प्र1.
इसके पश्चात पटरे को पुस्तकों के चट्टे या स्टूल के शिखर-तल के साथ चित्र 7.27(क) में दर्शाए अनुसार टिका कर रखिए। अब गाड़ी को आनत तल के सहारे खींचते हुए आनत तल की ऊँचाई तक धीरे-धीरे लाइए। इस स्थिति में कमानीदार तुला का पाठ्यांक (आवश्यक बल) क्या पूर्व चरण 2 के पाठ्यांक से कम प्राप्त होता है?
उत्तर
हाँ — आनत तल पर कमानीदार तुला का पाठ्यांक सीधे ऊपर उठाने की तुलना में स्पष्ट रूप से कम आता है।
| गाड़ी को कैसे उठाया गया | कमानीदार तुला का पाठ्यांक | तय की गई दूरी | किया गया कार्य |
|---|---|---|---|
| चरण 2 — h = 0.5 m तक ऊर्ध्व दिशा में उठाना | mg (पूरा भार) | 0.5 m | mg × 0.5 m |
| चरण 3 — L = 1.5 m के पटरे पर खींचना | mg × (h/L) = mg/3, अर्थात लगभग एक-तिहाई | 1.5 m | (mg/3) × 1.5 m = mg × 0.5 m — समान |
पटरे का यांत्रिक लाभ = L ÷ h = 1.5 m ÷ 0.5 m = 3
अतः आयास भार का एक-तिहाई रह जाता है।
यदि गाड़ी का भार 6 N हो तो पटरे पर तुला का पाठ्यांक लगभग 2 N आना चाहिए।
अतः आयास भार का एक-तिहाई रह जाता है।
यदि गाड़ी का भार 6 N हो तो पटरे पर तुला का पाठ्यांक लगभग 2 N आना चाहिए।
ऐसा क्यों होता है: पटरा अभिलंब बल के द्वारा गाड़ी के भार का कुछ भाग स्वयं सँभाल लेता है। आपको केवल भार का वह घटक पार करना पड़ता है जो ढलान के अनुदिश कार्य करता है, और ढलान जितनी कम होगी वह घटक उतना ही छोटा होगा।
स्वयं जाँचिए: वास्तविक पाठ्यांक मापिए। वह mg × h/L से कुछ अधिक आएगा, क्योंकि गाड़ी के पहियों और पटरे के बीच के घर्षण को भी पार करना पड़ता है — ऊपर की व्युत्पत्ति में घर्षण की उपेक्षा की गई है।