त छोटा भी।
क्या आप जानते हैं? भारत के मध्यकालीन वास्तुकार इसे भली-भाँति समझते थे। कर्नाटक के बीजापुर स्थित गोल गुम्बज की मर्मरश्रावी गैलरी इस प्रकार बनी है कि धीमी-सी फुसफुसाहट भी विशाल गुंबद में परावर्तित होकर कई बार सुनाई देती है।
प्र4.
किसी मित्र के साथ 200 m या इससे भी बड़े खुले परिसर में ध्वनि की गति मापने की एक सरल गतिविधि कीजिए। (यह गतिविधि शिक्षक के मार्गदर्शन में कराई जाए।) (i) आपका मित्र खुले परिसर के एक छोर पर गुब्बारों के साथ खड़ा हो जबकि आप दूसरे छोर पर स्टॉपवॉच लेकर खड़े हों। (ii) अपने मित्र को एक गुब्बारा फोड़ने का संकेत दीजिए। जैसे ही आप गुब्बारे को फूटते हुए देखें, स्टॉपवॉच चालू कर दीजिए। जैसे ही गुब्बारे के फटने की ध्वनि सुनाई दे तो स्टॉपवॉच बंद करके समय अंकित कीजिए। (iii) इस प्रयोग को कई बार दोहराइए और प्राप्त समयों का औसत ज्ञात कीजिए। (iv) मोबाइल फोन में उपलब्ध किसी मानचित्र अनुप्रयोग की सहायता से अपने और अपने मित्र के मध्य की अनुमानित दूरी ज्ञात कीजिए। (v) मापी गई दूरी को औसत समय से विभाजित करके ध्वनि की औसत गति ज्ञात कीजिए। बताइए कि प्रयोग से प्राप्त गति का मान कितना है? इसकी तुलना वायु में ध्वनि की गति से कीजिए, जो लगभग होती है। (vi) आपने गुब्बारे के फटने को ‘देखने’ और उसकी ध्वनि को ‘सुनने’ के मध्य का समय ही क्यों मापा?
उत्तर
मुद्रण संबंधी सूचना: हिंदी संस्करण में भाग (v) 'इसकी तुलना वायु में ध्वनि की गति से कीजिए, जो लगभग होती है।' पर समाप्त हो जाता है — तुलना का मान छूट गया है। अंग्रेज़ी संस्करण से लीजिए: 25 ºC पर लगभग 346 m s⁻¹।

(v) प्रयोग से लगभग 330 – 360 m s⁻¹ की चाल मिलनी चाहिए, जो 25 ºC पर स्वीकृत मान 346 m s⁻¹ के निकट है।

250 m की मापी गई दूरी के लिए नमूना पाठ्यांक:

प्रयास12345
समय (s)0.750.700.780.720.75
औसत समय = (0.75 + 0.70 + 0.78 + 0.72 + 0.75) s ÷ 5
= 3.70 s ÷ 5 = 0.74 s

ध्वनि की चाल = दूरी ÷ औसत समय
= 250 m ÷ 0.74 s
= 338 m s⁻¹

346 m s⁻¹ से तुलना करने पर त्रुटि (346 − 338)/346 × 100 ≈ 2.3% — स्टॉपवॉच वाले प्रयोग के लिए अच्छा। सबसे बड़ा त्रुटि-स्रोत आपका अपना प्रतिक्रिया काल है, जो लगभग 0.2 s होता है; इसीलिए अनेक बार दोहराकर औसत लेना आवश्यक है।

(vi) 'देखने' और 'सुनने' के बीच का समय ही क्यों: क्योंकि प्रकाश ध्वनि की तुलना में इतना तेज़ चलता है कि गुब्बारे के फूटने की चमक को तत्काल पहुँचा मान लेना उचित है।

250 m पार करने में प्रकाश का समय = 250 m ÷ (3 × 10⁵ m s⁻¹) ≈ 8 × 10⁻⁷ s
250 m पार करने में ध्वनि का समय ≈ 0.74 s
प्रकाश एक मिलीसेकंड के दस-लाखवें भाग जितना समय लेता है — पूर्णतः उपेक्षणीय।

अतः जिस क्षण आप गुब्बारे को फूटते देखते हैं वही व्यावहारिक रूप से वह क्षण है जब ध्वनि उत्पन्न हुई। चमक पर स्टॉपवॉच चालू करना और ध्वनि पर बंद करना इस प्रकार केवल ध्वनि के गमन का समय मापता है, और आपको तथा मित्र को कोई अलग संकेत भेजने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

परिणाम बेहतर कैसे बनाएँ: उपलब्ध सबसे लंबा मैदान लीजिए (अधिक दूरी पर आपकी नियत प्रतिक्रिया-काल त्रुटि कुल समय का छोटा अंश रह जाती है), कम-से-कम दस बार दोहराइए, और भूमिकाएँ बदल-बदलकर दोनों साथियों के प्रतिक्रिया काल का औसत लीजिए। वायु का ताप भी नोट कीजिए, क्योंकि स्वीकृत मान 0 ºC पर 331 m s⁻¹ से बदलकर 22 ºC पर 344 m s⁻¹ हो जाता है।
प्र5.
इंटरनेट संसाधनों की सहायता से आर्द्रता और तापमान का ध्वनि की गति पर प्रभाव जानिए। इसके लिए कुछ संसाधनों की सूची नीचे दी गई है। (i) https://phet.colorado.edu/en/simulations/sound-waves/ (ii) https://musiclab.chromeexperiments.com/Experiments (iii) https://phyphox.org/experiments
उत्तर

ताप और आर्द्रता दोनों वायु में ध्वनि की चाल बढ़ाते हैं, और ताप का प्रभाव कहीं अधिक बड़ा है।

स्थितिवायु में लगभग चालस्रोत
0 ºC पर शुष्क वायु331 m s⁻¹अनुभाग 10.6.3
15 ºC पर वायु340 m s⁻¹तालिका 10.1
22 ºC पर वायु344 m s⁻¹अनुभाग 10.6.3
25 ºC पर वायु346 m s⁻¹परियोजना कार्य, पृष्ठ 207
समान ताप पर नम वायुशुष्क वायु से कुछ अधिकअनुभाग 10.6.3

प्रत्येक संसाधन का उपयोग कैसे करें

  • PhET Sound Waves: आवृत्ति बदलिए और संपीडन-विरलन देखिए। स्वयं पुष्टि कीजिए कि आवृत्ति बदलने पर तरंगदैर्घ्य बदलता है, चाल नहीं।
  • Chrome Music Lab: Spectrogram और Oscilloscope प्रयोग आपकी अपनी वाणी की मूल आवृत्ति और अधिस्वरक दिखाते हैं — ध्वनिगुणता को सीधे देखने का अवसर।
  • Phyphox: 'Audio Spectrum' और 'Audio Scope' वास्तविक आवृत्तियाँ मापते हैं। यह ऐप्प प्रतिध्वनि का समय भी माप सकता है, अतः ज्ञात दूरी पर दीवार लेकर आप गर्म दिन में और फिर ठंडी सुबह में ध्वनि की चाल स्वयं माप सकते हैं।
गर्म वायु ध्वनि को तेज़ क्यों ले जाती है: संपीडन एक अणु से दूसरे तक संघट्टों द्वारा पहुँचता है। ताप बढ़ने पर अणु अधिक तेज़ गति करते हैं, अतः वे अपने पड़ोसियों तक जल्दी पहुँचते हैं और विक्षोभ शीघ्र आगे बढ़ता है। आर्द्रता का कारण इससे मिलता-जुलता है: जल के अणु उन नाइट्रोजन और ऑक्सीजन अणुओं से हल्के होते हैं जिनका स्थान वे लेते हैं, अतः समान दाब पर नम वायु शुष्क वायु से कुछ कम घनी होती है और विक्षोभ को थोड़ा तेज़ ले जाती है।
यह करके देखिए: ऊपर के मानों से गणना कीजिए कि मेघ गर्जन के अनुमान में कितनी त्रुटि हो सकती है। 5 s गिनकर 331 m s⁻¹ से गुणा करने पर 1655 m मिलता है और 346 m s⁻¹ से 1730 m — 1.7 km में केवल लगभग 75 m का अंतर, अतः यह मोटा नियम काफ़ी सुरक्षित है।
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