प्र1.
पैमाने के दूसरे सिरे पर एक रबड़ रखिए। क्या स्टेपलर ऊपर उठ जाता है? यदि नहीं तो एक और रबड़ रखिए।
उत्तर
एक या दो रबड़ रखने पर पैमाने का दूर वाला सिरा नीचे झुक जाता है और भारी स्टेपलर ऊपर उठ जाता है — जबकि स्टेपलर का भार रबड़ से कई गुना अधिक होता है।
पैमाना एक उत्तोलक है और पेंसिल आलंब।
संतुलन की शर्त: आयास × आयास भुजा = भार × भार भुजा (समीकरण 7.15)
मान लीजिए पेंसिल स्टेपलर वाले सिरे से 5 cm और रबड़ वाले सिरे से 25 cm दूर है:
भार भुजा = 5 cm, आयास भुजा = 25 cm
यांत्रिक लाभ = आयास भुजा ÷ भार भुजा = 25 cm ÷ 5 cm = 5
अतः 0.2 N भार वाली रबड़ 5 × 0.2 N = 1 N तक के स्टेपलर को उठा सकती है
संतुलन की शर्त: आयास × आयास भुजा = भार × भार भुजा (समीकरण 7.15)
मान लीजिए पेंसिल स्टेपलर वाले सिरे से 5 cm और रबड़ वाले सिरे से 25 cm दूर है:
भार भुजा = 5 cm, आयास भुजा = 25 cm
यांत्रिक लाभ = आयास भुजा ÷ भार भुजा = 25 cm ÷ 5 cm = 5
अतः 0.2 N भार वाली रबड़ 5 × 0.2 N = 1 N तक के स्टेपलर को उठा सकती है
ऐसा क्यों होता है: रबड़ वाला सिरा पेंसिल से दूर है, अतः वह अधिक दूरी तय करता है; स्टेपलर वाला सिरा पेंसिल के पास है, अतः बहुत कम चलता है। एक सिरे पर किया गया कार्य दूसरे सिरे तक पहुँचता है, F1d1 = F2d2। इसलिए अधिक दूरी चलने वाला छोटा बल कम दूरी चलने वाला बड़ा बल दे सकता है।
यह करके देखिए: पेंसिल को खिसकाकर पैमाने के मध्य के पास लाइए। यांत्रिक लाभ घट जाता है और अब रबड़ स्टेपलर को नहीं उठा पातीं। पेंसिल को स्टेपलर के और पास ले जाइए तो एक ही रबड़ पर्याप्त हो जाती है। उत्तोलक की पूरी शक्ति इसी में है कि आलंब कहाँ रखा गया है।