(i) पोटैशियम नाइट्रेट के 31 g।
तालिका 5.4 से, 40 °C पर KNO₃ की विलेयता = 62 g प्रति 100 g जल
50 g जल के लिए आवश्यक द्रव्यमान = (62 g ÷ 100 g) × 50 g
= 31 g पोटैशियम नाइट्रेट
(ii) वह देखेगी कि विलयन के ठंडा होते ही पोटैशियम क्लोराइड के क्रिस्टल पृथक होने लगते हैं, जिससे द्रव धुँधला हो जाता है और फिर बीकर की तली पर ठोस की परत जम जाती है।
80 °C पर KCl की विलेयता = 54 g प्रति 100 g जल
20 °C पर विलेयता = 35 g, 30 °C पर = 37.4 g प्रति 100 g जल
अतः 25 °C पर विलेयता लगभग (35 + 37.4) ÷ 2 ≈ 36 g प्रति 100 g जल
क्रिस्टलित होने वाला द्रव्यमान ≈ 54 g − 36 g = लगभग 18 g प्रति 100 g जल
क्रिस्टल क्यों निकलते हैं: 80 °C पर 100 g जल में 54 g KCl घुला है, जो उस तापमान पर उसकी अधिकतम धारण-क्षमता है। तापमान गिरने पर यह अधिकतम सीमा भी गिरती जाती है। 25 °C तक जल केवल लगभग 36 g ही विलयन में रख सकता है, अतः शेष लगभग 18 g के पास ठोस क्रिस्टलों के रूप में बाहर आने के अतिरिक्त कोई मार्ग नहीं रहता। यही क्रिस्टलीकरण है — और यदि वह विलयन को धीरे-धीरे, स्थिर रखकर ठंडा होने दे तो क्रिस्टल बड़े और सुरूपित बनेंगे।
(iii) चारों लवणों की विलेयता तापमान बढ़ने पर बढ़ती है — परंतु वृद्धि की मात्रा बहुत भिन्न है।
सभी मान प्रति 100 g जल में ग्राम में हैं। वृद्धि का क्रम है पोटैशियम नाइट्रेट > अमोनियम क्लोराइड > पोटैशियम क्लोराइड > सोडियम क्लोराइड।
व्यवहार में इसका महत्व: विलेयता कितनी तीव्रता से बढ़ती है, यही तय करता है कि कौन-सी पृथक्करण विधि अपनाई जाए। पोटैशियम नाइट्रेट क्रिस्टलीकरण के लिए आदर्श है — गर्म संतृप्त विलयन को ठंडा कीजिए और भारी मात्रा में ठोस बाहर आ जाएगा। सोडियम क्लोराइड पर तापमान का प्रभाव नगण्य है, अतः ठंडा करने से लगभग कुछ नहीं मिलेगा; इसीलिए साधारण नमक समुद्री जल को ठंडा करके नहीं, बल्कि वाष्पित करके प्राप्त किया जाता है।