कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 5 पाठ्य प्रश्न के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
किसी विलयन में विलेय और विलायक किस अनुपात में उपस्थित होते हैं? क्या इन्हें मात्रात्मक रूप से व्यक्त किया जा सकता है?
उत्तर

कोई एक निश्चित अनुपात नहीं होता — विलयन तनु भी हो सकता है और सांद्र भी। परंतु जो अनुपात वास्तव में लिया गया है उसे ठीक-ठीक व्यक्त किया जा सकता है, और वही संख्या विलयन की सांद्रता कहलाती है।

सांद्रता = विलायक अथवा विलयन की दी हुई मात्रा में उपस्थित विलेय की मात्रा

कक्षा 9 के स्तर पर इसे प्रतिशत के तीन रूपों में लिखा जाता है —

% m/m = (विलेय का द्रव्यमान ÷ विलयन का द्रव्यमान) × 100
% m/v = (विलेय का द्रव्यमान ÷ विलयन का आयतन) × 100
% v/v = (विलेय का आयतन ÷ विलयन का आयतन) × 100
यह क्यों आवश्यक है: ओ.आर.एस., लवणीय विलयन अथवा पीड़कनाशी छिड़काव के लिए केवल “जल में नमक” कह देना पर्याप्त नहीं — प्रत्येक के लिए निश्चित अनुपात चाहिए। चिकित्सालय के लवणीय विलयन में 0.9 % m/v सोडियम क्लोराइड होना ही चाहिए, अर्थात प्रत्येक 100 mL विलयन में 0.9 g नमक, क्योंकि इसी सांद्रता पर वह रक्त के अनुरूप होता है और रक्त कणिकाओं को क्षति नहीं पहुँचाता।
प्र2.
यदि वे ऐसा नहीं करते हैं तो क्या होगा?
उत्तर

छिड़काव दो में से किसी एक प्रकार से असफल हो जाएगा।

  • पीड़कनाशी बहुत कम: सांद्रता उतनी नहीं रहती जितनी कीट को नष्ट करने के लिए चाहिए, अतः कीट जीवित रह जाते हैं और फसल की रक्षा नहीं होती। बार-बार दी गई दुर्बल मात्रा प्रतिरोधी कीटों को बढ़ने में सहायता भी कर सकती है।
  • पीड़कनाशी बहुत अधिक: अतिरिक्त मात्रा फसल को झुलसा देती है, मृदा में एकत्रित होती है, वर्षा के साथ बहकर तालाबों और नदियों में पहुँचती है तथा अनाज पर अवशेष छोड़ देती है जो खाने वालों तक पहुँच जाते हैं।
ऐसा क्यों होता है: पीड़कनाशी का प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि उसके कितने अणु प्रत्येक कीट तक पहुँचते हैं। यह संख्या सांद्रता से तय होती है, छिड़के गए कुल आयतन से नहीं। उसी 1 mL पीड़कनाशी को 10 mL के स्थान पर 100 mL जल में मिलाने पर सांद्रता दसवाँ भाग रह जाती है और प्रभाव भी उसी अनुपात में घट जाता है। उदाहरण 5.3 का यही तर्क है, जिसमें 100 mL छिड़काव में 1 mL पीड़कनाशी 1 % v/v विलयन बनाता है।
प्र3.
क्या आप ऐसे अन्य उदाहरणों के विषय में सोच सकते हैं?
उत्तर

हाँ — प्रायः प्रत्येक तैयार किए जाने वाले विलयन का अनुपात महत्वपूर्ण होता है।

स्थितिसही अनुपात क्यों आवश्यक है
अतिसार से पीड़ित बच्चे के लिए ओ.आर.एस.नमक और चीनी की सांद्रता शरीर के तरलों के अनुरूप होनी चाहिए, अन्यथा जल का अवशोषण ठीक से नहीं होगा
चिकित्सालय का लवणीय विलयन0.9 % m/v NaCl रक्त के अनुरूप है; इससे अधिक अथवा कम रक्त कणिकाओं को क्षति पहुँचाता है
फर्श साफ करने का विरंजक विलयनबहुत तनु हो तो कीटाणु नहीं मरते; बहुत सांद्र हो तो सतह और त्वचा को हानि पहुँचती है
जैम अथवा शीतल पेय के लिए चीनी की चाशनीस्वाद तथा परिरक्षण की अवधि इसी से तय होती है
दंतमंजन में फ्लुओराइड, पेयजल में क्लोरीनउपयुक्त मात्रा रक्षा करती है, उससे अधिक हानिकारक है
चाय की प्याली में चीनी और दुग्धवही सामग्री, भिन्न अनुपात, बिल्कुल भिन्न स्वाद
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