कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 11 क्रियाकलाप 11.4 के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
मात्र इन तीन जोड़ी लक्षणों से आप कितने संयोजन बना सकते हैं?
उत्तर

आठ। तीनों जोड़ों में से एक-एक मनका निकाला जाता है और प्रत्येक जोड़ा दो विकल्प देता है।

संयोजन = 2 × 2 × 2 = 23 = 8
क्र.सं.जोड़ी 1 (हरा) — बालों का रंगजोड़ी 2 (नीला) — बालों का प्रकारजोड़ी 3 (लाल) — आँखों का रंग
1हल्का हरा — सुनहराहल्का नीला — सीधेहल्का लाल — भूरी
2हल्का हरा — सुनहराहल्का नीला — सीधेगहरा लाल — काली
3हल्का हरा — सुनहरागहरा नीला — घुँघरालेहल्का लाल — भूरी
4हल्का हरा — सुनहरागहरा नीला — घुँघरालेगहरा लाल — काली
5गहरा हरा — कालेहल्का नीला — सीधेहल्का लाल — भूरी
6गहरा हरा — कालेहल्का नीला — सीधेगहरा लाल — काली
7गहरा हरा — कालेगहरा नीला — घुँघरालेहल्का लाल — भूरी
8गहरा हरा — कालेगहरा नीला — घुँघरालेगहरा लाल — काली

सूची का संयोजन 1 वही है जो चित्र 11.9 में बना है — सुनहरे और सीधे बाल के साथ भूरी आँखें।

मनके अर्धसूत्री विभाजन का सही निदर्श क्यों हैं: तीनों जोड़े तीन भिन्न गुणसूत्रों पर हैं, और अर्धसूत्री विभाजन में जब गुणसूत्र जोड़े पंक्तिबद्ध होते हैं तो एक जोड़े का जिस ओर होना अगले जोड़े की दिशा को प्रभावित नहीं करता। प्रत्येक जोड़े से यादृच्छिक और स्वतंत्र रूप से एक मनका निकालना ठीक यही है। जोड़ों का यह स्वतंत्र पृथक्करण ही वह बात है जो अध्याय इन शब्दों में कहता है — ‘प्रत्येक युग्मक के गुणसूत्र अलग हो जाते हैं जिससे प्रत्येक युग्मक को प्रत्येक जोड़े से केवल एक गुणसूत्र प्राप्त होता है’
प्र2.
कल्पना कीजिए कि गुणसूत्रों के 23 जोड़ों के साथ कितने संयोजन संभव होंगे जिनमें से प्रत्येक अनेक लक्षणों की आनुवंशिक जानकारी वहन करता है।
उत्तर

223 = 8,388,608 — अर्थात एक ही व्यक्ति से लगभग 84 लाख भिन्न युग्मक। और यह केवल एक जनक की गणना है।

माता से युग्मक = 223 = 8,388,608
पिता से युग्मक = 223 = 8,388,608
युग्मनज = 223 × 223 = 246
= 70,368,744,177,664 ≈ 7.0 × 1013 संयोजन

लगभग सत्तर लाख करोड़ — पृथ्वी की पूरी मानव जनसंख्या का लगभग दस हजार गुना। एक ही माता-पिता के दो बच्चों (समरूप जुड़वाँ को छोड़कर) को गुणसूत्रों का एक ही संयोजन मिलने की प्रायिकता लगभग 1 में 7 × 1013 है।

जाति के लिए इसका महत्त्व: इनमें से प्रत्येक संयोजन थोड़ा भिन्न व्यक्ति है। परिस्थितियाँ बदलने पर इनमें से कुछ व्यक्ति संयोगवश बेहतर सामना कर लेते हैं — अध्याय के दो उदाहरण यही हैं: कुछ लोग अधिक ऊँचाई पर ऑक्सीजन के कम स्तर को सह लेते हैं और कुछ वयस्क होकर भी दूध पचा लेते हैं। विभिन्नता प्रतिलिपि बनाने की कोई त्रुटि नहीं है; वह वह कच्चा माल है जिससे जाति परिवर्तन का सामना करती है और लंबे काल में जैव विकास इसी से चलता है।
संकेत: वास्तविक संख्या इससे भी बड़ी है। अध्याय का यह निदर्श केवल पूरे गुणसूत्रों के स्वतंत्र पृथक्करण को गिनता है। पृथक होने से पहले गुणसूत्र अपने सहभागी से टुकड़ों का आदान-प्रदान भी करते हैं, अतः वास्तव में भिन्न युग्मकों की संख्या 223 से कहीं आगे है।
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