प्र1.
आपके विचार से वैज्ञानिक भविष्य में कौन-सी नई जानकारियाँ प्राप्त करेंगे और इससे वर्गीकरण प्रणाली पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर
दिशा इसी अध्याय में दिख रही है: हर पिछला संशोधन देखने के किसी नए ढंग से आया, और देखने का नवीनतम ढंग डीएनए है। अगले परिवर्तन वहीं से आने की संभावना है।
क्या खोजा जा सकता है, और उससे वर्गीकरण पर क्या असर होगा
| संभावित प्रगति | वर्गीकरण प्रणाली पर प्रभाव |
|---|---|
| संपूर्ण जीनोम अनुक्रमण का सस्ता और सामान्य हो जाना | संबंध रूप-रंग से नहीं, डीएनए से तय होंगे। जो समूह दिखने में एक जैसे पर असंबद्ध हैं वे अलग होंगे; छिपे संबंधी जुड़ेंगे |
| उन सूक्ष्मजीवों का अनुक्रमण जिन्हें प्रयोगशाला में उगाया नहीं जा सकता | अधिकांश सूक्ष्मजीव कभी संवर्धित नहीं हुए। मृदा और समुद्री जल से सीधे उनका डीएनए पढ़ना अब भी अकल्पित विविधता उजागर कर रहा है — तीन डोमेन पद्धति को और उपविभाजन की आवश्यकता पड़ सकती है |
| विषाणुओं का निर्धारित स्थान | या तो जगतों के साथ एक पृथक श्रेणी, या वर्गीकरण के प्रयोजन से "सजीव" की परिभाषा का पुनर्निर्धारण |
| अनन्वेषित पर्यावासों से नई जातियाँ — गहरा समुद्र, गुफाएँ, वन-वितान, उष्ण स्रोत | संभव है ऐसे जीव मिलें जो किसी वर्तमान समूह में न बैठें, जैसे केरल के बैंगनी मेंढक (2003) ने मेंढकों का एक प्राचीन कुल उजागर किया |
| बेहतर जीवाश्म तिथि-निर्धारण और प्राचीन डीएनए | विलुप्त समूह वंश-वृक्ष पर सही स्थान पर रखे जा सकेंगे, जिससे वर्गीकरण जीवन के वर्तमान स्वरूप के साथ उसका वास्तविक इतिहास भी दर्ज करेगा |
वर्गीकरण बदलता क्यों रहेगा — और यह दुर्बलता नहीं, शक्ति क्यों है: अध्याय स्वयं उत्तर देता है। अरस्तू की प्रणाली अपने समय के लिए उपयुक्त थी, परंतु सूक्ष्मदर्शी जैसे नए साधनों और अभिरंजक तकनीकों जैसी तकनीकी प्रगति के कारण वैज्ञानिकों ने सूक्ष्मजीवों की खोज की; इन खोजों ने प्राकृतिक संसार को बेहतर समझने में सहायता की और वर्गीकरण तदनुसार बदलता गया। जैविक वर्गीकरण, और उसके साथ विज्ञान, निरंतर विवेचन और परिवर्तन की प्रक्रिया है। जो प्रणाली कभी न बदले उसका अर्थ यही होगा कि हमने देखना बंद कर दिया।
आपका अपना उत्तर: ऊपर की किसी एक पंक्ति को चुनिए, पता कीजिए कि उस विषय में अभी क्या ज्ञात है, और लिखिए कि परिवर्तन के लिए किस प्रमाण की आवश्यकता होगी। "खोज जारी है" वास्तव में यही माँगता है — भविष्यवाणी नहीं, एक परखने योग्य प्रस्ताव।