कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 7 क्रियाकलाप 7.1 के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
गेंद को रेत की सतह से करीब 1m ऊँचाई तक उठाकर गिराइए (चित्र 7.17)। क्या रेत में एक गड्ढा बन जाता है? विचार कीजिए कि गेंद रेत में गड्ढा क्यों बना देती है?
उत्तर

हाँ, कटोरे जैसा गड्ढा बन जाता है। गेंद गड्ढा इसलिए बनाती है क्योंकि वह गतिज ऊर्जा लेकर पहुँचती है और उसी ऊर्जा से रेत पर कार्य करके कणों को किनारे धकेल देती है।

गेंद को h = 1 m ऊपर उठाने पर स्थितिज ऊर्जा संचित होती है U = mgh
मुक्त रूप से गिरने पर रेत के ठीक ऊपर यह पूरी गतिज ऊर्जा बन जाती है:
½mv2 = mgh, अतः v = √(2gh) = √(2 × 10 × 1) ≈ 4.5 m s–1
रेत में प्रतिरोधी बल F गहराई d तक कार्य करके गेंद को रोक देता है:
F × d = mgh   →   d = mgh ÷ F
ऐसा क्यों होता है: रेत गेंद पर पीछे की ओर बल लगाती है (गेंद पर ऋणात्मक कार्य) और गेंद रेत के कणों को बाहर व नीचे धकेलती है (रेत पर धनात्मक कार्य)। गेंद तब तक चलती रहती है जब तक रेत उसकी पूरी गतिज ऊर्जा सोख न ले — और वह जितना गहरा जाती है, रेत ने उतना ही अधिक कार्य किया होता है।
यह करके देखिए: इसी गेंद को पक्के सीमेंट के फर्श पर गिराइए। कोई गड्ढा नहीं बनता, क्योंकि फर्श विकृत नहीं हो सकता — ऊर्जा तेज ध्वनि और गेंद के उछाल में चली जाती है।
प्र2.
अब गेंद को रेत की सतह से 2 m ऊपर ले जाकर किसी दूसरी जगह गिराइए जिससे सतह पर बने गड्ढे अलग-अलग दिखाई दें न कि एक दूसरे के ऊपर। क्रियाकलाप के इस चरण को पुन: दोहराइए। इस बार बने गड्ढे की गहराई की तुलना पहले बने गड्ढे की गहराई से कीजिए। क्या आपको इनमें कोई अंतर दिखाई देता है? किस स्थिति में गड्ढे की गहराई अधिक व किस स्थिति में कम होती है?
उत्तर

हाँ, स्पष्ट अंतर दिखाई देता है। 2 m से गिराई गई गेंद का गड्ढा अधिक गहरा होता है और 1 m से गिराई गई गेंद का गड्ढा सबसे कम गहरा। 2 m से दोबारा गिराने पर गहराई लगभग पहले जितनी ही मिलती है।

गिराने की ऊँचाई hसंचित स्थितिज ऊर्जा U = mghगड्ढे की गहराई d = mgh ÷ F
1 mmg × 1 mसबसे कम
2 mmg × 2 m — दोगुनीलगभग दोगुनी गहरी
ऐसा क्यों होता है: गेंद को अधिक ऊँचाई तक उठाने का अर्थ है गुरुत्व के विरुद्ध अधिक कार्य करना, अतः अधिक स्थितिज ऊर्जा संचित होती है। यह पूरी ऊर्जा रेत तक गतिज ऊर्जा के रूप में पहुँचती है और रेत को गेंद रोकने के लिए उतना ही ऋणात्मक कार्य करना पड़ता है। औसत प्रतिरोधी बल F समान होने पर दोगुनी ऊर्जा के लिए दोगुनी दूरी चाहिए — अर्थात गहरा गड्ढा।
क्रियाकलाप का निष्कर्ष: पृथ्वी की सतह से वस्तु की ऊँचाई जितनी अधिक होगी, उसकी गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा उतनी ही अधिक होगी — यही परिणाम पुस्तक आगे U = mgh (समीकरण 7.8) के रूप में लिखती है।
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