प्र1.
पादपों की ऐसी कौन-सी विशेषताएँ हैं जो जल पर पादपों की निर्भरता को कम करती हैं परंतु इसके पश्चात भी नम परिस्थितियों की आवश्यकता बनी रहती है?
उत्तर
जो विशेषताएँ जल पर निर्भरता घटाती हैं वे परिवहन और अवलंब की समस्या हल करती हैं; और जो विशेषताएँ पौधे को नमी से बाँधे रखती हैं वे जनन से जुड़ी हैं। टेरिडोफाइट वह समूह है जहाँ ये दोनों विपरीत दिशाओं में खींचते हैं।
| विशेषता | यह किस बंधन से मुक्त करती है | यह क्या हल नहीं करती |
|---|---|---|
| वास्तविक जड़ | काया से भी गहरे जल तक पहुँच; स्थिरीकरण | — |
| जाइलम और फ्लोएम | ऊँची काया तक जल और भोजन पहुँचाना, तने को कठोरता देना | — |
| पत्ती पर उपत्वचा | शुष्क वायु में जल की हानि | — |
| चल नर युग्मक | — | नर कोशिका को अंडाणु तक तैरकर जाना पड़ता है, अतः निषेचन के लिए जल की परत अनिवार्य है |
| बीज का अभाव | — | बीजाणु में न संचित भोजन है न रक्षक आवरण, इसलिए वह वहीं अंकुरित हो सकता है जहाँ पहले से नमी हो |
यह विभाजन क्यों है: कायिक जीवन और जनन दो अलग समस्याएँ हैं। फर्न की जड़ें और संवहनी ऊतक उसे खुले जल से दूर उगने और एक मीटर ऊँचा खड़ा होने देते हैं। परंतु निषेचन के क्षण में नर कोशिका को अपने बल पर मादा कोशिका तक जाना पड़ता है, और वह केवल तैर सकती है। परिवहन हल कर लीजिए तो आप स्थल पर रह सकते हैं; परंतु जब तक निषेचन हल न हो, आप सूखे स्थल पर जनन नहीं कर सकते। ठीक यही काम जिम्नोस्पर्म आगे करते हैं — इसीलिए अध्याय ने उनका शीर्षक "जलरहित जनन" रखा है।
ब्रायोफाइट इसी प्रतिरूप में एक सीढ़ी नीचे बैठते हैं। इनमें मूलाभास और थोड़ी विभेदित काया है, अतः इन्होंने जल छोड़ दिया; परंतु संवहनी ऊतक न होने और नर युग्मकों के तैरने के कारण इन्हें जीने और जनन दोनों के लिए नमी चाहिए। इसीलिए नाम पड़ा — पादप जगत का उभयचर।