कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 12 परियोजना कार्य के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
अपने आस-पास के किसी उद्यान अथवा जलाशय पर जाइए। जलाशय और उसके आस-पास के क्षेत्र का अवलोकन कीजिए। वहाँ पाए जाने वाले दस जीवों की पहचान कीजिए और उन्हें विभिन्न जगत में वर्गीकृत कीजिए।
उत्तर

विधि: सवेरे जाइए, कॉपी, हैंड लेंस और एक छोटी शीशी साथ लीजिए। हर जीव के लिए वही लिखिए जो वास्तव में दिख रहा है — कोशिकाओं की संख्या दिखती नहीं, अतः संरचना लिखिए और जगत बाद में चित्र 12.5 से निकालिए।

जीवमैंने क्या देखाजगत
जल की सतह पर हरी परतचिपचिपी नीली-हरी झिल्ली; लेंस से देखने पर महीन तंतुमोनेरा (साइनोबैक्टीरिया)
घर के दही की एक बूँदउच्च शक्ति पर छोटे दंड; केंद्रक नहीं दिखामोनेरा (लैक्टोबैसिलस)
तालाब के जल की बूँदपक्ष्माभों से तैरती एकल कोशिकाएँ; चप्पल जैसी आकृतिप्रोटिस्टा (पैरामीशियम)
नेत्रबिंदु वाली हरी एकल कोशिकाएँतर्कु आकार, एक कशाभ, हरीप्रोटिस्टा (यूग्लीना)
नम किनारे पर मशरूमछाता जैसा, हरा रंग नहीं, मृत लकड़ी परफंजाई
गिरे फल पर फफूँदरुई जैसे सफेद तंतु और काले बिंदुफंजाई
गीली दीवार पर मॉसहरा कालीन, बहुत छोटी पत्ती जैसी रचनाएँ, शिराएँ नहींप्लांटी (ब्रायोफाइटा)
जलकुंभी / कमलजड़, तना, चौड़ी पत्तियाँ, पुष्पप्लांटी (एंजियोस्पर्म)
व्याध पतंगसंधित पाद, दो जोड़ी पंख, कठोर आवरणएनिमेलिया (आर्थ्रोपोडा)
मेंढक / छोटी मछलीकशेरुक दंड, नम त्वचा या शल्क और पखएनिमेलिया (कॉर्डेटा, कशेरुकी)
संकेत: एक स्तंभ "प्रयुक्त मानदंड" का जोड़िए और लिखिए कि हर पंक्ति का निर्णय चित्र 12.5 के किस विभाजन ने किया। यही एक बात प्रकृति-भ्रमण को वर्गीकरण बना देती है।
प्र2.
किसी माली या वनकर्मी का साक्षात्कार कीजिए। उनसे पूछिए कि वे पादप जातियों की पहचान किस प्रकार करते हैं। पहचान करने की पारंपरिक वैज्ञानिक विधियों की तुलना कीजिए।
उत्तर

विधि: अनुमति लेकर जाइए, खुले प्रश्न पूछिए, और स्थानीय नाम ठीक वैसे ही लिखिए जैसे वे बोले जाएँ।

पूछने योग्य प्रश्न: जब पेड़ पर फूल न हों तब आप इस पेड़ को उससे कैसे पहचानते हैं? आप पहले क्या देखते हैं — छाल, पत्ती, या गंध? आपने यह कहाँ से सीखा? आप इसे क्या कहते हैं, और क्या अगले गाँव में इसका नाम अलग है? कौन-से पौधे कभी भ्रमित नहीं करने चाहिए, और क्यों?

पारंपरिक / लोक पहचानवैज्ञानिक पहचान
प्रयुक्त लक्षणपत्ती की आकृति, छाल की बनावट, गंध, स्वाद, दूध, पत्तों की आवाज़, पुष्पन की ऋतु, उगने का स्थानवही दृश्य लक्षण, साथ ही आंतरिक संरचना, कोशिका संरचना, जनन और डीएनए
नामस्थानीय नाम, जो गाँव-गाँव और भाषा-भाषा में बदल जाता हैएक द्विनाम लैटिन नाम जो संपूर्ण विश्व में प्रयुक्त होता है
अभिलेख का रूपस्मृति, गीत, कहावतें, मौखिक परंपरालिखित कुंजियाँ, हर्बेरियम प्रतिदर्श, प्रकाशित विवरण
शक्तितेज़, व्यावहारिक, उपयोग और खतरे सहित; उसी स्थान के पीढ़ियों के अवलोकन पर आधारितसटीक, सार्वभौमिक, परखने योग्य, और जीवों के परस्पर संबंध दिखाने वाली
कमीस्थानांतरणीय नहीं — दो जिलों में एक ही नाम दो पौधों का हो सकता हैप्रशिक्षण और उपकरण चाहिए; क्षेत्र में धीमी
तुलना से क्या पता चलता है: ये दोनों प्रतिद्वंद्वी नहीं हैं। अध्याय दोनों के साथ काम करने के दो उदाहरण देता है — होर्टस मलाबारिकस, जिसे 17वीं शताब्दी में हेंड्रिक वान रीडे ने इट्टी अच्युतण और अन्य स्थानीय विशेषज्ञों की सहायता से संकलित किया और जिसमें सैकड़ों पादप जातियों तथा उनके औषधीय उपयोगों का वर्णन है; और वह लोक वर्गिकी जिससे भारत के जनजातीय समुदाय खाद्य और विषैले मशरूम में अंतर करते हैं। पारंपरिक ज्ञान अवलोकन और उपयोग देता है; वैज्ञानिक वर्गीकरण सार्वभौमिक नाम और संबंधों का ढाँचा देता है।
प्र3.
यदि आप पक्के बाघ अभयारण्य या अपनी पसंद के किसी अन्य पक्षी अभयारण्य का अध्ययन कर रहे हैं तो पक्षियों की जातियों की जानकारी को आप किस प्रकार व्यवस्थित करेंगे?
उत्तर

उसी प्रकार जैसे कोई वर्गिकीविद् करता है — प्रत्येक जाति का एक अभिलेख, वर्गीकरण पदानुक्रम में रखा हुआ, और ऐसे क्षेत्रों (fields) के साथ जिन्हें खोजा और गिना जा सके।

एक अभिलेख में क्या होना चाहिए:

क्षेत्रउदाहरण (पक्के)
वैज्ञानिक नामब्यूसेरॉस बाइकॉर्निस
सामान्य / स्थानीय नाममहाधनेश
गण · कुलब्यूसेरॉटिफॉर्मीस · ब्यूसेरॉटिडी
पहचान के लक्षणबहुत बड़ा; पीला कास्क और चोंच; काली-सफेद पंख धारियाँ
अभयारण्य में पर्यावासबड़े पुराने फलदार वृक्षों वाला ऊँचा सदाबहार वन
भोजनगूलर और अन्य बड़े फल
घोंसलापुराने विशाल वृक्ष का प्राकृतिक कोटर; न्यूनतम कोटर आकार
ऋतु और तिथियाँप्रजनन मार्च – जुलाई; दर्शन की तिथियाँ
स्थानकम्पार्टमेंट / जी.पी.एस. बिंदु
बहुलता और स्थितिव्यक्तियों या घोंसलों की संख्या; आई.यू.सी.एन. स्थिति
प्रमाणछायाचित्र, ध्वनि-अभिलेख, अवलोकनकर्ता का नाम

अभिलेखों को कैसे व्यवस्थित करें: पहले कुल और गण के अनुसार समूहित कीजिए, क्योंकि क्षेत्र-पुस्तिकाएँ इसी क्रम में बनती हैं और इससे समान पक्षी साथ-साथ आ जाते हैं — चारों धनेश एक साथ। फिर पर्यावास के प्रकार, भोजन की आदत और ऋतु के अनुसार अलग सूचियाँ जोड़िए, ताकि वही आँकड़े अलग-अलग प्रश्नों के उत्तर दे सकें। फाइल को स्प्रेडशीट में रखिए ताकि छाँटा और गिना जा सके।

यही व्यवस्था क्यों: 300 नामों की सादी वर्णक्रमानुसार सूची उन प्रश्नों का उत्तर नहीं दे सकती जो केस स्टडी उठाती है — वन में जातियाँ किस प्रकार वितरित हैं, कौन-से पादप और जंतु निकट रूप से संबंधित हैं। वर्गीकरण और पारिस्थितिकी दोनों के अनुसार संरचित अभिलेख दे सकता है। यह भी देखिए कि वैज्ञानिक नाम कितना काम करता है: यही एकमात्र क्षेत्र है जो कभी नहीं बदलता और जिसके कारण आपके आँकड़े किसी और के आँकड़ों से तुलनीय बनते हैं।
प्र4.
किसी गाँव के पास स्थित वन क्षेत्र में जाकर सर्वेक्षण कीजिए और समुदाय के जानकार व्यक्तियों के पारंपरिक स्थानीय ज्ञान की सहायता से खाद्य तथा विषैले मशरूमों की पहचान कीजिए।
उत्तर

पहले सुरक्षा, और यह औपचारिकता नहीं है: कभी चखिए मत, और अपने ही निर्णय से खाने के लिए मशरूम कभी मत तोड़िए। समुदाय के जानकार व्यक्ति के साथ जाइए, दस्ताने पहनिए, और जहाँ संभव हो तोड़ने के बजाय छायाचित्र लीजिए।

विधि

  1. पहले जानकार व्यक्ति से मिलकर उनका ज्ञान दर्ज कीजिए — कौन-से प्रकार एकत्र किए जाते हैं, कब, किन वृक्षों या मृदा से, और किनसे बचा जाता है।
  2. वन में हर मशरूम के लिए लिखिए: आधार (मृत लकड़ी, जीवित वृक्ष, मृदा, गोबर), टोपी की आकृति और रंग, नीचे गिल हैं या छिद्र, डंठल पर छल्ला या आधार पर प्याली है या नहीं, दबाने पर रंग बदलता है या नहीं, गंध, और ऋतु।
  3. पूरे मशरूम का छायाचित्र लीजिए, आधार सहित — निर्णायक लक्षण प्रायः आधार पर ही होता है और डंठल तोड़ने पर वह छूट जाता है।
  4. स्थानीय नाम और कोई भी पारंपरिक उपयोग लिखिए, तथा यह भी कि वह खाद्य माना जाता है, औषधि, या विषैला।
  5. "खाद्य" लिखने से पहले हर पहचान किसी विशेषज्ञ से पक्की करवाइए।

नमूना अभिलेख पत्र

स्थानीय नामकहाँ मिलाविवरणसमुदाय क्या कहता है
(जैसा बोला जाए वैसा लिखिए)पहली वर्षा के बाद साल की मृत लकड़ी परधूसर-भूरी 6 cm टोपी, सफेद गिल, न छल्ला न प्यालीखाद्य, एकत्र और बेचा जाता है
(जैसा बोला जाए वैसा लिखिए)बाँस के नीचे मृदा परसफेद टोपी, सफेद गिल, डंठल पर छल्ला, आधार पर प्यालीविषैला — कभी नहीं खाया जाता
यह क्यों महत्त्वपूर्ण है: अध्याय दर्ज करता है कि खाने योग्य जंगली मशरूम उच्च पोषण और औषधीय गुणों वाले महत्त्वपूर्ण खाद्य पदार्थ हैं, कि भारत के जनजातीय समुदायों सहित अनेक समुदायों के पास लोक वर्गिकी के आधार पर खाद्य और विषैले मशरूम का पारंपरिक ज्ञान है, और कि मशरूम की खेती आजीविका का आशाजनक साधन बन रही है क्योंकि इसमें कम स्थान, कम निवेश और कम समय (30 – 45 दिन) लगता है। अतः यह सर्वेक्षण केवल अभ्यास नहीं, वास्तविक दस्तावेज़ीकरण है — लोक वर्गिकी ऐसा ज्ञान है जो लुप्त हो रहा है, और लिख लेने से बचता है।
प्र5.
भारत और विश्व में समय-समय पर विविध वनस्पतिजात और प्राणीजात पर प्रकाशित किए गए डाक टिकटों को संग्रहीत कर उनका अध्ययन कीजिए। अपने अधिगम के आधार पर मानदंड बना कर उनका वर्गीकरण कीजिए। इसके साथ ही विद्यालय में डाक टिकट संग्रह (philately) की प्रदर्शनी आयोजित कीजिए और इस प्रदर्शनी में अपने कार्य को प्रदर्शित कीजिए।
उत्तर

विधि: डाक टिकट (या उनकी अच्छी छायाप्रति और मुद्रित चित्र) एकत्र कीजिए, हर एक को कार्ड पर लगाइए और जीव का सामान्य नाम, जहाँ मिल सके वैज्ञानिक नाम, देश और जारी होने का वर्ष लिखिए।

वर्गीकरण के मानदंड — एक से अधिक लगाइए और वही टिकट दोबारा व्यवस्थित करके दिखाइए

  1. जगत के अनुसार — मोनेरा, प्रोटिस्टा, फंजाई, प्लांटी, एनिमेलिया। अधिकांश टिकट अंतिम दो में ही आएँगे, और यह स्वयं में एक प्रदर्शित करने योग्य निष्कर्ष है।
  2. प्लांटी के भीतर — थैलोफाइटा, ब्रायोफाइटा, टेरिडोफाइटा, जिम्नोस्पर्म, एंजियोस्पर्म।
  3. एनिमेलिया के भीतर — अकशेरुकी संघ, फिर पाँच कशेरुकी समूह: मत्स्य, उभयचर, सरीसृप, पक्षी, स्तनधारी।
  4. संरक्षण स्थिति के अनुसार — संकटापन्न, संकटग्रस्त, या पहले ही विलुप्त।
  5. स्थानिक या व्यापक — भारतीय स्थानिक जातियों (नीलगिरी तहर, लाॅयन टेल्ड मकाक, नेपेन्थीस खासियाना, नीलकुरिंजी) का एक पैनल विशेष रूप से प्रभावशाली रहेगा।
  6. देश और वर्ष के अनुसार — जिससे दिखेगा कि समय के साथ संरक्षण की चिंताएँ कैसे बदलीं।

प्रदर्शनी के लिए: प्रत्येक मानदंड का एक पैनल बनाइए और साथ में छोटा नोट लिखिए कि आपने कौन-सा मानदंड और क्यों प्रयोग किया। एक "इसे आप वर्गीकृत कीजिए" पैनल भी जोड़िए जिसमें तीन बिना नाम वाले टिकट हों और बगल में चित्र 12.5 की कुंजी लगी हो, ताकि दर्शक को स्वयं काम करना पड़े।

इस कार्य से क्या सीख मिलती है: उन्हीं टिकटों का हर मानदंड पर अलग विन्यास बनता है — ठीक वही खोज जो क्रियाकलाप 12.1 में हुई थी। एक ही संग्रह के दो विन्यास साथ-साथ प्रदर्शित करना यह दिखाने का सबसे स्पष्ट तरीका है कि समूह जीव नहीं, मानदंड तय करता है
प्र6.
किसी विलुप्त जाति का अन्वेषण कीजिए और विश्लेषण कीजिए कि उसके लुप्त होने से उस पर निर्भर रहने वाले जीवों तथा पारिस्थितिक तंत्र के पारिस्थिकीय संतुलन पर क्या प्रभाव पड़ा।
उत्तर

विधि: एक जाति चुनिए, पता कीजिए कि वह कब और क्यों लुप्त हुई, फिर बाहर की ओर बढ़िए — उसे कौन खाता था, वह क्या खाती थी, उसने किसका परागण या बीज प्रकीर्णन किया, और उनके साथ आगे क्या हुआ।

प्रस्तुत उदाहरण — भारत में एशियाई चीता, वर्ष 1952 में देश से विलुप्त घोषित

प्रश्ननिष्कर्ष
वह थी क्या?भारत के खुले घास मैदानों और झाड़-वन का सबसे तेज़ स्थलीय परभक्षी; काले हिरण और चिंकारा का शिकार करती थी
वह क्यों लुप्त हुई?शिकार, और खुले घास मैदानों का कृषि में बदल जाना
उस पर कौन निर्भर था?गिद्ध और सियार जैसे अपमार्जक जो उसके शिकार पर पलते थे
शिकार जातियों पर प्रभावखुले मैदान का एक विशेषज्ञ परभक्षी हटने से कुछ क्षेत्रों में शाकाहारियों की संख्या केवल भोजन और रोग से ही नियंत्रित रह गई
वनस्पति पर प्रभावअनियंत्रित चराई से घास मैदान की संरचना बदली, जिससे भूमि पर घोंसला बनाने वाले पक्षी और कीट प्रभावित हुए
पर्यावास की स्थिति पर प्रभावअपनी प्रमुख परभक्षी जाति खोने के बाद घास मैदान को "बंजर" मान लेना सरल हो गया और वह और तेज़ी से बदला गया
विश्लेषण में उभारने योग्य सामान्य प्रतिरूप: अध्याय इसे एक ही पंक्ति में कह देता है — जब कोई एक जाति विलुप्त हो जाती है तो उस पर निर्भर अन्य जातियाँ भी धीरे-धीरे कम हो सकती हैं और अंततः विलुप्त भी हो सकती हैं। क्षति आहार जाल की कड़ियों के साथ फैलती है, और धीरे-धीरे फैलती है, इसलिए पूरा प्रभाव जाति के जाने के बहुत बाद दिखता है। जिन जातियों से ऐसी शृंखला चलने की सर्वाधिक संभावना है वे हैं शीर्ष परभक्षी, प्रमुख परागणकर्ता और बीज प्रकीर्णक — इसीलिए क्रियाकलाप 12.2 में पुराने विशाल वृक्षों और धनेश के लुप्त होने को इतना गंभीर माना गया है।
अन्य अच्छे विकल्प: मॉरीशस का डोडो और वह टैम्बालाकोक वृक्ष जिसके विषय में कहा जाता है कि वह उस पर निर्भर था; सोन चिरैया (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड), जो अभी विलुप्त नहीं पर अति संकटग्रस्त है, और उसके साथ का घास मैदान; संगाई हिरण, जिसे वर्ष 1951 में विलुप्त घोषित किया गया और वर्ष 1953 में पुनः खोजा गया।
प्र7.
देश के विभिन्न भागों में कृषि की भिन्न-भिन्न पद्धतियों में उपयोग होने वाले पशुधन की विविधता का अध्ययन कीजिए।
उत्तर

विधि: तीन-चार भिन्न क्षेत्र चुनिए और हर एक के लिए लिखिए कि वहाँ कौन-से पशु रखे जाते हैं, नस्लों के नाम क्या हैं, उन्हें किसलिए रखा जाता है, और कौन-सी विशेषता उन्हें उस स्थान के अनुकूल बनाती है। हो सके तो किसान या पशु चिकित्सा कर्मी से बात कीजिए।

क्षेत्र / पद्धतिपशु और नस्लेंजो विशेषता उस स्थान के अनुकूल है
थार मरुस्थल, राजस्थान — चरवाहीऊँट (बीकानेरी), मारवाड़ी भेड़, सिरोही बकरी, राठी गायऊँट कूबड़ में वसा संचित करता है और लंबे समय तक बिना जल रह लेता है; बकरियाँ काँटेदार झाड़ियाँ चर लेती हैं
लद्दाख, उच्च हिमालय — चरवाहीयाक, चांगथांगी (पश्मीना) बकरी, दो कूबड़ वाला ऊँटठंड और विरल वायु के लिए मोटा आवरण और बड़े फेफड़े; पश्मीना का भीतरी रोम कुचालक के रूप में उगता है
पंजाब और हरियाणा — सघन डेयरीमुर्रा भैंस, साहीवाल और हरियाणा गायउच्च दुग्ध उत्पादन; सिंचाई और चारा फसलें भरपूर आहार सँभालती हैं
केरल और दक्षिणी तट — मिश्रित लघु जोतवेचूर गाय (बहुत छोटी), मालाबारी बकरी, धान के खेतों में बत्तखआर्द्र जलवायु में छोटी काया को कम चारा चाहिए; बत्तखें धान के बीच पीड़क खाती हैं
पूर्वी हिमालय और पूर्वोत्तरमिथुन, सूअर, स्थानीय मुर्गीमिथुन वन में स्वयं चरता है, उसे बाड़े में खिलाने की आवश्यकता नहीं
इस अध्ययन का मुख्य बिंदु: इनमें से हर नस्ल अपनी पड़ोसी नस्लों की वही जाति है — सारी गायें बॉस इंडिकस हैं, सारी बकरियाँ कैप्रा हिर्कस। यहाँ विविधता एक जाति के भीतर की आनुवंशिक विविधता है, जिसे किसानों ने सदियों तक ठीक स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार चयन करके बनाया है। यही तर्क अध्याय का आरंभिक अनुच्छेद फसल की किस्मों के विषय में देता है: विविधता से नष्ट होने का जोखिम कम होता है और खाद्य सुरक्षा सुदृढ़ होती है। इन सारी नस्लों के स्थान पर एक उच्च उत्पादक नस्ल रख देने से उत्पादन तो बढ़ेगा, पर गर्मी, सूखे, कमज़ोर चारे और रोग को सहने की वह संचित क्षमता नष्ट हो जाएगी जो ये नस्लें अपने साथ लिए चल रही हैं।
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