कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 5 क्रियाकलाप 5.8 के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
गत्ते की एक चकती और मोटे धागे की सहायता से आप स्वयं का अपकेंद्रित्र (centrifuge) बनाइए। आप देख पाएँगे कि किस प्रकार भारी कण बाहर की ओर गति करते हैं। पृथक्करण के विज्ञान को समझने की यह एक रोचक एवं स्वयं करके देखने की विधि है। आप इस लघु अपकेंद्रित्र के उपयोग से किस मिश्रण को पृथक करना चाहेंगे?
उत्तर

पंकिल जल इसके लिए सबसे उपयुक्त मिश्रण है, क्योंकि परिणाम अपनी आँखों से दिखता है और इसके लिए कक्षा में उपलब्ध वस्तुओं के अतिरिक्त कुछ नहीं चाहिए।

इसे कैसे कीजिए

  1. गत्ते की कड़ी चकती के केंद्र के पास दो छिद्रों में मोटा धागा पिरोकर उसके सिरे बाँधकर फंदा बना लीजिए, जैसा चित्र 5.20 के पेपरफ्यूज में है।
  2. पंकिल जल भरी एक छोटी, कसकर बंद प्लास्टिक नलिका को चकती के किनारे के पास चपटा करके टेप से चिपका दीजिए। संतुलन बनाए रखने के लिए ठीक उसके विपरीत ओर एक और वैसी ही नलिका चिपकाइए।
  3. फंदे को दोनों सिरों से पकड़िए, चकती को घुमाकर धागों में ऐंठन दीजिए, फिर धागों को बार-बार खींचिए और ढीला छोड़िए। चकती एक बार एक दिशा में और फिर दूसरी दिशा में तीव्र गति से घूमती है।
  4. दो-तीन मिनट घुमाने के बाद रोककर नलिका को सीधा खड़ा करके देखिए।

आप क्या देखेंगे: नलिका के उस सिरे पर — जो बाहर की ओर था — पंक की दबी हुई परत, और उसके ऊपर कहीं अधिक स्वच्छ जल। वही नलिका मेज पर रखी रहती तो इतनी स्वच्छ होने में बहुत अधिक समय लगता।

ऐसा क्यों होता है: वृत्त में घूमता कण नलिका की दीवार द्वारा निरंतर केंद्र की ओर खींचा जाता रहता है। घूमती नलिका के भीतर के मिश्रण की दृष्टि से यह एक प्रबल बाहरी धक्के जैसा लगता है — अपकेंद्रीय बल। इसका मान कण के द्रव्यमान के साथ और चक्रण-चाल के वर्ग के साथ बढ़ता है, अतः कुछ हजार चक्कर प्रति मिनट पर यह कण के भार से सैकड़ों गुना अधिक हो जाता है। इसलिए पंक के भारी कण बाहरी सिरे तक उतनी तेजी से पहुँच जाते हैं जितना अकेला गुरुत्व कभी नहीं कर पाता, जबकि हल्का जल अक्ष के पास रह जाता है।
अन्य मिश्रण जिन्हें आजमाया जा सकता है: जल में चॉक का चूर्ण, दही का गाढ़े दही और मट्ठे में अलग होना, अथवा बिना छने फलों के रस का गूदा। सुरक्षा सर्वोपरि: नलिकाएँ भली-भाँति बंद और मजबूती से चिपकी होनी चाहिए, चकती संतुलित होनी चाहिए, और घुमाते समय सब लोग दूर खड़े रहें।
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