कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 12 क्रियाकलाप 12.6 के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
हैंड लेंस (आवर्धक लेंस) की सहायता से कुछ ब्रायोफाइट का अवलोकन कीजिए। इन्हें एक वॉच ग्लास में एकत्र कीजिए।
उत्तर

ब्रायोफाइट नम, छायादार सतहों पर हरे कालीन के रूप में ढूँढ़िए — पुराने भवनों की दीवारें, नम चट्टानें, वृक्षों का आधार, या वर्षा के बाद मिट्टी की सतह। भोथरे चाकू से छोटा-सा टुकड़ा उठाइए, उसे नम रखते हुए वॉच ग्लास में डालिए।

हैंड लेंस से क्या दिखता है —

  • पूरा पौधा बहुत छोटा है — प्रायः केवल 1 से 3 cm ऊँचा।
  • आधार पर महीन धागे जैसी रचनाएँ हैं जो इसे सतह से जोड़े रखती हैं। ये मूलाभास (राइजॉइड) हैं — जड़ जैसी, परंतु वास्तविक जड़ नहीं।
  • मॉस में इनके ऊपर एक पतला तने जैसा अक्ष होता है जिस पर बहुत छोटी पत्ती जैसी संरचनाएँ सर्पिल क्रम में लगी रहती हैं। मार्केशिया (लिवरवर्ट) में ऐसा अक्ष होता ही नहीं — इसकी काया मिट्टी पर पड़ा चपटा हरा फीता होती है।
  • कालीन से उठते महीन डंठल और उनके सिरे पर संपुट भी दिख सकते हैं — यही बीजाणु बनाने वाला भाग है।
सावधानी: केवल छोटा टुकड़ा लीजिए और कालीन को बचाए रखिए। मॉस की चादर दोबारा उगने में पूरी ऋतु ले सकती है।
प्र2.
इन पर जल की एक बूँद डालिए और उसे विच्छेदन सूक्ष्मदर्शी द्वारा देखिए। विच्छेदन सूक्ष्मदर्शी हमारे लिए सजीव प्रतिदर्शों के आवर्धित बिंब को देखना संभव बनाता है।
उत्तर

जल की बूँद दो काम करती है: प्रतिदर्श को जीवित रखती है, और अत्यंत पतली पत्ती जैसी संरचनाओं को पारदर्शी बना देती है ताकि उनसे प्रकाश पार हो सके।

विच्छेदन सूक्ष्मदर्शी से क्या दिखना चाहिए —

  • "पत्ती" प्रायः एक ही कोशिका मोटी होती है, अतः बिना किसी अभिरंजन या काट के आप अलग-अलग कोशिकाएँ और उनके भीतर के हरे हरितलवक देख सकते हैं।
  • इसमें न मध्य शिरा है, न शिराओं का जाल
  • मूलाभास सरल धागे हैं, शाखित अवशोषी जड़ें नहीं।
  • जल सोखते ही पूरा पौधा फैलकर खड़ा हो सकता है — सूखा मॉस मिनटों में जी उठता है।
संकेत: विच्छेदन सूक्ष्मदर्शी आवर्धन कम देता है परंतु पूरे सजीव प्रतिदर्श का सीधा, त्रिविम बिंब देता है। यहाँ यही उपयुक्त उपकरण है — संयुक्त सूक्ष्मदर्शी के लिए पौधे की पतली काट बनानी पड़ती और वह उसे मार देती।
प्र3.
आपके आस-पास सामान्यतः दिखाई देने वाली पत्तियों से ये किस प्रकार भिन्न हैं?
उत्तर

ब्रायोफाइट की "पत्ती" वास्तव में पत्ती है ही नहीं। यह एक चपटी, प्रायः एक कोशिका मोटी हरी परत है जिसमें न शिराएँ हैं, न मध्य शिरा, न वृंत, न मोमी उपत्वचा। नीम या आम की सामान्य पत्ती अनेक कोशिकाएँ मोटी होती है, उसमें मध्य शिरा और शाखित शिरा-जाल होता है, वृंत होता है, तथा रंध्रों सहित मोमी उपत्वचा होती है।

विशेषताब्रायोफाइट (मॉस)पुष्पी पादप की पत्ती
मोटाईप्रायः एक कोशिका मोटीअनेक कोशिका स्तर — बाह्यत्वचा, मध्योतक, बाह्यत्वचा
शिराएँअनुपस्थित — न जाइलम, न फ्लोएममध्य शिरा और शाखित शिरा-जाल जिनमें जाइलम-फ्लोएम
उपत्वचाअनुपस्थित या अत्यंत पतलीरंध्रों सहित मोमी उपत्वचा
जुड़ावसीधे तने जैसे अक्ष सेवृंत द्वारा
जल की आपूर्तिपूरी सतह से सीधे अवशोषणजड़ों से जाइलम द्वारा
पूरे पौधे का आमापकुछ सेंटीमीटरदसियों मीटर तक
ऐसा क्यों होता है: ये सारे अंतर एक ही तथ्य से निकलते हैं — ब्रायोफाइट में संवहनी ऊतक नहीं होते। जल ऊपर उठाने के लिए जाइलम नहीं और भोजन बाँटने के लिए फ्लोएम नहीं, अतः हर कोशिका को जल सीधे परिवेश से लेना पड़ता है — इसलिए काया को पतला, नीचा और सदा नम रहना पड़ता है। एक कोशिका मोटी होना ही इसे संभव बनाता है। उपत्वचा उसी अवशोषण को रोक देती जिस पर पौधा टिका है, इसलिए वह भी नहीं है। और जाइलम न होने से कुछ कठोर भी नहीं जो ऊँची काया को सँभाल सके — यही असली कारण है कि मॉस कभी वृक्ष नहीं बनते।
तो ये जीवित कैसे रहते हैं? ब्रायोफाइट को जनन के लिए जल की आवश्यकता होती है, क्योंकि नर जनन कोशिकाओं को तैरकर मादा कोशिकाओं तक पहुँचना पड़ता है। इसीलिए इन्हें पादप जगत का उभयचर कहा जाता है — ये स्थल पर रहते हैं पर जल को अभी छोड़ नहीं पाए।
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