प्र1.
गेंद को रेत की सतह से करीब 1m ऊँचाई तक उठाकर गिराइए (चित्र 7.17)। क्या रेत में एक गड्ढा बन जाता है? विचार कीजिए कि गेंद रेत में गड्ढा क्यों बना देती है?
उत्तर
हाँ, कटोरे जैसा गड्ढा बन जाता है। गेंद गड्ढा इसलिए बनाती है क्योंकि वह गतिज ऊर्जा लेकर पहुँचती है और उसी ऊर्जा से रेत पर कार्य करके कणों को किनारे धकेल देती है।
गेंद को h = 1 m ऊपर उठाने पर स्थितिज ऊर्जा संचित होती है U = mgh
मुक्त रूप से गिरने पर रेत के ठीक ऊपर यह पूरी गतिज ऊर्जा बन जाती है:
½mv2 = mgh, अतः v = √(2gh) = √(2 × 10 × 1) ≈ 4.5 m s–1
रेत में प्रतिरोधी बल F गहराई d तक कार्य करके गेंद को रोक देता है:
F × d = mgh → d = mgh ÷ F
मुक्त रूप से गिरने पर रेत के ठीक ऊपर यह पूरी गतिज ऊर्जा बन जाती है:
½mv2 = mgh, अतः v = √(2gh) = √(2 × 10 × 1) ≈ 4.5 m s–1
रेत में प्रतिरोधी बल F गहराई d तक कार्य करके गेंद को रोक देता है:
F × d = mgh → d = mgh ÷ F
ऐसा क्यों होता है: रेत गेंद पर पीछे की ओर बल लगाती है (गेंद पर ऋणात्मक कार्य) और गेंद रेत के कणों को बाहर व नीचे धकेलती है (रेत पर धनात्मक कार्य)। गेंद तब तक चलती रहती है जब तक रेत उसकी पूरी गतिज ऊर्जा सोख न ले — और वह जितना गहरा जाती है, रेत ने उतना ही अधिक कार्य किया होता है।
यह करके देखिए: इसी गेंद को पक्के सीमेंट के फर्श पर गिराइए। कोई गड्ढा नहीं बनता, क्योंकि फर्श विकृत नहीं हो सकता — ऊर्जा तेज ध्वनि और गेंद के उछाल में चली जाती है।