कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 4 सोचिए और बताइए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
किसी सीधे धावन पथ पर इसके दो सिरों के बीच इधर से उधर दौड़ते हुए किसी धावक के उदाहरण (चित्र 4.4) में धावक का विस्थापन शून्य कब होगा? उस स्थिति में उसके द्वारा तय की गई कुल दूरी कितनी होगी?
उत्तर

विस्थापन उसी क्षण शून्य होगा जब वह लौट कर अपने प्रस्थान बिंदु O पर आ जाएगी — क्योंकि विस्थापन स्थिति में सकल परिवर्तन है और तब उसकी अंतिम स्थिति आरंभिक स्थिति के बराबर हो जाती है।

विस्थापन = अंतिम स्थिति − आरंभिक स्थिति
= 0 m − 0 m = 0 m

यदि वह O से A तक (100 m) दौड़ कर वापस O पर आती है, तो —

कुल चलित दूरी = OA + AO
= 100 m + 100 m = 200 m
ऐसा क्यों होता है: दोनों राशियाँ अलग-अलग प्रश्नों का उत्तर देती हैं। "आप कितना दौड़े?" — इसमें पथ का हर मीटर गिना जाता है, लौटने का भी। "अब आप आरंभ की तुलना में कहाँ हैं?" — इसमें पथ का कोई महत्त्व नहीं। इसलिए हर बंद यात्रा में विस्थापन शून्य और दूरी शून्येतर होती है।
स्वयं जाँचिए: O पर समाप्त होने वाली किसी भी यात्रा में विस्थापन शून्य होगा — O से B और वापस में विस्थापन 0 m पर दूरी 80 m, तथा O–A–O–A–O में विस्थापन 0 m पर दूरी 400 m।
प्र2.
किसी वाहन में उपयुक्त ईंधन का परिमाण निम्नलिखित में से किस राशि पर निर्भर करता है? अपने उत्तर के समर्थन में तर्क दीजिए। (i) कुल चलित दूरी (ii) विस्थापन
उत्तर

(i) कुल चलित दूरी।

ऐसा क्यों होता है: इंजन को सड़क के हर एक मीटर पर घर्षण और वायु-प्रतिरोध के विरुद्ध वाहन को धकेलते रहना पड़ता है। यह कार्य — और इसलिए जलने वाला ईंधन — पूरे पथ पर जुड़ता जाता है। विस्थापन पथ के विषय में कुछ बताता ही नहीं।

एक सरल परीक्षण से बात स्पष्ट हो जाती है। मान लीजिए कोई ऑटो आपको घर से 4 km दूर विद्यालय छोड़ता है और वापस घर लौट आता है —

कुल चलित दूरी = 4 km + 4 km = 8 km
विस्थापन = 0 km

यदि ईंधन विस्थापन पर निर्भर होता, तो लौटती यात्रा नि:शुल्क होनी चाहिए थी और टंकी अंत में उतनी ही भरी रहती जितनी आरंभ में। ऐसा स्पष्टत: नहीं होता। ईंधन-मापी और ओडोमीटर, दोनों दूरी का हिसाब रखते हैं, विस्थापन का नहीं।

क्या आप जानते हैं? इसी कारण ऑटो या टैक्सी का मीटर ओडोमीटर के पाठ्यांक (दूरी) पर चलता है, इस बात पर नहीं कि आप आरंभ बिंदु से अंत में कितनी दूर पहुँचे।
प्र3.
कोई गेंद एक अभिनत पथ पर नीचे की ओर लुढ़कती है जैसा चित्र 4.6 में दर्शाया गया है। क्या इसकी गति सरल रेखीय गति है? यदि यह मान लेते हैं कि गेंद का प्रस्थान बिंदु ‘O’ मूल बिंदु है तो क्या O से D तक की इसकी गति का चित्रण एक क्षैतिज रेखा लेकर उसी प्रकार किया जा सकता है जैसा चित्र 4.3 में किया गया है? क्या स्थितियों A, B, C एवं D में से प्रत्येक पर गेंद द्वारा चलित कुल दूरी एवं बिंदु O से इसके विस्थापन के परिमाण बराबर हैं अथवा भिन्न-भिन्न हैं?
उत्तर

हाँ, यह सरल रेखीय गति है। चित्र 4.6 का अभिनत पथ स्वयं एक सरल रेखा है (भले ही ढलवाँ), और गेंद पूरे समय उसी पर बनी रहती है — अत: पथ सरल रेखा है।

हाँ, इसे चित्र 4.3 जैसी रेखा पर दर्शाया जा सकता है। गति एकविमीय है — O से पथ के अनुदिश एक ही संख्या गेंद की स्थिति पूरी तरह तय कर देती है। उस संख्या-रेखा को कागज़ पर क्षैतिज खींचना केवल सुविधा है — वह रेखा वास्तव में अभिनत पथ को ही निरूपित करती है, और उस पर धनात्मक दिशा "O से D की ओर ढलान के अनुदिश" है, न कि "क्षैतिजत: दाईं ओर"।

चित्र 4.6 के अंकनों को पथ के अनुदिश पढ़िए — OA = 40 cm, AB = 10 cm, BC = 20 cm, CD = 30 cm। अत: O से मापी गई स्थितियाँ —

स्थितिO से चलित कुल दूरीO से विस्थापन का परिमाणबराबर?
A40 cm40 cmहाँ
B40 + 10 = 50 cm50 cmहाँ
C50 + 20 = 70 cm70 cmहाँ
D70 + 30 = 100 cm100 cmहाँ

अत: A, B, C और D — प्रत्येक पर दोनों मान बराबर हैं।

ऐसा क्यों होता है: गेंद अभिनत पथ पर केवल एक ही दिशा में नीचे लुढ़कती है, कभी ऊपर वापस नहीं आती। पलटाव न होने से पथ स्वयं ही दोनों स्थितियों को मिलाने वाली सरल रेखा है, इसलिए उसकी लंबाई सीधी दूरी के बराबर है। हाँ, विस्थापन की दिशा अभिनत पथ के अनुदिश — ढलान से नीचे की ओर — है, क्षैतिज नहीं।
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