कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 2 क्या होगा यदि... के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
मूँग के बीजों को 12 घंटे तक जल में भिगोने के पश्चात एक सांद्र विलयन में रखा जाए, बताइए इनमें क्या परिवर्तन होगा?
उत्तर

वे सिकुड़कर झुर्रीदार हो जाएँगे और अंकुरित नहीं होंगे।

  1. 12 घंटे जल में रहने पर बीज जल सोखकर फूल जाते हैं — बीजावरण तन जाता है और भ्रूण सक्रिय हो जाता है।
  2. सांद्र (अतिपरासारी) नमक या चीनी के विलयन में रखने पर बाहर की विलेय सांद्रता बीज की कोशिकाओं के भीतर से कहीं अधिक हो जाती है।
  3. अतः जल परासरण द्वारा बीज की कोशिकाओं से बाहर निकलता है। फूले हुए बीज जल खोकर छोटे, नरम और झुर्रीदार हो जाते हैं।
  4. अंकुरण रुक जाता है। बीज के भीतर के एंजाइमों को संचित स्टार्च तोड़ने के लिए जल चाहिए; जल खिंच जाने पर वे अभिक्रियाएँ चल ही नहीं सकतीं।
बाहर की विलेय सांद्रता > भीतर की विलेय सांद्रता → अतिपरासारी
जल की शुद्ध गति = कोशिका से बाहर → कोशिका संकुचित
ऐसा क्यों होता है: भिगोना और सिकुड़ना एक ही भौतिकी के दो विपरीत रूप हैं। जल सदा वरणात्मक पारगम्य झिल्ली के पार वहाँ से चलता है जहाँ वह अधिक है (तनु विलयन) उस ओर जहाँ वह कम है (सांद्र विलयन)। बीज कुछ ‘चुनता’ नहीं; वह केवल आस-पास की सांद्रता के अनुसार व्यवहार करता है।
यह कीजिए: मूँग के दो समूह 12 घंटे भिगोइए, फिर एक को साधारण जल में और दूसरे को गाढ़े चीनी के घोल में रखिए। एक दिन बाद केवल पहले समूह में सफेद मूलांकुर निकलेगा। यही तर्क प्रश्न 16 में दीपा आँवले और नींबू को सुरक्षित रखने के लिए उपयोग करती है।
प्र2.
एक कोशिका को अलग-अलग सांद्रताओं के नमक या चीनी के विलयन में रखा जाए?
उत्तर

तीन परिणाम संभव हैं, और कौन-सा होगा यह केवल इस पर निर्भर है कि बाहर की विलेय सांद्रता भीतर की तुलना में कैसी है।

विलयनतुलनाजल की शुद्ध गतिकोशिका पर प्रभाव
समपरासारीबाहर = भीतरकोई नहीं (दोनों ओर बराबर)आमाप में कोई परिवर्तन नहीं
अल्पपरासारीबाहर < भीतरकोशिका के भीतरकोशिका फूलती है; जंतु कोशिका फट भी सकती है
अतिपरासारीबाहर > भीतरकोशिका से बाहरकोशिका संकुचित हो जाती है
समपरासारीकोई शुद्ध गति नहींआमाप अपरिवर्तित अल्पपरासारीजल भीतर जाता हैकोशिका फूलती है अतिपरासारीजल बाहर जाता हैकोशिका सिकुड़ती है
एक ही कोशिका तीन भिन्न परिवेशों में। जल की दिशा केवल सांद्रता के अंतर से तय होती है।
ऐसा क्यों होता है: झिल्ली जल को जाने देती है पर विलेय को रोक लेती है, अतः दोनों ओर की सांद्रताएँ बराबर होने का एकमात्र उपाय यही है कि जल स्थान बदले। ध्यान दीजिए कि अतिपरासारी विलयन में रखी पादप कोशिका जंतु कोशिका की भाँति नहीं धँसती — उसकी दृढ़ कोशिका भित्ति बाहरी आकार बनाए रखती है जबकि झिल्ली और अंतर्वस्तुएँ भीतर की ओर खिंच जाती हैं, ठीक वैसे ही जैसा क्रियाकलाप 2.3 में रोइओ की विशल्क में दिखता है।
क्या आप जानते हैं? अस्पताल में ड्रिप से दिए जाने वाले तरल जान-बूझकर रक्त के समपरासारी बनाए जाते हैं। अल्पपरासारी ड्रिप से लाल रक्त कोशिकाएँ फूलकर फट जातीं और अतिपरासारी से सिकुड़ जातीं।
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