प्र1.
क्रियाकलाप 5.2 में दिए गए विलेयता वक्रों का संदर्भ लीजिए। यदि यौगिक ‘क’ और ‘ख’ के गर्म, संतृप्त विलयनों के समान द्रव्यमान को 80°C से 60°C तक ठंडा किया जाए, तो किस विलयन से अधिक ठोस निक्षेपित होने की संभावना है?
उत्तर
यौगिक ‘ख’ के विलयन से कहीं अधिक ठोस निक्षेपित होगा।
चरण 1 — चित्र 5.6 से विलेयताएँ पढ़िए (प्रति 100 g जल में g में):
यौगिक ख: 80 °C पर ≈ 360 g 60 °C पर = 287 g
यौगिक क: 80 °C पर ≈ 66 g 60 °C पर ≈ 56 g
यौगिक क: 80 °C पर ≈ 66 g 60 °C पर ≈ 56 g
चरण 2 — प्रति 100 g जल पर निक्षेपित ठोस
यौगिक ख: 360 g − 287 g ≈ 73 g
यौगिक क: 66 g − 56 g ≈ 10 g
यौगिक क: 66 g − 56 g ≈ 10 g
चरण 3 — प्रश्न में विलयन का समान द्रव्यमान कहा गया है, अतः 100 g विलयन के लिए निकालिए
ख: 100 g जल + 360 g विलेय = 460 g विलयन
निक्षेप = (73 g ÷ 460 g) × 100 g ≈ 15.9 g प्रति 100 g विलयन
क: 100 g जल + 66 g विलेय = 166 g विलयन
निक्षेप = (10 g ÷ 166 g) × 100 g ≈ 6.0 g प्रति 100 g विलयन
निक्षेप = (73 g ÷ 460 g) × 100 g ≈ 15.9 g प्रति 100 g विलयन
क: 100 g जल + 66 g विलेय = 166 g विलयन
निक्षेप = (10 g ÷ 166 g) × 100 g ≈ 6.0 g प्रति 100 g विलयन
दोनों प्रकार की गणना एक ही निष्कर्ष देती है: ‘ख’ से अधिक निक्षेप होता है — समान द्रव्यमान के विलयन के लिए लगभग 2.6 गुना अधिक।
ऐसा क्यों होता है: क्रिस्टलों की मात्रा यह नहीं तय करती कि कोई यौगिक कितना घुलता है, बल्कि यह कि ठंडा होने पर उसकी विलेयता कितनी तीव्रता से गिरती है। ‘ख’ का वक्र 80 °C से 60 °C के बीच तेजी से गिरता है, अतः बड़ी मात्रा में अतिरिक्त विलेय बाहर आ जाता है। ‘क’ का वक्र लगभग सपाट है, अतः कुछ भी नाममात्र ही पृथक होता है। इसी कारण पोटैशियम नाइट्रेट जैसे तीव्र ढाल वाले यौगिक क्रिस्टलीकरण से शुद्ध किए जाते हैं, जबकि सोडियम क्लोराइड जैसे लगभग सपाट वक्र वाले पदार्थ विलायक को वाष्पित करके प्राप्त किए जाते हैं।
संकेत: ग्राफ से पढ़े गए मान सन्निकट होते हैं। इन्हें “लगभग 360 g” लिखिए, “360.0 g” नहीं — चित्र 5.6 पर केवल 287 g और 241 g ही ठीक-ठीक अंकित हैं।