कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 4 अभ्यास प्रश्न के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
मेरे पिताजी एक सीधी सड़क पर चल कर एक दुकान पर गए जिसकी घर से दूरी 250 m है। वहाँ पहुँच कर उन्होंने पाया कि वह कपड़े का थैला लाना भूल गए हैं। वह घर वापस लौटे, थैला लेकर दुकान पर आए, सामान खरीदा और लौट कर घर आ गए। बताइए कि उन्होंने कुल कितनी दूरी तय की? उनके घर से विस्थापन का मान कितना हुआ?
उत्तर

यात्रा को चार खंडों में बाँटिए। प्रत्येक खंड 250 m लंबा है।

खंडयात्रादूरी
1घर → दुकान250 m
2दुकान → घर (थैले के लिए)250 m
3घर → दुकान (पुन:)250 m
4दुकान → घर (सामान लेकर)250 m
कुल चलित दूरी = 250 m + 250 m + 250 m + 250 m
= 4 × 250 m = 1000 m = 1 km

विस्थापन के लिए घर को मूल बिंदु और दुकान की दिशा को धनात्मक मानिए —

विस्थापन = अंतिम स्थिति − आरंभिक स्थिति
= 0 m − 0 m = 0 m
ऐसा क्यों होता है: पूरी यात्रा के अंत में वे ठीक वहीं खड़े हैं जहाँ से चले थे, इसलिए स्थिति में सकल परिवर्तन शून्य है — चाहे उन्होंने वह सड़क कितनी ही बार नापी हो। दूरी में, इसके विपरीत, चलने का हर मीटर गिना जाता है, और भूला हुआ थैला उन्हें 500 m अतिरिक्त चलवा गया।
प्र2.
कोई विद्यार्थी एक पुस्तक लेने के लिए विद्यालय भवन के भूतल से चतुर्थ तल तक दौड़ते हुए जाता है और फिर उतर कर द्वितीय तल स्थित अपने कक्षा-कक्ष में लौटता है। यदि प्रत्येक तल की ऊँचाई 3 m है तो ज्ञात कीजिए— (i) उसके द्वारा चलित ऊर्ध्वाधर दूरी, तथा (ii) आरंभिक बिंदु से उसके ऊर्ध्वाधर विस्थापन का परिमाण
उत्तर

एक तल की ऊँचाई = 3 m। ऊँचाइयाँ भूतल से मापिए और ऊपर की दिशा को धनात्मक लीजिए।

भूतल → चतुर्थ तल: 4 तलों की चढ़ाई = 4 × 3 m = 12 m (ऊपर)
चतुर्थ तल → द्वितीय तल: 2 तलों की उतराई = 2 × 3 m = 6 m (नीचे)

(i) चलित ऊर्ध्वाधर दूरी

= 12 m + 6 m = 18 m

(ii) आरंभिक बिंदु से ऊर्ध्वाधर विस्थापन का परिमाण

भूतल से द्वितीय तल की ऊँचाई = 2 × 3 m = 6 m
विस्थापन = 6 m − 0 m = 6 m, ऊर्ध्वाधरत: ऊपर की ओर
ऐसा क्यों होता है: नीचे उतरे गए 6 m वास्तविक चढ़ाई-उतराई हैं — पैर उन्हें महसूस करते हैं — इसलिए वे दूरी में जुड़ते हैं। किंतु जब हम केवल यह पूछते हैं कि "विद्यार्थी अब आरंभ की तुलना में कितना ऊपर है?", तब वे ऊपर चढ़े 12 m में से घट जाते हैं। इसीलिए दूरी 12 + 6 = 18 m और विस्थापन 12 − 6 = 6 m।
सुझाव: यहाँ संख्याएँ तलों के अंतराल हैं, तलों के क्रमांक नहीं। भूतल से चतुर्थ तल तक 4 अंतराल हैं, 5 नहीं।
प्र3.
एक लड़की अपना स्कूटर चला रही है और पाती है कि इसके गतिमापी यंत्र का पाठ्यांक स्थिर है। क्या यह संभव है कि उसका स्कूटर त्वरणशील हो? और यदि ऐसा है तो कैसे?
उत्तर

हाँ, स्कूटर त्वरणशील हो सकता है — यदि वह दिशा बदल रही हो, जैसे किसी मोड़ पर या गोल चक्कर पर।

ऐसा क्यों होता है: गतिमापी यंत्र केवल वेग का परिमाण बताता है। किंतु वेग परिमाण और दिशा दोनों है, और त्वरण वेग में परिवर्तन की दर है। अत: केवल दिशा का बदलना ही शून्येतर त्वरण देने के लिए पर्याप्त है, भले ही सुई बिलकुल स्थिर खड़ी रहे।
त्वरण ≠ 0, यदि वेग का परिमाण बदले, अथवा वेग की दिशा बदले, अथवा दोनों बदलें
अनुभाग 4.4 की एकसमान वृत्तीय गति ठीक यही स्थिति है — अचर चाल, निरंतर मुड़ता वेग, और इसलिए त्वरित गति।

उसके स्कूटर का त्वरण शून्य केवल तभी होगा जब वह उसी स्थिर पाठ्यांक के साथ सीधी सड़क पर चले।

स्वयं जाँचिए: मोड़ काटते समय आपको जो बग़ल का धक्का महसूस होता है, वही यह त्वरण है — जबकि इंजन की आवाज़ और गतिमापी का पाठ्यांक बिलकुल नहीं बदलते।
प्र4.
एक कार विरामावस्था से चलना आरंभ करती है और 6 s में इसका वेग 24 m s⁻¹ हो जाता है। इन 6 s में इसका त्वरण और इसके द्वारा चलित दूरी ज्ञात कीजिए।
उत्तर
दिया है: u = 0 m s⁻¹ (विरामावस्था से), v = 24 m s⁻¹, t = 6 s

माध्य त्वरण — समीकरण (4.3 ख) से —

a = (v − u) / t
= (24 m s⁻¹ − 0 m s⁻¹) / 6 s
= 24 m s⁻¹ / 6 s = 4 m s⁻², गति की दिशा में

चलित दूरी — समीकरण (4.4 ख) से —

s = ut + ½at²
= (0 m s⁻¹ × 6 s) + (½ × 4 m s⁻² × (6 s)²)
= 0 + ½ × 4 × 36 m
= 72 m
स्वयं जाँचिए: नियत त्वरण में माध्य वेग = (u + v)/2 = (0 + 24)/2 = 12 m s⁻¹, अत: s = 12 m s⁻¹ × 6 s = 72 m ✓। समीकरण (4.4 ग) से भी: v² = u² + 2as → 576 = 0 + 8s → s = 72 m ✓। तीन मार्ग, एक ही उत्तर।
ऐसा क्यों होता है: कार पूरे समय चाल बढ़ा रही है, इसलिए वह 24 m s⁻¹ की नियत चाल से चलती कार (जो 144 m तय करती) से कम और लगभग शून्य चाल से रेंगती कार से अधिक दूरी तय करती है — ठीक बीचोबीच। कारण यह है कि नियत त्वरण में वेग रैखिक रूप से बढ़ता है, अत: माध्य वेग आरंभिक और अंतिम मानों का साधारण औसत ही होता है।
प्र5.
आरंभिक वेग 28 m s⁻¹ एवं नियत त्वरण से गतिमान कोई मोटर साइकिल 98 m चल कर रुक जाती है। मोटर साइकिल का त्वरण तथा इसे विरामावस्था में आने में लगे समय का मान ज्ञात कीजिए।
उत्तर
दिया है: u = 28 m s⁻¹, v = 0 m s⁻¹ (रुक जाती है), s = 98 m

त्वरण — समीकरण (4.4 ग) u, v, a और s को समय के बिना जोड़ता है —

v² = u² + 2as
(0 m s⁻¹)² = (28 m s⁻¹)² + 2 × a × 98 m
0 = 784 m² s⁻² + 196 m × a
a = − 784 m² s⁻² / 196 m
a = − 4 m s⁻²

ऋण चिह्न बताता है कि त्वरण की दिशा वेग की दिशा के विपरीत है — मोटर साइकिल की चाल घट रही है।

लगा समय — अब समीकरण (4.4 क) से —

v = u + at
0 m s⁻¹ = 28 m s⁻¹ + (− 4 m s⁻²) × t
4 t = 28 s
t = 7 s
स्वयं जाँचिए: s = ut + ½at² = 28 × 7 + ½ × (− 4) × 49 = 196 − 98 = 98 m ✓
ऐसा क्यों होता है: पहले समीकरण (4.4 ग) चुनना ही पूरी युक्ति थी। प्रश्न में u, v और s दिए हैं, t नहीं — और (4.4 ग) एकमात्र शुद्धगतिक समीकरण है जिसमें t आता ही नहीं। जिस अज्ञात राशि की आवश्यकता न हो, उससे बचने वाला समीकरण चुनने से हर बार एक चरण बच जाता है।
प्र6.
चित्र 4.27 दो ऐसी वस्तुओं A एवं B का स्थिति-समय ग्राफ दर्शाता है जो समांतर सरल रेखीय पथों पर एक ही दिशा में गतिमान हैं। क्या वस्तुओं A एवं B का वेग कभी बराबर होगा? अपने उत्तर के समर्थन में तर्क दीजिए।
उत्तर

नहीं। इनका वेग कभी बराबर नहीं होगा।

AB 05 समय (s)स्थिति (m) यहाँ ये मिलती हैं,पर वेग बराबर नहीं होता
दोनों ग्राफ सरल रेखाएँ हैं, अत: दोनों वस्तुओं का वेग नियत है — किंतु प्रवणताएँ भिन्न हैं, इसलिए वेग हर क्षण भिन्न हैं।

तर्क, दो चरणों में —

  1. दोनों ग्राफ सरल रेखाएँ हैं। सरल रेखीय स्थिति-समय ग्राफ का अर्थ है प्रवणता कभी नहीं बदलती, अत: प्रत्येक वस्तु अपने-अपने नियत वेग से चल रही है।
  2. A की रेखा प्रत्येक बिंदु पर B की रेखा से अधिक ढलवाँ है। चूँकि स्थिति-समय ग्राफ की प्रवणता वेग है, अत: vA > vB — और दोनों नियत होने से यह असमानता पूरी यात्रा में बनी रहती है।
vA = नियत, vB = नियत, तथा A की प्रवणता > B की प्रवणता
⇒ हर क्षण vA > vB ⇒ ये कभी बराबर नहीं होते
ऐसा क्यों होता है: दोनों रेखाएँ लगभग t = 5 s पर एक-दूसरे को काटती अवश्य हैं, और यही भ्रम की जड़ है। काटने का अर्थ है उस क्षण दोनों की स्थिति समान है — A, B को जा पकड़ता है — न कि वेग समान है। वेग बराबर होने के लिए प्रवणताएँ बराबर चाहिए, जिससे दोनों रेखाएँ समांतर हो जातीं, और समांतर रेखाएँ कभी मिलती नहीं। यहाँ रेखाएँ मिलती हैं — यही प्रमाण है कि वे समांतर नहीं हैं।
सुझाव: B आरंभ में A से आगे है (उसकी रेखा स्थिति-अक्ष पर ऊपर से शुरू होती है), पर A तेज़ है और t = 5 s पर उसे पार कर जाता है। इसके बाद A आगे रहता है और अंतर बढ़ता ही जाता है।
प्र7.
चित्र 4.28 में दिया गया ग्राफ सरल रेखा में गतिमान दो वस्तुओं A एवं B के लिए 0 – 10 सेकंड के बीच उनकी स्थितियों में समय के साथ होने वाले परिवर्तन को दर्शाता है। सही विकल्प या विकल्पों का चयन कीजिए— (i) 10 s समय अंतराल में दोनों का माध्य वेग बराबर है क्योंकि उनकी आरंभिक और अंतिम स्थितियाँ समान हैं। (ii) 10 s समय अंतराल में दोनों की माध्य-चाल बराबर है क्योंकि ये दोनों समान समय में समान दूरियाँ चलते हैं। (iii) 10 s समय अंतराल में A की माध्य-चाल B की माध्य-चाल से कम है क्योंकि 10 s में इसके द्वारा चलित दूरी B द्वारा चलित दूरी से कम है। (iv) 10 s समय अंतराल में A की माध्य-चाल B की माध्य-चाल से अधिक है, क्योंकि कुछ काल-खंडों में B की चाल A की चाल से कम है।
उत्तर

सही विकल्प हैं — (i) एवं (ii)

AB 010 समय (s)स्थिति (m)
A और B एक साथ चलते हैं और एक साथ ही पहुँचते हैं। A का वेग नियत है; B पहले धीमा और बाद में तेज़ — पर दोनों के आरंभ और अंत बिंदु एक ही हैं।

ग्राफ पढ़िए — दोनों वस्तुएँ t = 0 s पर एक ही स्थिति से चलती हैं और t = 10 s पर एक ही स्थिति पर पहुँचती हैं। दोनों पूरे समय आगे ही बढ़ती हैं — कोई वक्र कभी नीचे नहीं आता — अत: कोई भी पलटती नहीं।

(i) सही। आरंभिक और अंतिम स्थितियाँ समान होने का अर्थ है विस्थापन समान, और समय अंतराल भी वही 10 s।

माध्य वेग = विस्थापन / समय अंतराल
A का विस्थापन = B का विस्थापन ⇒ माध्य वेग बराबर

(ii) सही। कोई भी वस्तु लौटती नहीं, इसलिए प्रत्येक के लिए चलित दूरी = विस्थापन का परिमाण — और वे बराबर हैं।

चलित दूरी = |विस्थापन| (कोई पलटाव नहीं)
⇒ A की माध्य चाल = B की माध्य चाल

(iii) ग़लत — A कम दूरी नहीं चलता; 10 s में दोनों समान दूरी तय करते हैं।

(iv) ग़लत — यह ठीक है कि अंतराल के आरंभिक भाग में B, A से धीमा है, पर बाद के भाग में वह उतना ही तेज़ है, और पूरे 10 s में दोनों प्रभाव निरस्त हो जाते हैं।

ऐसा क्यों होता है: माध्य चाल और माध्य वेग केवल दोनों सिरों और कुल समय पर निर्भर करते हैं — बीच में क्या हुआ, इससे नहीं। B की यात्रा क्षण-प्रतिक्षण A से बहुत भिन्न है (B त्वरित हो रहा है, A नहीं), पर माध्य राशियाँ यह अंतर देख ही नहीं पातीं। इसे पकड़ने के लिए किसी विशेष क्षण पर उनके वेगों की तुलना करनी पड़ेगी, माध्य की नहीं।
प्र8.
54 km h⁻¹ की चाल से ट्रक चलता हुआ एक ट्रक चालक सड़क के किनारे लगा एक यातायात निर्देश-पट (चित्र 4.29) देखता है जिसमें ट्रकों के लिए गतिसीमा 40 km h⁻¹ सूचित की गई है। वह 36 s में अपनी चाल घटाकर 36 km h⁻¹ पर ले आता है। इस समयावधि में उसके द्वारा चलित दूरी कितनी थी? यह मान लीजिए कि चाल घटाने की अवधि में उसका त्वरण अचर था।
उत्तर

पहले दोनों चालों को SI मात्रक में बदलिए, क्योंकि समय सेकंड में दिया है।

u = 54 km h⁻¹ = 54 × 1000 m / 3600 s = 15 m s⁻¹
v = 36 km h⁻¹ = 36 × 1000 m / 3600 s = 10 m s⁻¹
t = 36 s

नियत त्वरण में माध्य वेग u और v का साधारण औसत होता है, अत: —

s = ½ (u + v) t
= ½ × (15 m s⁻¹ + 10 m s⁻¹) × 36 s
= ½ × 25 m s⁻¹ × 36 s
= 12.5 m s⁻¹ × 36 s = 450 m
स्वयं जाँचिए, लंबे मार्ग से:
a = (v − u)/t = (10 − 15) m s⁻¹ / 36 s = − 0.139 m s⁻²
s = ut + ½at² = 15 × 36 + ½ × (− 0.139) × 1296 = 540 − 90 = 450 m ✓
ऐसा क्यों होता है: चालक चाल घटा रहा है, इसलिए त्वरण ऋणात्मक है — उसकी दिशा गति के विपरीत है — फिर भी ट्रक आगे ही बढ़ रहा है, अत: दूरी पूरे समय धनात्मक रहती है। ध्यान दीजिए कि केवल 18 km h⁻¹ चाल घटाने में ही वह 450 m, यानी लगभग आधा किलोमीटर चल जाता है। राजमार्ग पर चाल तुरंत नहीं बदलती — इसीलिए गति-सीमा का निर्देश-पट उस खंड से काफ़ी पहले लगाना पड़ता है जहाँ वह सीमा लागू होती है।
क्या आप जानते हैं? अंत में उसकी चाल 36 km h⁻¹ है, जो 40 km h⁻¹ की सीमा से कम है — अत: इन 36 s के अंत तक वह नियम का पालन कर रहा है।
प्र9.
एक कार विरामावस्था से गति आरंभ करती है और एकसमान त्वरण से 5 s में 20 m s⁻¹ का वेग प्राप्त कर लेती है। इसके पश्चात 10 s तक यह 20 m s⁻¹ के वेग से चलती है और अंतत: ब्रेक लगा कर (एकसमान त्वरण से) 6 सेकंड में रुक जाती है। इसके द्वारा चलित कुल दूरी ज्ञात कीजिए।
उत्तर

तीन चरण, और एक ही वेग-समय ग्राफ के नीचे तीन क्षेत्रफल।

051521 20 समय (s)वेग (m s⁻¹) 50 m200 m60 m
कुल दूरी ग्राफ के नीचे का पूरा क्षेत्रफल है — एक त्रिभुज, एक आयत और एक और त्रिभुज।

चरण 1 — चाल बढ़ना (0 s से 5 s): u = 0, v = 20 m s⁻¹, t = 5 s

s₁ = ½ (u + v) t = ½ × (0 + 20) m s⁻¹ × 5 s = 50 m

चरण 2 — नियत वेग (5 s से 15 s): v = 20 m s⁻¹, t = 10 s

s₂ = v × t = 20 m s⁻¹ × 10 s = 200 m

चरण 3 — ब्रेक (15 s से 21 s): u = 20 m s⁻¹, v = 0, t = 6 s

s₃ = ½ (u + v) t = ½ × (20 + 0) m s⁻¹ × 6 s = 60 m
कुल चलित दूरी = s₁ + s₂ + s₃
= 50 m + 200 m + 60 m = 310 m
ऐसा क्यों होता है: शुद्धगतिक समीकरण केवल वहीं लागू होते हैं जहाँ त्वरण नियत हो, और यहाँ त्वरण तीन भिन्न मान लेता है (+4 m s⁻², 0, तथा −10/3 m s⁻²)। इसलिए यात्रा को उन्हीं दो बिंदुओं पर काटना पड़ता है जहाँ त्वरण बदलता है, हर खंड अलग हल करना पड़ता है और अंत में जोड़ना पड़ता है। ग्राफ इसे दिखा देता है — एक के बाद एक तीन सरल आकृतियाँ।
स्वयं जाँचिए: 20 m s⁻¹ से रुकने में 6 s लगते हैं, अत: a₃ = (0 − 20)/6 = − 3.33 m s⁻²। तब s₃ = 20 × 6 + ½ × (− 3.33) × 36 = 120 − 60 = 60 m ✓
प्र10.
एक बस 36 km h⁻¹ के वेग से गतिमान है तभी चालक को 30 m आगे एक अवरोध दिखाई पड़ता है। ब्रेक लगाने की प्रतिक्रिया में उसे 0.5 s का समय लगता है। ब्रेक लगाने के पश्चात बस का वेग 2.5 m s⁻² के नियत त्वरण से कम होता है। क्या यह बस अवरोध तक पहुँचने से पहले रुकेगी?
उत्तर

हाँ — बस अवरोध से 5 m पहले ही रुक जाएगी।

u = 36 km h⁻¹ = 36 × 1000 m / 3600 s = 10 m s⁻¹

चरण 1 — प्रतिक्रिया दूरी। 0.5 s तक चालक ने ब्रेक छुआ ही नहीं, अत: बस पूरी चाल से चलती रहती है —

s₁ = u × tr = 10 m s⁻¹ × 0.5 s = 5 m

चरण 2 — ब्रेक-दूरी। अब u = 10 m s⁻¹, v = 0, a = − 2.5 m s⁻²। समीकरण (4.4 ग) से —

v² = u² + 2as
(0 m s⁻¹)² = (10 m s⁻¹)² + 2 × (− 2.5 m s⁻²) × s₂
0 = 100 m² s⁻² − 5 m s⁻² × s₂
s₂ = 100 / 5 m = 20 m

चरण 3 — रुकने की कुल दूरी।

s = s₁ + s₂ = 5 m + 20 m = 25 m
25 m < 30 m ⇒ बस 5 m की गुंजाइश के साथ रुक जाती है
ऐसा क्यों होता है: प्रतिक्रिया दूरी भूल जाना सरल है, जबकि यहाँ वह पूरी रुकने की दूरी का पाँचवाँ भाग है। उन 0.5 s में ब्रेक कुछ भी नहीं कर रहे — बस केवल 10 m s⁻¹ से ज़मीन नापती रहती है। यदि चालक का ध्यान 0.5 s के बजाय 1.5 s के लिए बँट जाता, तो अकेली प्रतिक्रिया दूरी 15 m और कुल 35 m हो जाती — बस अवरोध से टकरा जाती, जबकि ब्रेक ठीक पहले जितने ही अच्छे काम कर रहे होते।
यह भी कीजिए: यही परिकलन 54 km h⁻¹ (15 m s⁻¹) की बस के लिए, उसी प्रतिक्रिया काल और उसी ब्रेक के साथ दोहराइए। प्रतिक्रिया दूरी = 7.5 m, ब्रेक-दूरी = 225/5 = 45 m, कुल 52.5 m — अवरोध की दूरी से लगभग दोगुना। वह बस समय रहते नहीं रुक पाती।
प्र11.
किसी विद्यार्थी ने कहा, “पृथ्वी सूर्य के चारों ओर गति करती है।” इस संदर्भ में चर्चा कीजिए कि क्या पृथ्वी पर रखी किसी वस्तु को विरामावस्था में माना जा सकता है।
उत्तर

दोनों कथन एक साथ सत्य हो सकते हैं, क्योंकि विराम और गति सदैव किसी चुने हुए संदर्भ बिंदु के सापेक्ष ही बताए जाते हैं

चुना गया संदर्भ बिंदुक्या वस्तु की स्थिति समय के साथ बदलती है?निष्कर्ष
मेज़, दीवार, भूमिनहींवस्तु विरामावस्था में है
सूर्यहाँ — वह पृथ्वी के साथ सूर्य के चारों ओर चलती हैवस्तु गतिमान है
पृथ्वी का अक्षहाँ — घूर्णन के कारण वह दिन में एक बार चक्कर लगाती हैवस्तु गतिमान है
ऐसा क्यों होता है: अध्याय की अपनी परिभाषा कहती है कि वस्तु तब गतिमान है जब संदर्भ बिंदु के सापेक्ष उसकी स्थिति समय के साथ बदले। संदर्भ बिंदु बदलते ही उत्तर बदल सकता है, जबकि वस्तु ने कुछ भी अलग नहीं किया। अत: "विरामावस्था में होना" वस्तु का निरपेक्ष गुण कभी नहीं है — यह वस्तु और संदर्भ बिंदु, दोनों के विषय में कथन है।

अत: सही उत्तर यह है — पृथ्वी पर रखी वस्तु पृथ्वी के सापेक्ष विरामावस्था में है और सूर्य के सापेक्ष गतिमान है। दैनिक जीवन में हम चुपचाप पृथ्वी को ही संदर्भ बिंदु मान लेते हैं, इसीलिए मेज़ पर रखी पुस्तक को "विरामावस्था में" कहने पर कुछ अधूरा नहीं लगता।

क्या आप जानते हैं? पृथ्वी आपको सूर्य के चारों ओर लगभग 30 km s⁻¹ से ले जा रही है और भूमध्य रेखा पर लगभग 0.46 km s⁻¹ से पूर्व की ओर घुमा रही है। आपको कुछ अनुभव नहीं होता, क्योंकि आपके चारों ओर की हर वस्तु — भूमि, वायु, कुर्सी — आपके साथ ही चल रही है।
प्र12.
किसी साइकिल चालक के लिए 0 s से 120 s के बीच वेग-समय ग्राफ चित्र 4.30 में दर्शाया गया है। उन क्षेत्रफलों को छायांकित (अलग-अलग रंगों में) कीजिए जो इसका विस्थापन निरूपित करते हैं, जब— (i) साइकिल चालक नियत वेग से चल रहा है। (ii) साइकिल चालक का वेग कम हो रहा है। 0 –120 s समय अंतराल में विस्थापन एवं माध्य त्वरण का परिकलन भी कीजिए।
उत्तर

चित्र 4.30 को बिंदु-दर-बिंदु पढ़िए — वेग 0 s से 20 s के बीच 0 से 3 m s⁻¹ तक बढ़ता है, 20 s से 100 s तक 3 m s⁻¹ पर स्थिर रहता है, और 100 s से 120 s के बीच घट कर 2 m s⁻¹ रह जाता है।

020406080100120 123456 समय (s)वेग (m s⁻¹) 30 m(i) 240 m(ii) 50 m
नीला: नियत वेग वाला खंड (20 s – 100 s)। गुलाबी: घटते वेग वाला खंड (100 s – 120 s)। हरा: आरंभ में चाल बढ़ने वाला खंड।

(i) नियत वेग — 20 s से 100 s। ग्राफ के समतल भाग के नीचे का आयत छायांकित कीजिए।

विस्थापन = आयत का क्षेत्रफल = v × t
= 3 m s⁻¹ × (100 s − 20 s) = 3 × 80 m = 240 m

(ii) वेग कम होना — 100 s से 120 s। गिरते भाग के नीचे का समलंब चतुर्भुज छायांकित कीजिए।

विस्थापन = ½ (समांतर भुजाओं का योग) × चौड़ाई
= ½ × (3 m s⁻¹ + 2 m s⁻¹) × 20 s = ½ × 5 × 20 m = 50 m

120 s में कुल विस्थापन। आरंभिक खंड (0 s से 20 s, एक त्रिभुज) भी जोड़िए —

0 s – 20 s: ½ × 20 s × 3 m s⁻¹ = 30 m
20 s – 100 s: 240 m
100 s – 120 s: 50 m
कुल विस्थापन = 30 m + 240 m + 50 m = 320 m

120 s में माध्य त्वरण। यह केवल दोनों सिरों के वेगों पर निर्भर है —

aav = (अंतिम वेग − आरंभिक वेग) / t
= (2 m s⁻¹ − 0 m s⁻¹) / 120 s
= 0.0167 m s⁻² ≈ 0.017 m s⁻², गति की दिशा में
ऐसा क्यों होता है: माध्य त्वरण बहुत छोटा है और धनात्मक भी, जबकि अंतिम 20 s में साइकिल चालक की चाल वास्तव में घटी थी। कारण यह है कि "माध्य" केवल पहले और अंतिम पाठ्यांक की तुलना करता है — वह विरामावस्था से चला और 2 m s⁻¹ पर समाप्त हुआ, अर्थात सकल वृद्धि। ग्राफ बीच में तीन बिलकुल भिन्न त्वरण दिखाता है (+0.15 m s⁻², 0, तथा −0.05 m s⁻²) — एक अकेला माध्य यह सब छिपा लेता है।
प्र13.
एक लड़की किसी सीधी सड़क पर दौड़ कर अपनी पहली मैराथन दौड़ प्रतियोगिता की तैयारी कर रही है। विभिन्न समयावधियों में अपनी धावन-चाल के परिकलन के लिए वह एक स्मार्टवॉच का उपयोग करती है। चित्र 4.31 में दर्शाया गया वेग-समय ग्राफ विभिन्न क्षणों पर उसके वेग के मान को चित्रित करता है। ग्राफ के आधार पर उसके द्वारा दौड़ी गई दूरी का आकलन कीजिए।
उत्तर

वह सीधी सड़क पर एक ही दिशा में दौड़ती है, अत: उसके द्वारा तय दूरी वेग-समय ग्राफ के नीचे का क्षेत्रफल है। चित्र 4.31 के सातों अंकित बिंदु पढ़िए (एक छोटा वर्ग = 0.2 h क्षैतिज और 0.25 km h⁻¹ ऊर्ध्वाधर) —

समय (h)00.61.63.04.65.66.6
वेग (km h⁻¹)7.07.07.57.57.06.56.5
0246 2.55.07.5 समय (h)वेग (km h⁻¹) क्षेत्रफल ≈ 47 km
धाविका के वेग-समय ग्राफ के नीचे का क्षेत्रफल। दोनों अक्ष km और h में हैं, अत: क्षेत्रफल सीधे किलोमीटर में आ जाता है।

क्षेत्रफल को छह पट्टियों में बाँट कर प्रत्येक पर समलंब-नियम लगाइए —

0 → 0.6 h: 7.0 × 0.6 = 4.2 km
0.6 → 1.6 h: ½(7.0 + 7.5) × 1.0 = 7.25 km
1.6 → 3.0 h: 7.5 × 1.4 = 10.5 km
3.0 → 4.6 h: ½(7.5 + 7.0) × 1.6 = 11.6 km
4.6 → 5.6 h: ½(7.0 + 6.5) × 1.0 = 6.75 km
5.6 → 6.6 h: 6.5 × 1.0 = 6.5 km
कुल ≈ 4.2 + 7.25 + 10.5 + 11.6 + 6.75 + 6.5 = 46.8 km ≈ 47 km
स्वयं जाँचिए, शीघ्र विधि से: उसका वेग 6.5 – 7.5 km h⁻¹ की पट्टी से कभी बाहर नहीं जाता, अत: लगभग 6.6 h तक उसका औसत वेग लगभग 7 km h⁻¹ रहा। इससे 7 × 6.6 ≈ 46 km — ग्राफ जितनी परिशुद्धता दे सकता है, उसमें यही उत्तर है। बिंदु आँख से पढ़े गए हैं, इसलिए "लगभग 47 km" कहना ईमानदारी है; 46.8 km लिखना ग्राफ से अधिक परिशुद्धता का दावा होगा।
ऐसा क्यों होता है: मात्रक स्वयं हिसाब रख लेते हैं। km h⁻¹ में ऊँचाई और h में चौड़ाई का गुणनफल km देता है, अत: कोई रूपांतरण करना ही नहीं पड़ता। यह भी देखिए कि दूरी कितनी है — पूरी मैराथन 42.2 km की होती है, अत: वह अभ्यास-दौड़ में ही उससे अधिक दूरी तय कर चुकी है।

छपाई की एक बात: हिंदी संस्करण में चित्र 4.31 के ऊर्ध्वाधर अक्ष पर "वेग (km s⁻¹)" छपा है, जबकि क्षैतिज अक्ष h में है और यह एक धाविका की चाल है। सही मात्रक km h⁻¹ ही है (अंग्रेज़ी संस्करण में भी यही छपा है), और ऊपर का परिकलन उसी पर आधारित है।
प्र14.
किसी राज्य-राजमार्ग पर प्रवेश करने के पश्चात एक कार 2 मिनट तक 6 m s⁻¹ के नियत वेग से चलती है और फिर 6 सेकंड तक 1 m s⁻² के नियत त्वरण से त्वरित होती है। इस कार की गति के लिए वेग-समय ग्राफ बना कर 2 मिनट 6 सेकंड की अवधि में राज्य के राजमार्ग पर कार का विस्थापन ज्ञात कीजिए।
उत्तर

पहले समय बदलिए और अंतिम वेग निकालिए, ताकि ग्राफ मापक्रम में बन सके।

2 मिनट = 120 s, अत: पूरा अंतराल = 120 s + 6 s = 126 s
त्वरित होने के बाद अंतिम वेग: v = u + at = 6 m s⁻¹ + (1 m s⁻² × 6 s) = 12 m s⁻¹
0120126 612 समय (s)वेग (m s⁻¹) 720 m54 m (यह पतली पट्टी)
विस्थापन पूरा छायांकित क्षेत्रफल है — नियत वेग वाले खंड का लंबा आयत और त्वरण वाले 6 s का पतला समलंब।

भाग 1 — आयत (0 s से 120 s):

s₁ = v × t = 6 m s⁻¹ × 120 s = 720 m

भाग 2 — समलंब चतुर्भुज (120 s से 126 s):

s₂ = ½ (u + v) t = ½ × (6 m s⁻¹ + 12 m s⁻¹) × 6 s
= ½ × 18 × 6 m = 54 m
कुल विस्थापन = s₁ + s₂ = 720 m + 54 m = 774 m, गति की दिशा में
स्वयं जाँचिए: भाग 2 के लिए s = ut + ½at² = 6 × 6 + ½ × 1 × 36 = 36 + 18 = 54 m ✓
ऐसा क्यों होता है: ग्राफ दोनों योगदानों को ईमानदारी से दिखा देता है। दो मिनट की नियमित चाल 720 m देती है; छह सेकंड का तीव्र त्वरण केवल 54 m जोड़ता है। यहाँ क्षेत्रफल में चौड़ाई प्रभावी है, ऊँचाई नहीं — यह उपयोगी स्मरण है कि थोड़े समय में हुआ नाटकीय वेग-परिवर्तन भी विस्थापन में बहुत कम जोड़ सकता है।
प्र15.
दो कारें A एवं B सरल रेखा में नियत त्वरण से विरामावस्था से गति आरंभ करती हैं। कार A 5 s में 5 m s⁻¹ वेग प्राप्त करती है। जबकि कार B, 10 s में 3 m s⁻¹ वेग प्राप्त करती है। एक ही ग्राफपेपर पर दोनों कारों के वेग-समय ग्राफ आलेखित कीजिए। इस ग्राफ का उपयोग करके दी गई दोनों समयावधियों में विस्थापन के मान परिकलित कीजिए। (संकेत— दोनों प्रकरणों में त्वरण परिकलित कीजिए। इसके पश्चात ग्राफ आलेखित करने के लिए समय के पाँच क्षणों पर वेगों का परिकलन कीजिए।)
उत्तर

चरण 1 — दोनों त्वरण। दोनों विरामावस्था से चलती हैं, अत: दोनों के लिए u = 0।

कार A: aA = (v − u)/t = (5 m s⁻¹ − 0)/5 s = 1 m s⁻²
कार B: aB = (3 m s⁻¹ − 0)/10 s = 0.3 m s⁻²

चरण 2 — पाँच क्षणों पर वेग, v = u + at = at से —

कार A: t (s)12345
v = 1 × t (m s⁻¹)1.02.03.04.05.0
कार B: t (s)246810
v = 0.3 × t (m s⁻¹)0.61.21.82.43.0
0246810 12345 AB समय (s)वेग (m s⁻¹) 12.5 m15 m
दोनों रेखाएँ मूलबिंदु से आरंभ होती हैं क्योंकि दोनों कारें विरामावस्था से चलती हैं। A कहीं अधिक ढलवाँ है (बड़ा त्वरण), पर उसकी रेखा 5 s पर ही समाप्त हो जाती है।

चरण 3 — विस्थापन, दोनों त्रिभुजों के क्षेत्रफल के रूप में।

कार A, 5 s में: sA = ½ × आधार × ऊँचाई = ½ × 5 s × 5 m s⁻¹ = 12.5 m
कार B, 10 s में: sB = ½ × 10 s × 3 m s⁻¹ = 15 m
स्वयं जाँचिए: s = ut + ½at² से भी वही मान आते हैं — A: ½ × 1 × 5² = 12.5 m ✓   B: ½ × 0.3 × 10² = 15 m ✓
ऐसा क्यों होता है: A का त्वरण B से तीन गुने से भी अधिक है, फिर भी B आगे निकल जाती है — क्योंकि B को दोगुना समय मिला। प्रश्न का मर्म यही है: विस्थापन त्वरण और उसके लगने के समय, दोनों पर निर्भर है (s = ½at², जिसमें समय दो बार आता है)। केवल त्वरण की तुलना करने पर क्रम उलटा निकलता।
प्र16.
रोहन घर पर शाम के 6 बजे से 7:30 बजे तक विज्ञान का अध्ययन करता है। उसकी दीवार घड़ी (चित्र 4.32) की मिनट की सुई की लंबाई 7 cm है। परिकलन कीजिए, दी गई समयावधि में इस सुई के सिरे— (i) द्वारा चलित दूरी (ii) का विस्थापन (iii) की चाल तथा (iv) का वेग
उत्तर

सुई का सिरा R = 7 cm = 0.07 m त्रिज्या के वृत्त पर चलता है। शाम 6:00 से 7:30 तक 90 मिनट होते हैं, और मिनट की सुई एक परिक्रमा में 60 मिनट लेती है।

परिक्रमाओं की संख्या = 90 मिनट / 60 मिनट = 1.5
समय अंतराल t = 90 मिनट = 90 × 60 s = 5400 s
6:00 बजे सिरा (12 पर) 7:30 बजे सिरा (6 पर) विस्थापन = 2R = 14 cm पथ: 1.5परिक्रमाएँ
90 मिनट में सुई का सिरा डेढ़ चक्कर लगाता है और आरंभ बिंदु के ठीक सामने (व्यास के दूसरे सिरे पर) पहुँचता है।

(i) चलित दूरी — परिधि का 1.5 गुना —

दूरी = 1.5 × 2πR
= 1.5 × 2 × (22/7) × 7 cm
= 1.5 × 44 cm = 66 cm = 0.66 m

(ii) विस्थापन — 1.5 परिक्रमाओं के बाद सिरा आरंभ बिंदु के ठीक सामने होता है, अत: सीधी दूरी एक व्यास के बराबर है —

विस्थापन = 2R = 2 × 7 cm = 14 cm = 0.14 m,
दिशा 12 के चिह्न से 6 के चिह्न की ओर (डायल पर ऊर्ध्वाधरत: नीचे की ओर)

(iii) चाल — दूरी ÷ समय —

चाल = 0.66 m / 5400 s = 1.2 × 10⁻⁴ m s⁻¹

(iv) वेग — विस्थापन ÷ समय —

वेग = 0.14 m / 5400 s = 2.6 × 10⁻⁵ m s⁻¹,
दिशा 12 के चिह्न से 6 के चिह्न की ओर
ऐसा क्यों होता है: सिरा अपने अंतिम विस्थापन से लगभग पाँच गुना चलता है, क्योंकि उसका अधिकांश पथ स्वयं पर ही मुड़ जाता है। यदि रोहन पूरे घंटों तक पढ़ता — मान लीजिए 6 बजे से 8 बजे तक — तो सुई वापस 12 के चिह्न पर आ जाती और विस्थापन तथा माध्य वेग दोनों ठीक शून्य होते, जबकि चाल वही रहती।
सुझाव: भाग देने से पहले मीटर और सेकंड में बदल लीजिए, तो उत्तर सीधे SI मात्रकों में मिल जाते हैं। दोनों मान अत्यंत छोटे हैं — मिनट की सुई का सिरा प्रति सेकंड लगभग दसवें भाग मिलीमीटर ही सरकता है।
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