कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 10 सोचिए और बताइए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
क्रियाकलाप 10.1 को पहले एक बार मोटे रबड़ बैंड के साथ इसके पश्चात पतले रबड़ बैंड के साथ दोहराइए। क्या पतला रबड़ बैंड मोटे रबड़ बैंड की तुलना में अधिक तीव्र कंपन करता है? यदि हाँ, तब पतले रबड़ बैंड द्वारा उत्पन्न ध्वनि की आवृत्ति और आवर्तकाल मोटे रबड़ बैंड द्वारा उत्पन्न ध्वनि की आवृत्ति एवं आवर्तकाल से किस प्रकार भिन्न होते हैं?
उत्तर

हाँ — समान लंबाई और समान तनाव पर पतला बैंड मोटे बैंड की तुलना में अधिक तीव्र कंपन करता है।

बैंडकंपन की दरआवृत्ति νआवर्तकाल T = 1/νसुनाई देने वाली ध्वनि
पतला बैंडअधिक तीव्रअधिककमतीक्ष्ण — उच्च तारत्व
मोटा बैंडकम तीव्रकमअधिकगंभीर — कम तारत्व
ν = 1/T  (समीकरण 10.1)
यदि पतला बैंड 1 s में 400 दोलन पूरे करे, तो ν = 400 Hz और T = 1/400 s = 0.0025 s
यदि मोटा बैंड 1 s में 200 दोलन पूरे करे, तो ν = 200 Hz और T = 1/200 s = 0.005 s
मोटाई से अंतर क्यों पड़ता है: मोटे बैंड की प्रत्येक सेंटीमीटर लंबाई पर अधिक द्रव्यमान होता है। वही प्रत्यानयन बल अब अधिक द्रव्यमान को त्वरित करता है, अतः बैंड आगे-पीछे लौटने में अधिक समय लेता है — प्रत्येक पूर्ण दोलन लंबा हो जाता है। अधिक आवर्तकाल का अर्थ है कम आवृत्ति, क्योंकि ν और T परस्पर व्युत्क्रम हैं।
क्या आप जानते हैं? इसीलिए सितार या वीणा में अलग-अलग मोटाई के तार साथ-साथ लगे होते हैं: मोटे तार निम्न स्वर देते हैं और पतले तार उच्च स्वर, वह भी लगभग समान तनाव पर।
प्र2.
यदि वायु से भरी एक लंबी नली के दोलायमान पिस्टन द्वारा उत्पन्न ध्वनि तरंग की आवृत्ति 20 Hz है तो पिस्टन प्रति मिनट कितने दोलन पूर्ण करता है?
उत्तर

प्रति मिनट 1200 दोलन।

आवृत्ति ν = दोलनों की संख्या ÷ लिया गया समय
∴ दोलनों की संख्या = ν × समय
ν = 20 Hz = 20 s⁻¹,   समय = 1 मिनट = 60 s
दोलनों की संख्या = 20 s⁻¹ × 60 s = 1200
मात्रक कैसे मिलते हैं: हर्ट्ज़ का अर्थ ही 'प्रति सेकंड' है, अतः 20 Hz का शाब्दिक अर्थ है 'प्रत्येक सेकंड में 20 दोलन'। 60 s से गुणा करने पर सेकंड कट जाते हैं और शेष रहता है एक शुद्ध संख्या — दोलनों की गिनती, जो पूछी ही गई थी। गुणा करने से पहले मिनट को सेकंड में बदलना अनिवार्य है; अधिकांश भूलें यहीं होती हैं।
संकेत: 20 Hz मानव श्रव्यता परिसर (20 Hz – 20 kHz) की ठीक निचली सीमा पर है। इस पिस्टन से धीमा कोई भी दोलन अवश्रव्य ध्वनि उत्पन्न करेगा, जिसे हम सुन ही नहीं सकते।
प्र3.
बताइए चित्र 10.19 में आलेख द्वारा निरूपित ध्वनि तरंग का अर्ध तरंगदैर्घ्य क्या है?
उत्तर

अर्ध तरंगदैर्घ्य 1.5 cm (= 0.015 m) है।

पहले आलेख पढ़िए। वक्र 0 पर माध्य घनत्व रेखा से आरंभ होकर श्रृंग तक चढ़ता है, वापस रेखा को पार करता है, गर्त तक गिरता है और 3.0 cm अंकित चिह्न पर पुनः रेखा पर लौट आता है। यह एक पूर्ण घनत्व दोलन है — अतः मुद्रित पैमाने पर एक पूरा तरंगदैर्घ्य है

λ = दो क्रमागत श्रृंगों (अथवा दो क्रमागत गर्तों) के मध्य की दूरी
चित्र 10.19 से: λ = 3.0 cm
∴ λ/2 = 3.0 cm ÷ 2 = 1.5 cm = 0.015 m
0 1.5 3.0 4.5 दूरी (cm) घनत्व λ = 3.0 cm λ/2 = 1.5 cm
चित्र 10.19 का पठन: एक पूर्ण घनत्व दोलन 0 से 3.0 cm तक फैला है, अतः λ = 3.0 cm और अर्ध तरंगदैर्घ्य 1.5 cm।
अर्ध तरंगदैर्घ्य का महत्व: यह ठीक वह दूरी है जो एक संपीडन के केंद्र से अगले विरलन के केंद्र तक होती है। श्रृंग से आधा तरंगदैर्घ्य दूर जाते ही घनत्व अपने अधिकतम से सीधे न्यूनतम तक पहुँच जाता है।
संकेत: एक सामान्य भूल है श्रृंग से अगले गर्त तक की दूरी को तरंगदैर्घ्य मान लेना। वह दूरी तो केवल λ/2 है। सदैव श्रृंग से श्रृंग अथवा गर्त से गर्त मापिए।
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