प्र1.
किसी विलयन में विलेय और विलायक किस अनुपात में उपस्थित होते हैं? क्या इन्हें मात्रात्मक रूप से व्यक्त किया जा सकता है?
उत्तर
कोई एक निश्चित अनुपात नहीं होता — विलयन तनु भी हो सकता है और सांद्र भी। परंतु जो अनुपात वास्तव में लिया गया है उसे ठीक-ठीक व्यक्त किया जा सकता है, और वही संख्या विलयन की सांद्रता कहलाती है।
सांद्रता = विलायक अथवा विलयन की दी हुई मात्रा में उपस्थित विलेय की मात्रा
कक्षा 9 के स्तर पर इसे प्रतिशत के तीन रूपों में लिखा जाता है —
% m/m = (विलेय का द्रव्यमान ÷ विलयन का द्रव्यमान) × 100
% m/v = (विलेय का द्रव्यमान ÷ विलयन का आयतन) × 100
% v/v = (विलेय का आयतन ÷ विलयन का आयतन) × 100
% m/v = (विलेय का द्रव्यमान ÷ विलयन का आयतन) × 100
% v/v = (विलेय का आयतन ÷ विलयन का आयतन) × 100
यह क्यों आवश्यक है: ओ.आर.एस., लवणीय विलयन अथवा पीड़कनाशी छिड़काव के लिए केवल “जल में नमक” कह देना पर्याप्त नहीं — प्रत्येक के लिए निश्चित अनुपात चाहिए। चिकित्सालय के लवणीय विलयन में 0.9 % m/v सोडियम क्लोराइड होना ही चाहिए, अर्थात प्रत्येक 100 mL विलयन में 0.9 g नमक, क्योंकि इसी सांद्रता पर वह रक्त के अनुरूप होता है और रक्त कणिकाओं को क्षति नहीं पहुँचाता।