प्र1.
आप संदूक को एक चिकने आनत पटरे पर चित्र 7.26 (ख) में दर्शाए अनुसार रख सकते हैं और इसे इस आनत पटरे पर धकेल कर ऊपर के तल तक उठा सकते हैं। क्या इस विधि में कम बल की आवश्यकता होती है?
उत्तर
हाँ। चिकने आनत पटरे पर संदूक धकेलने में सीधे ऊपर उठाने की तुलना में कम बल लगता है — ठीक h/L गुना कम।
सीधे ऊपर उठाने में: आवश्यक बल = भार = mg, दूरी = h
L लंबाई के आनत तल पर उसी ऊँचाई h तक नियत चाल से धकेलने पर:
आपके द्वारा किया गया कार्य = F′ × L
अर्जित स्थितिज ऊर्जा = mgh
कार्य-ऊर्जा प्रमेय (घर्षण की उपेक्षा करते हुए): F′ × L = mgh
F′ = mgh ÷ L = mg × (h ÷ L)
चूँकि L > h है, गुणक h/L एक से छोटा है, अतः F′ < mg
L लंबाई के आनत तल पर उसी ऊँचाई h तक नियत चाल से धकेलने पर:
आपके द्वारा किया गया कार्य = F′ × L
अर्जित स्थितिज ऊर्जा = mgh
कार्य-ऊर्जा प्रमेय (घर्षण की उपेक्षा करते हुए): F′ × L = mgh
F′ = mgh ÷ L = mg × (h ÷ L)
चूँकि L > h है, गुणक h/L एक से छोटा है, अतः F′ < mg
उदाहरण के लिए, 100 kg के संदूक को h = 1 m ऊँचा उठाने के लिए L = 4 m का पटरा लगाइए—
सीधे उठाने में: F = mg = 100 kg × 10 m s–2 = 1000 N
पटरे पर: F′ = 1000 N × (1 m ÷ 4 m) = 250 N — केवल चौथाई
पटरे पर: F′ = 1000 N × (1 m ÷ 4 m) = 250 N — केवल चौथाई
यह "मुफ्त" क्यों नहीं है: दोनों विधियों में किया गया कार्य समान है — इस उदाहरण में 1000 J। पटरे पर आप 1000 N को 1 m तक लगाने के स्थान पर 250 N को 4 m तक लगाते हैं। मशीन उसी कार्य को अधिक दूरी पर फैला देती है ताकि किसी भी क्षण लगने वाला बल आपके वश में रहे।