कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 12 विज्ञान एवं समाज के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
क्या आपने वृक्षों के तनों, नम दीवारों अथवा पत्थरों पर सफेद हरे धब्बे देखे हैं? आप इस विषय में क्या सोचते हैं? गाँव में जाकर किसी वयोवृद्ध व्यक्ति से इन धब्बों के विषय में बात कीजिए।
उत्तर

ये धब्बे लाइकेन हैं — और गाँव का वयोवृद्ध व्यक्ति तथा शोधकर्ता, दोनों इन्हें एक ही अर्थ में पढ़ते हैं: स्वच्छ वायु का सूचक।

लाइकेन वस्तुतः है क्या: यह एक जीव नहीं, दो जीव हैं जो सहजीवी (पारस्परिक) संबंध में रहते हैं — एक भागीदार स्वपोषी शैवाल है और दूसरा विषमपोषी कवक। कवक सुरक्षा देता है और जल रोके रखता है; शैवाल प्रकाश संश्लेषण करके भोजन प्रदान करता है। इनमें से कोई भी अकेले नंगे पत्थर या सूखे तने पर नहीं रह सकता।
ये प्रदूषण मापक क्यों बनते हैं: लाइकेन में न जड़ें होती हैं न मोमी उपत्वचा। वह जल और खनिज सीधे वायु से अपनी पूरी सतह द्वारा लेता है। वायु में जो कुछ है वह भी साथ ही भीतर चला जाता है — सल्फर डाइऑक्साइड और अन्य प्रदूषक सहित — जिन्हें लाइकेन न रोक सकता है न बाहर निकाल सकता है। अतः वायु में जो है वह उसमें संचित होता जाता है। लाइकेन वायु प्रदूषकों के अनुसार अपना रंग परिवर्तित करते हैं, और उसी रंग से शोधकर्ता वायु में प्रदूषकों की सांद्रता का पता लगाते हैं। इसीलिए ये वायु की गुणवत्ता के मापन के लिए प्राकृतिक जैव सूचक हैं।

वयोवृद्ध व्यक्ति संभवतः आपको क्या बताएँगे (यह भाग आपको स्वयं करना है — नीचे वे बातें हैं जो ऐसी बातचीत में प्रायः मिलती हैं) —

  • ये धब्बे बताते हैं कि यहाँ की वायु स्वच्छ है; जहाँ धुआँ या कारखाना हो वहाँ ये मिट जाते हैं।
  • कुछ प्रकार, जिन्हें पत्थर के फूल कहा जाता है, वन्य उत्पाद के रूप में एकत्र किए जाते हैं और मसाले के रूप में उपयोग होते हैं।
  • कुछ औषधियों में उपयोग किए जाते हैं।
  • प्राचीनकाल से कुछ का उपयोग रंजक बनाने में होता है, जिनसे ऊन और रेशम के कपड़ों को मैरून, बैंगनी या गहरा लाल-बैंगनी रंग दिया जाता है।
सावधानी — और वर्गीकरण क्यों आवश्यक है: कुछ लाइकेन विषैले होते हैं। इनकी सही पहचान कोई शैक्षणिक अभ्यास नहीं है; यही तय करती है कि एकत्र किया गया लाइकेन भोजन में जाएगा या रंजक के बर्तन में। इसीलिए बॉक्स के अंत में कहा गया है कि सुरक्षित और उचित उपयोग के लिए इनकी सही पहचान और वर्गीकरण महत्त्वपूर्ण है।
अपनी कॉपी के लिए नमूना उत्तर: "मैंने अपने गाँव के श्री रामसिंह जी से बात की। उन्होंने कुएँ के पास नीम के तने पर धूसर-हरे धब्बे दिखाकर बताया कि ये वहीं उगते हैं जहाँ हवा अच्छी हो; उन्हें याद है कि ईंट-भट्ठा शुरू होने के बाद सड़क किनारे के पेड़ों से ये गायब हो गए। उनका परिवार पहाड़ी से एक पत्तीदार किस्म लाता है जिसे पत्थर के फूल कहते हैं और मसाले में डालते हैं। उन्होंने चेताया कि पत्थर पर दिखने वाला हर धब्बा एक ही चीज़ नहीं होता और सब खाने योग्य नहीं होते।"
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ