कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 12 जीवजगत का स्वरूप — विविधता एवं वर्गीकरण के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-08
इस अध्याय के बारे में
जैव विविधता जीवों की संपूर्ण विविधता है। भारत में यह इसलिए समृद्ध है क्योंकि यहाँ हिमालय से लेकर थार मरुस्थल और पश्चिमी घाट तक भिन्न-भिन्न पर्यावास हैं। जो जातियाँ केवल एक ही क्षेत्र में पाई जाती हैं वे स्थानिक जातियाँ कहलाती हैं (नीलगिरी तहर, लाॅयन टेल्ड मकाक, नेपेन्थीस खासियाना , नीलकुरिंजी), और स्थानिक जातियों से समृद्ध किंतु पर्यावास की भारी क्षति झेल चुके क्षेत्र जैव विविधता हॉटस्पॉट कहलाते हैं। जीवों का वर्गीकरण सात प्रकार के प्रमाणों पर होता है — बाह्य विशेषताएँ, पोषण की विधि, आंतरिक संरचनाएँ, कोशिका संरचना, पारिस्थितिकीय भूमिका, जनन और आनुवंशिक समानता। समान विशेषताएँ समान पूर्वज की ओर संकेत करती हैं। प्रणाली क्रमशः विकसित हुई — अरस्तू (पर्यावास) → द्विजगत (1758, लिनियस) → तीन जगत (1866, हेकल, प्रोटिस्टा जोड़ा) → चार जगत (1938, कोपलैंड, मोनेरा जोड़ा) → पाँच जगत (1969, व्हिटेकर) : मो
अभ्यास
- चिंतन कीजिए
- क्रियाकलाप 12.1
- सोचिए और बताइए
- क्रियाकलाप 12.2
- क्रियाकलाप 12.3
- क्रियाकलाप 12.4
- क्रियाकलाप 12.5
- सोचिए और बताइए
- विज्ञान एवं समाज
- क्रियाकलाप 12.6
- पाठ्य प्रश्न
- क्रियाकलाप 12.7
- सोचिए और बताइए
- क्रियाकलाप 12.8
- क्रियाकलाप 12.9
- पाठ्य प्रश्न
- पाठ्य प्रश्न
- सोचिए और बताइए
- विज्ञान एवं समाज
- पाठ्य प्रश्न
- सोचिए और बताइए
- विज्ञान एवं समाज
- अभ्यास प्रश्न
- परियोजना कार्य
- खोज जारी है…