प्र1.
जल स्तर का कागज पर ऊपर चढ़ते समय अवलोकन कीजिए। आप क्या देखते हैं?
उत्तर
जल कागज में लगातार ऊपर की ओर चढ़ता है — जार में भरे जल के स्तर से काफी ऊपर तक — और जब गीला अग्रभाग स्याही के बिंदु तक पहुँचता है तो स्याही को अपने साथ खींचने लगता है। एक ही काला बिंदु खिंचकर लकीर बन जाता है और किनारों पर रंग उभरने लगते हैं।
जल कागज पर ऊपर क्यों चढ़ता है: वर्णलेखन कागज (तथा निस्यंदक पत्र) सेलुलोस के महीन रेशों का जाल है जिसके बीच असंख्य संकीर्ण नलिकाएँ होती हैं। जल के अणु सेलुलोस की ओर आकर्षित होते हैं (आसंजन) और परस्पर भी (संसंजन), अतः वे इन संकीर्ण नलिकाओं में खिंचकर गुरुत्व के विरुद्ध ऊपर चढ़ जाते हैं। इसे केशिका क्रिया कहते हैं — इसी कारण दीपक की सूती बत्ती तेल ऊपर खींचती है और तौलिया जल सोख लेता है।
संकेत: रेखा पेंसिल से खींचनी चाहिए, पेन से नहीं। पेंसिल ग्रेफाइट की होती है, जो अघुलनशील है और विलायक के साथ नहीं चलती, अतः परिणाम बिगाड़ नहीं सकती।