कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 7 क्रियाकलाप 7.3 के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
इसके पश्चात पटरे को पुस्तकों के चट्टे या स्टूल के शिखर-तल के साथ चित्र 7.27(क) में दर्शाए अनुसार टिका कर रखिए। अब गाड़ी को आनत तल के सहारे खींचते हुए आनत तल की ऊँचाई तक धीरे-धीरे लाइए। इस स्थिति में कमानीदार तुला का पाठ्यांक (आवश्यक बल) क्या पूर्व चरण 2 के पाठ्यांक से कम प्राप्त होता है?
उत्तर

हाँ — आनत तल पर कमानीदार तुला का पाठ्यांक सीधे ऊपर उठाने की तुलना में स्पष्ट रूप से कम आता है।

गाड़ी को कैसे उठाया गयाकमानीदार तुला का पाठ्यांकतय की गई दूरीकिया गया कार्य
चरण 2 — h = 0.5 m तक ऊर्ध्व दिशा में उठानाmg (पूरा भार)0.5 mmg × 0.5 m
चरण 3 — L = 1.5 m के पटरे पर खींचनाmg × (h/L) = mg/3, अर्थात लगभग एक-तिहाई1.5 m(mg/3) × 1.5 m = mg × 0.5 m — समान
पटरे का यांत्रिक लाभ = L ÷ h = 1.5 m ÷ 0.5 m = 3
अतः आयास भार का एक-तिहाई रह जाता है।
यदि गाड़ी का भार 6 N हो तो पटरे पर तुला का पाठ्यांक लगभग 2 N आना चाहिए।
ऐसा क्यों होता है: पटरा अभिलंब बल के द्वारा गाड़ी के भार का कुछ भाग स्वयं सँभाल लेता है। आपको केवल भार का वह घटक पार करना पड़ता है जो ढलान के अनुदिश कार्य करता है, और ढलान जितनी कम होगी वह घटक उतना ही छोटा होगा।
स्वयं जाँचिए: वास्तविक पाठ्यांक मापिए। वह mg × h/L से कुछ अधिक आएगा, क्योंकि गाड़ी के पहियों और पटरे के बीच के घर्षण को भी पार करना पड़ता है — ऊपर की व्युत्पत्ति में घर्षण की उपेक्षा की गई है।
प्र2.
अब पटरे और आधार के बीच का झुकाव (कोण) कम कीजिए जैसा कि चित्र 7.27 (ख) में प्रदर्शित है और इस क्रियाकलाप के चरण 3 को दोहराइए। ध्यान दीजिए कि जब पटरे को कम कोण पर झुकाया जाता है तो गाड़ी को ऊपर खींचने के लिए आवश्यक बल का मान (कमानीदार तुला का पाठ्यांक) किस प्रकार परिवर्तित होता है।
उत्तर

पटरे का झुकाव कम करने पर आवश्यक बल और भी घट जाता है — किंतु अब गाड़ी को अधिक दूरी तक खींचना पड़ता है।

समान ऊँचाई h के लिए कम झुकाव का अर्थ है अधिक L
यांत्रिक लाभ = L ÷ h → बड़ा
आयास F′ = mg × (h ÷ L) → छोटा
किया गया कार्य = F′ × L = mgh → अपरिवर्तित
पटरे की लंबाई L (h = 0.5 m)यांत्रिक लाभ L/h6 N की गाड़ी के लिए आयासकिया गया कार्य
1.0 m23.0 N3.0 J
1.5 m32.0 N3.0 J
3.0 m61.0 N3.0 J
ऐसा क्यों होता है: आनत तल कार्य को कम नहीं कर सकता — वह तो केवल ऊँचाई से तय होकर mgh पर स्थिर है। वह इतना ही कर सकता है कि बल के बदले दूरी दे दे। पटरे की लंबाई दोगुनी करने पर आयास आधा और दूरी दोगुनी हो जाती है, गुणनफल ठीक वही रहता है।
क्या आप जानते हैं? पहियेदार कुर्सियों के लिए बनाई जाने वाली लंबी, हल्की ढलान वाली रैंप तथा पहाड़ों की घुमावदार सड़कें इसी सिद्धांत पर बनती हैं।
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