कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 12 सोचिए और बताइए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
पादपों की ऐसी कौन-सी विशेषताएँ हैं जो जल पर पादपों की निर्भरता को कम करती हैं परंतु इसके पश्चात भी नम परिस्थितियों की आवश्यकता बनी रहती है?
उत्तर

जो विशेषताएँ जल पर निर्भरता घटाती हैं वे परिवहन और अवलंब की समस्या हल करती हैं; और जो विशेषताएँ पौधे को नमी से बाँधे रखती हैं वे जनन से जुड़ी हैं। टेरिडोफाइट वह समूह है जहाँ ये दोनों विपरीत दिशाओं में खींचते हैं।

विशेषतायह किस बंधन से मुक्त करती हैयह क्या हल नहीं करती
वास्तविक जड़काया से भी गहरे जल तक पहुँच; स्थिरीकरण
जाइलम और फ्लोएमऊँची काया तक जल और भोजन पहुँचाना, तने को कठोरता देना
पत्ती पर उपत्वचाशुष्क वायु में जल की हानि
चल नर युग्मकनर कोशिका को अंडाणु तक तैरकर जाना पड़ता है, अतः निषेचन के लिए जल की परत अनिवार्य है
बीज का अभावबीजाणु में न संचित भोजन है न रक्षक आवरण, इसलिए वह वहीं अंकुरित हो सकता है जहाँ पहले से नमी हो
यह विभाजन क्यों है: कायिक जीवन और जनन दो अलग समस्याएँ हैं। फर्न की जड़ें और संवहनी ऊतक उसे खुले जल से दूर उगने और एक मीटर ऊँचा खड़ा होने देते हैं। परंतु निषेचन के क्षण में नर कोशिका को अपने बल पर मादा कोशिका तक जाना पड़ता है, और वह केवल तैर सकती है। परिवहन हल कर लीजिए तो आप स्थल पर रह सकते हैं; परंतु जब तक निषेचन हल न हो, आप सूखे स्थल पर जनन नहीं कर सकते। ठीक यही काम जिम्नोस्पर्म आगे करते हैं — इसीलिए अध्याय ने उनका शीर्षक "जलरहित जनन" रखा है।
ब्रायोफाइट इसी प्रतिरूप में एक सीढ़ी नीचे बैठते हैं। इनमें मूलाभास और थोड़ी विभेदित काया है, अतः इन्होंने जल छोड़ दिया; परंतु संवहनी ऊतक न होने और नर युग्मकों के तैरने के कारण इन्हें जीने और जनन दोनों के लिए नमी चाहिए। इसीलिए नाम पड़ा — पादप जगत का उभयचर।
प्र2.
ऊँचे पादपों को विशेष परिवहन ऊतकों की आवश्यकता क्यों होती है?
उत्तर

क्योंकि लंबी दूरी पर विसरण अत्यंत धीमा है, और ऊँची काया को सँभालने के लिए कुछ कठोर भी चाहिए। परिवहन ऊतक दोनों आवश्यकताएँ एक साथ पूरी करता है।

दूरी की समस्या। विसरण मिलीमीटर के अंशों पर अच्छा काम करता है और मीटरों पर निराशाजनक — लगा समय दूरी के वर्ग के अनुपात में बढ़ता है। कुछ सेंटीमीटर के मॉस में सतह से सोखा जल हर कोशिका तक पहुँच जाता है। फर्न, चीड़ या गुलमोहर में पत्तियाँ मृदा से मीटरों ऊपर और जड़ें निकटतम पत्ती से मीटरों नीचे हो सकती हैं। कोई भी सिरा दूसरे को विसरण से पूर्ति नहीं दे सकता।
जड़ें जल सोखती हैं — परंतु प्रकाश संश्लेषण नहीं कर सकतीं।
पत्तियाँ भोजन बनाती हैं — परंतु मृदा तक नहीं पहुँच सकतीं।
जाइलम: जल + खनिज, जड़ → पत्तियाँ।
फ्लोएम: भोजन, पत्तियाँ → शेष सभी भाग, जड़ों सहित।
दोनों के बिना ऊँचे पौधे का एक सिरा भूखा रहेगा और दूसरा सूख जाएगा।
अवलंब की समस्या। जाइलम केवल नलिका नहीं है। इसकी कोशिकाओं की भित्तियाँ मोटी और लिग्निन से कठोर होती हैं और परिपक्व होने पर ये मर जाती हैं, पीछे खोखली दृढ़ नलियाँ छोड़कर। गुच्छों में ये मचान की भाँति काम करती हैं — जो ऊतक जल ले जाता है वही पौधे को खड़ा भी रखता है। छोटे पौधे को कोशिकाओं का स्फीति दाब सँभाल लेता है; ऊँचे को नहीं। इसीलिए कोई भी असंवहनी पादप ऊँचा नहीं होता, और इसीलिए काष्ठ (जो मुख्यतः पुराना जाइलम है) के कारण वृक्ष संभव हुए।
ऊँचाई की कीमत क्यों चुकाई जाती है: प्रकाश के लिए। ऊँचा पौधा सूर्य का प्रकाश अपने पड़ोसियों से पहले रोक लेता है। इस अनुभाग की हर संरचना — जड़, जाइलम, लिग्निन, एधा — पत्तियों को प्रतिस्पर्धा से ऊपर पहुँचाने की कीमत का हिस्सा है।
प्र3.
पादप कहाँ और कैसे जीवित रहेंगे इसे बीज और फल किस प्रकार प्रभावित करते हैं?
उत्तर

बीज पौधे को जनन के लिए जल की आवश्यकता से मुक्त करता है; और फल उसकी संतति को वहीं उगने की विवशता से मुक्त करता है जहाँ जनक खड़ा है। इन्हीं दो संरचनाओं से समझ आता है कि एंजियोस्पर्म पृथ्वी का सर्वाधिक विविधता वाला पादप समूह क्यों है।

बीज क्या करता है

  • यह विकासशील भ्रूण की रक्षा कठोर आवरण में करता है, जिससे नया पौधा सूखा, ठंड और समय झेल सके — वह प्रसुप्त पड़ा रहकर अनुकूल परिस्थिति की प्रतीक्षा कर सकता है।
  • इसमें भोजन संचित रहता है, अतः अपनी पत्तियाँ खुलने तक अंकुर को पोषण मिलता है। बीजाणु में न आवरण होता है न भोजन, इसीलिए फर्न का बीजाणु केवल पहले से नम और छायादार स्थान पर ही अंकुरित हो सकता है।
  • जिम्नोस्पर्म और एंजियोस्पर्म में निषेचन के लिए जल की आवश्यकता नहीं होती — परागकण नर युग्मक को बीजांड तक पहुँचा देता है, अतः शुक्राणु को कभी तैरना नहीं पड़ता। यही एकमात्र परिवर्तन पादपों को शुष्क क्षेत्रों में जनन करने योग्य बनाता है।

फल क्या करता है

  • यह पकते हुए बीजों को घेरता और सुरक्षित रखता है।
  • यह बीजों को नए स्थानों तक फैलाने में सहायक होता है — कीटों या पक्षियों, जंतुओं, वायु या जल द्वारा। जनक के नीचे अंकुरित बीज को प्रकाश, जल और खनिज के लिए जनक से ही प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है; प्रकीर्णित बीज को नहीं।
यह पादपों के निवास में कैसे दिखता है:
  • जिम्नोस्पर्म — चीड़ और साइकैड — ठंडे और शुष्क क्षेत्रों के लिए सुअनुकूलित हैं। इनकी सुई या शल्क जैसी पत्तियाँ जल की हानि कम करती हैं और बीज शंकुओं पर अनावृत रहते हैं। जल के बिना निषेचन ही इन्हें वहाँ रहने योग्य बनाता है।
  • एंजियोस्पर्म में पुष्प भी हैं जो परागणकर्ताओं को आकर्षित करके जनन की दक्षता बढ़ाते हैं, और फल भी जो बीज को दूर ले जाते हैं। इन्हीं विशेषताओं से एंजियोस्पर्म मरुस्थल से वर्षावन और अलवणीय जल तक विविध पर्यावरणों में निवास कर पाते हैं, और पृथ्वी का सर्वाधिक विविधता वाला पादप समूह बनते हैं।
क्या आप जानते हैं? "एंजियोस्पर्म" में एंजियोंन का अर्थ है पात्र और स्पर्मोस का अर्थ बीज — अर्थात "पात्र में बंद बीज", यानी फल। जिम्नोस का अर्थ है अनावृत: जिम्नोस्पर्म का बीज शंकु पर खुला पड़ा रहता है।
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