कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 5 चिंतन कीजिए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
पंकिल जल में निलंबित कण कुछ समय पश्चात तली पर बैठ जाते हैं परंतु दुग्ध में ऐसा नहीं होता है, क्यों?
उत्तर

क्योंकि इन दोनों मिश्रणों के कणों का आकार बहुत भिन्न है। पंकिल जल एक निलंबन है, जबकि दुग्ध एक कोलॉइड है।

पंक के कण — व्यास 1000 nm से अधिक
दुग्ध के कण (वसा तथा प्रोटीन) — व्यास 1 – 1000 nm
ऐसा क्यों होता है: द्रव के भीतर दो प्रभाव आपस में प्रतिस्पर्धा करते हैं। गुरुत्व कण को नीचे खींचता है, जबकि जल के अणुओं की निरंतर अनियमित टक्करें उसे ऊपर उछालती रहती हैं। नीचे खींचने वाला बल कण के आयतन के साथ बढ़ता है (त्रिज्या के घन के अनुपात में), जबकि टक्करों का प्रभाव उसके पृष्ठ पर निर्भर करता है। इसलिए पंक का बड़ा कण टक्करों की तुलना में कहीं तीव्रता से नीचे खिंचता है और कुछ ही मिनटों में बैठ जाता है। दुग्ध का कण उससे हजार गुना छोटा है, अतः अणुओं की टक्करें ही उसे स्थायी रूप से परिक्षिप्त बनाए रखती हैं। दुग्ध में उपस्थित प्रोटीन प्रत्येक वसा-गोलिका को ढककर उन्हें आपस में जुड़कर बड़ी और भारी बनने से भी रोकते हैं।
स्वयं जाँचिए: पंकिल जल और दुग्ध के गिलास रात भर पास-पास स्थिर रखिए। पंक तली पर एक स्पष्ट परत बना लेता है, जबकि दुग्ध एकसमान बना रहता है। यही एक अवलोकन एक को निलंबन और दूसरे को कोलॉइड कहने के लिए पर्याप्त है।
प्र2.
वाष्पीकरण किस प्रकार क्वथन से भिन्न होता है?
उत्तर

वाष्पीकरण पृष्ठ पर होने वाला परिवर्तन है जो प्रत्येक तापमान पर चलता रहता है, जबकि क्वथन संपूर्ण द्रव में होने वाला परिवर्तन है जो केवल एक निश्चित तापमान पर होता है।

तुलना का बिंदुवाष्पीकरणक्वथन
कहाँ होता हैकेवल द्रव के मुक्त पृष्ठ परसंपूर्ण द्रव में — भीतर बुलबुले बनते हैं
तापमानक्वथनांक से नीचे प्रत्येक तापमान परकेवल क्वथनांक पर (सामान्य दाब पर जल के लिए 100 °C)
गतिमंद और शांततीव्र और प्रबल
ऊर्जा का स्रोतद्रव तथा परिवेश से ही ऊष्मा लेता है, इसलिए द्रव ठंडा हो जाता हैबाहर से लगातार ऊष्मा देनी पड़ती है
दैनिक उदाहरणगीले कपड़ों का सूखना, पसीने से ठंडककेतली में जल का खौलना
ऐसा क्यों होता है: द्रव में अणुओं की चालें एकसमान नहीं होतीं। किसी भी तापमान पर पृष्ठ के कुछ अणु इतने तीव्र होते हैं कि वे मुक्त होकर निकल जाते हैं — यही वाष्पीकरण है, और चूँकि केवल तीव्रतम अणु निकलते हैं, शेष द्रव ठंडा हो जाता है। क्वथन तब आरंभ होता है जब तापमान इतना अधिक हो जाए कि द्रव के भीतर वाष्प का दाब वायुमंडलीय दाब के बराबर हो जाए। तभी द्रव के भीतर वाष्प का बुलबुला बिना दबे बन सकता है और संपूर्ण द्रव वाष्प में बदलने लगता है।
प्र3.
आपको घने वृक्ष की पत्तियों के मध्य छोटे अंतरालों में से छनकर निकलता हुआ सूर्य का प्रकाश चमकीली किरणों के रूप में क्यों दिखाई देता है?
उत्तर

क्योंकि वृक्ष के नीचे की वायु में धूल, धुआँ और जल की सूक्ष्म बूँदें विद्यमान होती हैं और ये कण सूर्य के प्रकाश को प्रकीर्णित करके उसका कुछ भाग आपकी आँख की ओर मोड़ देते हैं। यही टिंडल प्रभाव है।

ऐसा क्यों होता है: प्रकाश सीधी रेखा में चलता है, इसलिए आपसे दूर जाता हुआ किरणपुंज स्वयं दिखाई नहीं दे सकता — आप केवल वही प्रकाश देखते हैं जो वास्तव में आपकी आँख में प्रवेश करता है। स्वच्छ वायु में किरणपुंज को मोड़ने वाला कुछ नहीं होता। परंतु जब वह प्रकाश की तरंगदैर्घ्य जितने आकार के निलंबित कणों से मिलता है, तो प्रत्येक कण उसका थोड़ा भाग सभी दिशाओं में बिखेर देता है और उसका कुछ अंश आप तक पहुँच जाता है। तब आपको किरणपुंज का मार्ग स्वयं दिखाई देने लगता है, जो वृक्ष की गहरी छाया में चमकीली किरण के रूप में उभर आता है।
क्या आप जानते हैं? यही प्रभाव खेल स्टेडियम की फ्लड लाइट्स के किरणपुंजों को दृश्यमान बनाता है (चित्र 5.24), धूल भरे सिनेमा हॉल में प्रोजेक्टर का मार्ग दिखाता है, और क्रियाकलाप 5.1 में दुग्ध वाले बीकर से लेसर गुजारने पर ठीक यही आप देखते हैं।
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