कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 4 परियोजना कार्य के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
गत्ते की एक चकती (त्रिज्या ∼ 8 cm) लीजिए (चित्र 4.33)। इसके बाहरी भाग पर (केंद्र से 7 cm की दूरी पर) एक ही आमाप की 1 से 12 तक की संख्याएँ तथा आंतरिक भाग पर (केंद्र से 4 cm की दूरी पर) अक्षर ‘A, B, C, D, E, F’ लिखिए। चकती को पहले धीरे-धीरे और फिर तीव्र गति से घुमाइए। अवलोकन कीजिए कि संख्याएँ और अक्षर कैसे दिखाई देते हैं। संख्याएँ क्यों धुँधली अथवा अदृश्य हो जाती हैं जबकि अक्षर दिखाई देते रहते हैं? क्या संख्याओं और अक्षरों की चाल समान है या भिन्न-भिन्न? अपने उत्तर के समर्थन में तर्क दीजिए।
उत्तर

आप क्या देखेंगे: धीरे घुमाने पर दोनों वृत्त पढ़े जा सकते हैं। तेज़ घुमाने पर बाहरी संख्याएँ पहले धुँधली होकर एक धूसर वलय में बदल जाती हैं, जबकि भीतरी अक्षर तब भी पहचाने जा सकते हैं।

क्या चाल समान है? भिन्न-भिन्न। दोनों वृत्त एक परिक्रमा उसी समय T में पूरी करते हैं — चकती दृढ़ है, कोई भाग पीछे रह ही नहीं सकता — पर वे भिन्न त्रिज्या के वृत्तों पर चलते हैं।

संख्याओं की चाल = 2π × 7 cm / T
अक्षरों की चाल = 2π × 4 cm / T
अनुपात = 7 : 4 = 1.75
अत: संख्याएँ अक्षरों से 1.75 गुनी तेज़ चलती हैं

संख्याओं में देखिए — यदि चकती 0.5 s में एक चक्कर लगाए, तो —

संख्याएँ: v = 2 × 3.14 × 0.07 m / 0.5 s = 0.88 m s⁻¹
अक्षर:  v = 2 × 3.14 × 0.04 m / 0.5 s = 0.50 m s⁻¹

संख्याएँ क्यों धुँधली हो जाती हैं: आँख किसी प्रतिबिंब को लगभग 1/16 s तक बनाए रखती है। उतने समय में कोई संख्या अक्षर की तुलना में कहीं लंबा चाप तय कर लेती है, अत: उसका प्रतिबिंब दृष्टिपटल पर अधिक लंबाई में फैल जाता है। एक सीमा से अधिक चाल पर एक संख्या का फैलाव अगली संख्या के फैलाव से मिल जाता है और पूरा वलय एकसार धूसर हो जाता है। धीमे चलते अक्षरों का फैलाव छोटा होने से वे देर तक अलग-अलग बने रहते हैं।

ऐसा क्यों होता है: दोनों वृत्तों के लिए वास्तव में जो समान है, वह है प्रति सेकंड चक्करों की संख्या, अर्थात घूमने की दर। समान नहीं है रैखिक चाल, क्योंकि चाल = चाप की लंबाई ÷ समय, और उसी घुमाव के लिए बाहरी चाप लंबा होता है। इसी कारण पंखे के फलक का सिरा सीटी जैसी ध्वनि करता है जबकि उसका जड़-भाग नहीं, और चक्रीय झूले के बाहरी घोड़े भीतरी घोड़ों से तेज़ लगते हैं।
प्र2.
अनेक स्मार्टफोन के भीतर एक अंतर्निमित त्वरणमापी होता है जो अत्यंत सूक्ष्म त्वरण की उपस्थिति भी संसूचित कर सकता है। Phyphox (Phyphox.org) जैसा कोई ऐप इंस्टॉल कीजिए और इसमें ‘Accelerometer’ (g विहीन) खोलिए। पाठ्यांक तब नोट कीजिए जब फोन (i) आपकी फैली हुई हथेली पर रखा हो (ii) फर्श पर रखा हो। आप पाठ्यांकों में क्या अंतर पाते हैं? व्यावहारिक स्थितियों में आपको इससे गति एवं त्वरण के विषय में क्या पता चलता है? (इस प्रकार की सूक्ष्म, अनैच्छिक गतियों का अध्ययन आयुर्विज्ञान अनुसंधान में भी किया जाता है, उदाहरणार्थ— अंग संचालन संबंधी विकारों में) यह संस्तुत किया जाता है कि यह क्रियाकलाप शिक्षक की सहायता से सामूहिक कक्षा-कक्ष गतिविधि के रूप में किया जाए।
उत्तर

करने की विधि: Phyphox खोलिए, Accelerometer (without g) चुनिए ताकि गुरुत्व का नियत 9.8 m s⁻² पहले ही घटा हुआ मिले, और दोनों स्थितियों में लगभग 30 s तक बिना पर्दा छुए ग्राफ चलने दीजिए।

फोन कहाँ हैसामान्य पाठ्यांकग्राफ कैसा दिखता है
(i) फैली हुई हथेली परलगभग 0.05 – 0.5 m s⁻²लगातार डोलता हुआ, कभी स्थिर नहीं; छोटे अनियमित उछाल
(ii) फ़र्श परशून्य के निकट, लगभग 0.01 m s⁻² या कमलगभग सपाट रेखा — केवल यंत्र का रव, और कोई पास से चले तो एक उछाल

इससे क्या पता चलता है:

  • हाथ कभी पूर्णत: स्थिर नहीं होता। माँसपेशियाँ उसे थामे रखने के लिए निरंतर सूक्ष्म सुधार करती रहती हैं, और हर सुधार वेग में एक छोटा परिवर्तन है, अर्थात वास्तविक त्वरण।
  • "विरामावस्था" एक आदर्श प्रतिरूपण है, ठीक वैसे ही जैसे अनुभाग 4.1 की आदर्श गतियाँ। वास्तविक वस्तुएँ विराम के निकट होती हैं, ठीक विराम में नहीं।
  • फ़र्श वाला पाठ्यांक भी ठीक शून्य नहीं है; वह शेष मान यंत्र का रव है और यही तय करता है कि फोन कितना छोटा त्वरण ईमानदारी से बता सकता है।
ऐसा क्यों होता है: त्वरणमापी वेग के परिवर्तन पर प्रतिक्रिया करता है, वेग पर नहीं। इसीलिए फ़र्श पर पड़ा फोन लगभग शून्य दिखाता है और 60 km h⁻¹ से समान चाल पर चलती कार में रखा फोन भी लगभग शून्य ही दिखाता है — और इसीलिए थामे हुए हाथ का सूक्ष्म कंपन इतना स्पष्ट दिखता है। छोटे त्वरणों के प्रति यही संवेदनशीलता इन संवेदकों को आयुर्विज्ञान में उपयोगी बनाती है: चिकित्सक इनसे अंग-संचालन संबंधी विकारों में अनैच्छिक कंपन अंकित करते हैं, जहाँ कंपन का परिमाण और आवृत्ति रोग-निदान की सूचना देते हैं।
यह भी कीजिए: फोन को पास रखने के बजाय हाथ पूरा फैला कर पकड़िए — पाठ्यांक बढ़ जाएँगे, क्योंकि लंबी भुजा कंधे के हर छोटे झटके को बढ़ा कर दिखाती है।
प्र3.
नियत त्वरण से सरल रेखा में गति के लिए हमने दो प्राथमिक समीकरणों समीकरण — (4.4 क) एवं (4.4 ख) व्युत्पन्न किए थे। इन दो समीकरणों का उपयोग करके हम तीन अतिरिक्त समीकरणों को व्युत्पन्न कर सकते हैं जिनमें से एक समीकरण (4.4 ग) हमने पहले व्युत्पन्न किया है। नीचे दिए गए शेष दो समीकरणों को व्युत्पन्न कीजिए — s = vt − ½at² तथा s = ½(u + v)t। गणित में आपने समलंब चतुर्भुज के क्षेत्रफल को परिकलित करने का सूत्र सीखा है। उस सूत्र का उपयोग करके ऊपर दिया गया दूसरा सूत्र व्युत्पन्न कीजिए।
उत्तर

व्युत्पत्ति 1 — s = vt − ½at²

पहले प्राथमिक समीकरण से u को विषय बनाइए —

v = u + at   [समीकरण 4.4 क]
⇒ u = v − at

यह u दूसरे प्राथमिक समीकरण में प्रतिस्थापित कीजिए —

s = ut + ½at²   [समीकरण 4.4 ख]
s = (v − at)t + ½at²
s = vt − at² + ½at²
s = vt − ½at²   सिद्ध
ऐसा क्यों होता है: इसकी तुलना समीकरण (4.4 ख) से कीजिए। वह विस्थापन को आरंभ से आगे की ओर नापता है और त्वरण का दिया हुआ ½at² जोड़ता है। यह समीकरण अंत से पीछे की ओर नापता है — यदि वस्तु पूरे समय अपने अंतिम वेग v से चलती तो vt दूरी तय करती, पर वह पहले v से धीमी थी, अत: ½at² घटाना पड़ता है।

व्युत्पत्ति 2 — s = ½(u + v)t, समलंब चतुर्भुज के क्षेत्रफल से

चित्र 4.19 के वेग-समय ग्राफ में विस्थापन आकृति OABD का क्षेत्रफल है। वह आकृति एक समलंब चतुर्भुज है — OA और DB इसकी दो समांतर भुजाएँ हैं (दोनों ऊर्ध्वाधर) और OD उनके बीच की लंब दूरी।

ABOD uvt क्षेत्रफल = विस्थापन s वेगसमय
छायांकित समलंब चतुर्भुज OABD — समांतर भुजाएँ u और v, ऊँचाई t। इसका क्षेत्रफल ही विस्थापन है।
समलंब चतुर्भुज का क्षेत्रफल = ½ × (समांतर भुजाओं का योग) × (उनके बीच की दूरी)

यहाँ: समांतर भुजाएँ AO = u तथा BD = v; उनके बीच की दूरी OD = t

s = OABD का क्षेत्रफल = ½ × (u + v) × t
s = ½(u + v)t   सिद्ध
बीजगणित से भी जाँचिए: s = ut + ½at² और s = vt − ½at² को जोड़िए। ½at² वाले पद कट जाते हैं —
2s = ut + vt = (u + v)t ⇒ s = ½(u + v)t ✓
ऐसा क्यों होता है: ½(u + v) आरंभिक और अंतिम वेगों का साधारण औसत ही है, और s = (माध्य वेग) × समय। यह साधारण औसत केवल इसलिए सही है कि त्वरण नियत है, जिससे वेग-समय ग्राफ सरल रेखा बन जाता है — और सरल रेखा अपने मध्य-मान के जितना ऊपर रहती है, उतना ही नीचे भी। वक्रित ग्राफ में मध्य-मान औसत नहीं होता और यह समीकरण विफल हो जाता।
प्र4.
अलग-अलग ग्राफ पत्रों पर X एवं Y अक्षों के लिए अलग-अलग मापक्रम लेकर तालिका 4.4 में दिए गए आँकड़ों के लिए ग्राफ आलेखित कीजिए। दोनों ग्राफ की तुलना करके ज्ञात कीजिए कि मापक्रम बदलने से ग्राफ की आकृति किस प्रकार परिवर्तित होती है और यह सुनिश्चित कीजिए कि कौन-सा मापक्रम सबसे अच्छा है और क्यों? अब किसी ग्राफ आलेखनकारी ऐप की सहायता से इस प्रयोग को दोहराइए। इस प्रकार के ऐप सामान्यत: पर्दे पर आँकड़ों के उचित अनुरूपण के लिए अक्षों का समंजन स्वयं कर लेते हैं।
उत्तर

विधि। तालिका 4.4 (0 s, 0 m) से (12 s, 36 m) तक जाती है। इसे तीन अलग पत्रों पर आलेखित कीजिए, केवल मापक्रम बदलते हुए —

पत्रX-अक्ष का मापक्रमY-अक्ष का मापक्रमवक्र कैसा दिखता है
1 (पुस्तक वाला)5 भाग = 2 s5 भाग = 5 mवक्र पूरा पृष्ठ भरता है; मोड़ स्पष्ट दिखता है
25 भाग = 2 s5 भाग = 20 mचपटा हो जाता है — नीचे की ओर लगभग सरल रेखा जैसा लगता है
35 भाग = 5 s5 भाग = 5 mबग़ल से सिकुड़ जाता है — वास्तविकता से कहीं अधिक ढलवाँ लगता है

निष्कर्ष क्या निकले। पत्र 1 का चयन बेहतर है, दो कारणों से —

  • यह उपलब्ध कागज़ का अधिकांश भाग उपयोग करता है, अत: हर बिंदु निकटतम छोटे भाग तक अंकित और पढ़ा जा सकता है — पत्र जितनी परिशुद्धता दे सकता है, उतनी।
  • यह वक्रता को दृश्य बनाए रखता है। पत्र 2 पर वक्र इतना चपटा हो जाता है कि विद्यार्थी उसे सरल रेखा समझ कर ग़लत निष्कर्ष निकाल सकता है कि वाहन नियत वेग से चल रहा है।
ऐसा क्यों होता है: मापक्रम चित्र बदलता है, भौतिकी नहीं। पत्र 3 पर मापी गई प्रवणता अधिक ढलवाँ दिखती है, पर जब आप प्रत्येक पत्र के अपने मापक्रम से स्थिति में परिवर्तन को समय में परिवर्तन से भाग देंगे, वेग ठीक वही निकलेगा। ख़राब मापक्रम से वास्तव में जो हानि होती है वह है परिशुद्धता (सटे हुए बिंदु बारीकी से पढ़े नहीं जा सकते) और ईमानदार व्याख्या (चपटा वक्र अपनी ही आकृति छिपा लेता है)।
सुझाव: जब आप यही काम किसी ऐप में दोहराएँ, तो देखिए कि ऐप अक्षों की सीमाएँ आँकड़ों से ही चुनता है — लगभग पत्र 1 वाला चयन। हाथ से आलेखन में यही नियम अपनाइए: मापक्रम उन सबसे बड़े और सबसे छोटे मानों को देखने के बाद चुनिए जिन्हें समाना है।
प्र5.
किसी वाहन मिस्त्री से बात करके समझिए कि ब्रेक लगाने के पश्चात वाहन जितनी दूर जाकर रुकता है, वह दूरी (i) सड़क के गीले होने से (ii) घिसे हुए टायरों के कारण (iii) वाहन का द्रव्यमान अधिक होने से (iv) रात में गाड़ी चलाने से (v) कुहरे से (vi) खराब मौसम (वर्षा, बर्फ, तूफान) से तथा (vii) चालक के प्रतिक्रिया काल से किस प्रकार प्रभावित होती है। इस जानकारी का उपयोग करके अपने विद्यालय के लिए एक सुरक्षा पोस्टर अभिकल्पित कीजिए तथा विद्यालय की सभा में प्रस्तुत करने के लिए एक छोटी-सी लघुनाटिका तैयार कीजिए।
उत्तर

विधि। इस अध्याय के दो-पदीय सूत्र को अपनी बातचीत का ढाँचा बनाइए और मिस्त्री से पूछिए कि कौन-सा कारक किस पद पर प्रहार करता है —

रुकने की दूरी = u tr  +  u² / (2|a|)
           (प्रतिक्रिया)     (ब्रेक)

अच्छे लेख में प्रत्येक कारक के लिए तीन बातें दर्ज होनी चाहिए — मिस्त्री के अनुसार क्या होता है, वह किस पद को बदलता है, और लगभग कितना।

नमूना उत्तर:

कारककिस पद को प्रभावित करता हैरुकने की दूरी पर प्रभाव
(i) गीली सड़क|a| घटाती है (टायर और सड़क के बीच पकड़ कम)ब्रेक-दूरी लगभग दोगुनी हो सकती है
(ii) घिसे हुए टायर|a| घटाते हैं — घिसी ग्रूव पानी बाहर नहीं निकाल पातींबहुत अधिक लंबी, और गीले में कहीं अधिक
(iii) अधिक द्रव्यमानउसी ब्रेक-बल के लिए |a| घटा देता हैलदे ट्रक को खाली ट्रक से अधिक दूरी चाहिए
(iv) रात में चलानाtr बढ़ाता है — ख़तरा देर से दिखता हैप्रतिक्रिया दूरी लंबी; प्रतिक्रिया का समय भी कम
(v) कुहराtr तेज़ी से बढ़ाता है और प्राय: |a| भी घटाता है (नम सड़क)दोनों पद बढ़ते हैं — इसीलिए कुहरे में गति-सीमा बहुत कम
(vi) वर्षा, बर्फ, तूफान|a| बहुत घटा देते हैंब्रेक-दूरी कई गुनी हो सकती है
(vii) चालक का प्रतिक्रिया कालसीधे tr वाला पद15 m s⁻¹ पर हर अतिरिक्त सेकंड ब्रेक लगने से पहले ही 15 m जोड़ देता है

पोस्टर के लिए कोई नारा नहीं, एक परिकलन डालिए — संख्याएँ अधिक प्रभावी होती हैं। जैसे सूखी सड़क पर |a| = 4 m s⁻² और tr = 1 s लेकर —

36 km h⁻¹ (10 m s⁻¹) पर: 10 m + 12.5 m = 22.5 m
72 km h⁻¹ (20 m s⁻¹) पर: 20 m + 50 m = 70 m
चाल दोगुनी → रुकने की दूरी तीन गुने से भी अधिक

लघुनाटिका के लिए यह सरल ढाँचा काम आता है — दो मित्र घर लौट रहे हैं, एक 3 सेकंड का अंतर रखता है और दूसरा बिलकुल सटकर चलता है; आगे अचानक ब्रेक लगता है; दृश्य रोक कर तीसरा विद्यार्थी दोनों की रुकने की दूरी का परिकलन पढ़ता है और उसके बाद दोनों परिणाम दिखाए जाते हैं। अंत में वही नियम दोहराइए जो दर्शकों को याद रखना है — निश्चित दूरी नहीं, निश्चित समय-अंतराल रखिए, और वर्षा या कुहरे में उसे बढ़ा दीजिए।

ऐसा क्यों होता है: ध्यान दीजिए कि सात में से छह कारक चालक की चाल बिलकुल नहीं बदलते — वे बदलते हैं कि उसी चाल पर रुकने के लिए वाहन को कितनी दूरी चाहिए। पोस्टर पर लिखने योग्य संदेश यही है: जो चाल सूखी, साफ़ सड़क पर सुरक्षित है, वही चाल उसी सड़क पर वर्षा में, उसी वाहन और उसी चालक के साथ, ख़तरनाक हो सकती है।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ