कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 5 सोचिए और बताइए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
बादलों का निर्माण वायु में सूक्ष्म जल-बूँदों अथवा वायु में तैरते हिमक्रिस्टलों से होता है। विलयनों, निलंबनों और कोलॉइडों के विषय में अपनी जानकारी के आधार पर बताइए कि बादल किस प्रकार के मिश्रण हैं और क्यों?
उत्तर

बादल एक कोलॉइड है — एक एरोसॉल, जिसमें जल की सूक्ष्म बूँदें अथवा हिमक्रिस्टल परिक्षिप्त प्रावस्था हैं और वायु परिक्षेपण माध्यम है।

परीक्षणबादल क्या करता हैनिष्कर्ष
क्या बूँदें वायु में घुली हैं?नहीं — वे द्रव जल की अलग बूँदें ही बनी रहती हैंविलयन नहीं
क्या वे नीचे बैठ जाती हैं?नहीं — बादल घंटों अथवा दिनों तक तैरता रहता हैनिलंबन नहीं
क्या यह प्रकाश प्रकीर्णित करता है?हाँ — इसीलिए बादल श्वेत दिखते हैं और छाया डालते हैंटिंडल प्रभाव दर्शाता है
क्या अलग-अलग बूँदें दिखती हैं?नहीं — बादल एक चिकने पिंड जैसा दिखता हैकण कोलॉइडी आकार के → कोलॉइड
बूँदें नीचे क्यों नहीं गिरतीं: बादल की बूँदें केवल कुछ माइक्रोमीटर की होती हैं, अतः उनका भार अत्यंत अल्प होता है जबकि उन पर वायु का घर्षण अपेक्षाकृत बड़ा; ऊपर उठती वायु-धाराएँ उन्हें सरलता से थामे रखती हैं। वे वर्षा के रूप में तभी गिरती हैं जब अनेक बूँदें मिलकर इतनी बड़ी बूँद बना लें कि उसका भार ऊर्ध्व धारा पर भारी पड़े। इसी कारण बादल श्वेत भी दिखता है — बूँदें सूर्य-प्रकाश के सभी रंगों को लगभग समान रूप से प्रकीर्णित करती हैं, और सभी रंग मिलकर श्वेत दिखते हैं।
प्र2.
जिन नगरों की वायु में अधिक धुआँ और धूल होते हैं, वे प्रायः धुँधले क्यों दिखाई देते हैं?
उत्तर

क्योंकि नगर की वायु में निलंबित धुएँ और धूल के कण सूर्य-प्रकाश को सभी दिशाओं में प्रकीर्णित कर देते हैं — पूरे नगर के पैमाने पर टिंडल प्रभाव।

इससे धुंध कैसे बनती है: किसी दूर के भवन से चला प्रकाश सीधी रेखा में आपकी आँख तक आता है और उस भवन का प्रतिबिंब लाता है। मार्ग में उसे धुएँ और धूल के लाखों कण मिलते हैं और प्रत्येक उस प्रकाश का कुछ भाग इधर-उधर मोड़ देता है। इससे दो बातें होती हैं। पहली, भवन से आता प्रकाश दुर्बल पड़ जाता है, अतः भवन धुँधला दिखता है। दूसरी, जो सूर्य-प्रकाश कभी आपकी ओर आ ही नहीं रहा था वह प्रकीर्णित होकर आपकी दृष्टि-रेखा में आ जाता है और पूरे दृश्य पर एकसमान धूसर-श्वेत आभा फैला देता है। प्रतिबिंब का व्यतिरेक घट जाता है और सब कुछ धुला-धुला तथा अस्पष्ट दिखने लगता है — यही धुंध है।
क्या आप जानते हैं? कोलॉइडी आकार के कण — वाहनों के धुएँ, निर्माण-कार्य की धूल और ईंधन के जलने से बने — सबसे अधिक हानिकारक हैं। वे इतने छोटे होते हैं कि दिनों तक वायु में निलंबित रह सकते हैं, और इतने छोटे कि साँस के साथ फेफड़ों की गहराई तक पहुँच जाएँ — इसीलिए जो धुंध क्षितिज छिपाती है वह एक स्वास्थ्य-चेतावनी भी है।
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