जातियाँ वन में समान रूप से नहीं फैली होतीं — प्रत्येक वहीं मिलती है जहाँ उसकी विशिष्ट आवश्यकताएँ पूरी होती हैं। इसलिए वन एक समान वृक्षों का ढेर नहीं, बल्कि छोटे-छोटे विशिष्ट क्षेत्रों की पच्चीकारी है।
पक्के के उदाहरण में निकट रूप से संबंधित पादप और जंतु —
- पुराने विशाल वृक्ष ↔ धनेश। वृक्ष घोंसले का कोटर देता है; उपयुक्त आकार का कोटर न हो तो पक्षी जनन ही नहीं कर सकता।
- फलदार वृक्ष ↔ धनेश। वृक्ष भोजन देता है; धनेश फल निगलकर बीज को मूल वृक्ष से दूर गिरा देता है, अर्थात बीज प्रकीर्णन करता है। यह संबंध दोनों ओर से चलता है — इसीलिए धनेश को "वन का कृषक" कहा जाता है।
- बाघ ↔ हिरण ↔ घास और झाड़ियाँ। अभयारण्य की संपूर्ण आहार श्रृंखला आधार पर स्थित पादपों पर टिकी है।