प्र1.
पादपों, कवकों और जीवाणुओं की कोशिकाओं में कोशिका झिल्ली के चारों ओर एक अतिरिक्त परत होती है जिसे कोशिका भित्ति कहा जाता है। आपके विचार से इन कोशिकाओं में कोशिका भित्ति की क्या आवश्यकता है?
उत्तर
ये जीव संकट से हटकर कहीं जा नहीं सकते, अतः इन्हें एक दृढ़ बाहरी आवरण चाहिए जो आकार, सामर्थ्य और सुरक्षा दे और फिर भी जल तथा खनिजों को आर-पार जाने दे।
- यांत्रिक अवलंब — पौधे सीधे खड़े रहते हैं और पत्तियाँ तथा फूल दृढ़ बने रहते हैं क्योंकि लाखों भित्ति-युक्त कोशिकाएँ एक-दूसरे पर दबाव डालती हैं। वायु और वर्षा का सामना पतली झिल्ली नहीं, भित्ति करती है।
- फटने से सुरक्षा — जड़ की कोशिकाएँ तनु मृदा-जल में रहती हैं, जो अल्पपरासारी है, अतः परासरण द्वारा जल निरंतर भीतर आता रहता है। भित्ति न हो तो कोशिका फूलकर फट जाए। भित्ति प्रतिदाब देती है और भीतर आना रुक जाता है।
- आकार — भित्ति-युक्त कोशिका जल खोने पर भी अपना बॉक्स जैसा आकार बनाए रखती है — इसीलिए प्याज की झिल्ली और रोइओ की कोशिकाएँ सूक्ष्मदर्शी में नियमित और आयताकार दिखती हैं जबकि कपोल कोशिकाएँ अनियमित।
- फिर भी पारगम्य — भित्ति दृढ़ होते हुए भी पारगम्य है, अतः जल और घुले हुए खनिज सीधे उसमें से निकल जाते हैं। क्या भीतर आए, इसका चयन ठीक भीतर स्थित झिल्ली पर छोड़ दिया जाता है।
पादप कोशिका भित्ति मुख्यतः सेल्युलोस से बनी होती है
सेल्युलोस = अनेक ग्लूकोस इकाइयों के जुड़ने से बना कार्बोहाइड्रेट
सेल्युलोस = अनेक ग्लूकोस इकाइयों के जुड़ने से बना कार्बोहाइड्रेट
ऐसा क्यों होता है: जंतु इन्हीं समस्याओं को दूसरे ढंग से हल करता है — उसके पास कंकाल है और वह वायु, सूखे या परभक्षी से हटकर चल सकता है। पादप एक स्थान पर स्थिर है, अतः उसका अवलंब हर एक कोशिका में ही बनाना पड़ता है। इसकी कीमत लचीलेपन से चुकानी पड़ती है — जंतु कोशिकाओं में भित्ति न होने से वे आकार बदल सकती हैं, और इसी से पेशी सिकुड़ती है, श्वेत रक्त कोशिकाएँ ऊतकों के बीच से निकलती हैं और भ्रूण मुड़कर जीव का रूप लेता है।
क्या आप जानते हैं? हमारे एंजाइम आहार के सेल्युलोस को पचा नहीं सकते, अतः वह रुक्षांश (roughage) के रूप में निकल जाता है और भोजन में भार जोड़कर पाचन में सहायता करता है।