कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 12 क्रियाकलाप 12.7 के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
सूरजमुखी के तने की अनुप्रस्थ काट का स्मरण कीजिए जिसका अध्ययन आपने अध्याय 3 में किया है (चित्र 3.7)।
उत्तर

सूरजमुखी एक द्विबीजपत्री एंजियोस्पर्म है — इस अध्याय का सबसे उन्नत पादप समूह। अध्याय 3 के अनुसार उसके तने की अनुप्रस्थ काट इस प्रकार व्यवस्थित होती है —

  • सबसे बाहर उपत्वचा सहित बाह्यत्वचा
  • उसके नीचे वल्कुट का क्षेत्र।
  • संवहन पूल एक वलय में, समान दूरी पर, प्रत्येक पूल में जाइलम भीतर की ओर और फ्लोएम बाहर की ओर
  • प्रत्येक पूल में जाइलम और फ्लोएम के बीच एधा (कैंबियम) की पट्टी — विभाजित होती कोशिकाओं का स्तर।
  • बीच में बड़ा मज्जा
संकेत: दो बातें मन में बैठा लीजिए — पूलों का वलय में होना, और एधा का उपस्थित होना। तुलना का सारा बिंदु अब इन्हीं दो पर टिकेगा।
प्र2.
फर्न (टेरिडोफाइट) के तने की अनुप्रस्थ काट (चित्र 12.11) की तुलना अध्याय 3 में पढ़े गए सूरजमुखी के तने की अनुप्रस्थ काट (चित्र 3.7) से कीजिए।
उत्तर
विशेषताफर्न का तना (टेरिडोफाइटा, चित्र 12.11 ख)सूरजमुखी का तना (एंजियोस्पर्म, चित्र 3.7)
जाइलम और फ्लोएमउपस्थितउपस्थित
संवहनी ऊतक का विन्यासबिखरे हुए पूल / केंद्रीय समूह, नियमित वलय नहींमज्जा के चारों ओर नियमित वलय में पूल
एधा (कैंबियम)अनुपस्थितउपस्थित, जाइलम और फ्लोएम के बीच
मोटाई में वृद्धिअत्यंत सीमित — नया संवहनी ऊतक नहीं जुड़ सकतासंभव — एधा निरंतर नया जाइलम-फ्लोएम बनाती रहती है
जाइलम में वाहिकाएँअधिकांशतः केवल वाहिनिकाएँवाहिकाएँ उपस्थित — चौड़ी, तेज़ जल संवहन
मज्जाछोटा या स्पष्ट रूप से अलग नहींबड़ा और सुस्पष्ट
फर्न — बिखरे पूल, एधा अनुपस्थित मज्जा सूरजमुखी — वलय में पूल, एधा सहित
वही ऊतक, भिन्न व्यवस्था: फर्न के पूल बिखरे और संख्या में निश्चित हैं; सूरजमुखी के पूल वलय में हैं और एधा से नए जुड़ते रहते हैं।
प्र3.
फर्न के तने और उच्चतर पादपों के तने के संवहनी ऊतकों में आपको क्या अंतर दिखाई देते हैं? अपने अवलोकन लिखिए और कक्षा में उन्हें साझा कर उन पर चर्चा कीजिए।
उत्तर

दोनों में जाइलम और फ्लोएम हैं — अंतर इस बात का है कि ऊतक किस प्रकार व्यवस्थित है और क्या वह आगे बनता रह सकता है।

लिखने योग्य अवलोकन —

  1. फर्न का संवहनी ऊतक अधिक सरल और कम व्यवस्थित है: मज्जा के चारों ओर नियमित वलय के स्थान पर आधारी ऊतक में बिखरे पूल।
  2. फर्न के जाइलम में मुख्यतः वाहिनिकाएँ होती हैं जो सँकरी हैं; उच्चतर पादपों में चौड़ी वाहिकाएँ भी होती हैं, अतः जल तेज़ी से और अधिक मात्रा में चलता है।
  3. फर्न में एधा नहीं होती। उच्चतर पादप के हर पूल में जाइलम और फ्लोएम के बीच एधा होती है।
एधा ही सबसे महत्त्वपूर्ण अंतर क्यों है: एधा के बिना फर्न को जीवन भर उतना ही संवहनी ऊतक मिलता है जितना आरंभ में बना। पौधा बढ़ता है तो वही निश्चित नलिकाएँ लगातार बड़ी होती काया को सँभालती हैं — इसलिए फर्न शीघ्र ही ऊँचाई और मोटाई की सीमा पर पहुँच जाता है। एधा होने पर सूरजमुखी या वृक्ष हर ऋतु भीतर की ओर नया जाइलम और बाहर की ओर नया फ्लोएम बनाता रहता है। नलिका प्रणाली पौधे के साथ बढ़ती है। इसीलिए स्थल के सबसे विशाल जीव बीजी पादप हैं, फर्न नहीं — और काष्ठ के अस्तित्व का शारीरिक कारण भी यही है।
कक्षा में चर्चा का बिंदु: फर्न ने परिवहन की समस्या हल कर ली है, परंतु मोटाई में वृद्धि की नहीं; और स्थल पर जनन की समस्या भी नहीं — उसे निषेचन के लिए अब भी जल चाहिए और वह बीज नहीं बनाता। इस अध्याय का हर पादप समूह पिछले समूह की समस्या हल करता है और अपनी एक नई समस्या छोड़ जाता है।
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