कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 7 क्रियाकलाप 7.5 के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
सभी अवलोकनों और मापों को अंकित (record) कीजिए और अधिक पंक्तियाँ जोड़कर तालिका 7.1 को पूरा कीजिए। [बाएँ पलड़े में सिक्कों की संख्या n₁ (आयास); आलंब से बाएँ पलड़े की दूरी L₁ (cm); दाएँ पलड़े में सिक्कों की संख्या n₂ (भार); आलंब से दाएँ पलड़े की दूरी L₂ (cm)]
उत्तर

बाएँ पलड़े (1 सिक्का) को एक नियत दूरी पर रखिए — मान लीजिए L1 = 20 cm — और हर बार भारी दाएँ पलड़े को तब तक खिसकाइए जब तक दंड क्षैतिज न हो जाए। एक सामान्य पूर्ण तालिका इस प्रकार होगी—

बाएँ पलड़े में सिक्के n₁ (आयास)दूरी L₁ (cm)दाएँ पलड़े में सिक्के n₂ (भार)दूरी L₂ (cm)n₁ × L₁n₂ × L₂
1201202020
1202102020
120452020
12082.52020
अंतिम दो स्तंभ सदैव बराबर आते हैं, अतः दंड तब क्षैतिज रहता है जब
n1 × L1 = n2 × L2
अर्थात   आयास × आयास भुजा = भार × भार भुजा   (समीकरण 7.15)

यांत्रिक लाभ = भार ÷ आयास = n2/n1 = L1/L2
चौथी पंक्ति: यांत्रिक लाभ = 8 ÷ 1 = 20 cm ÷ 2.5 cm = 8
ऐसा क्यों होता है: यह दंड-तुला प्रथम श्रेणी का उत्तोलक है जिसमें डोरी आलंब का कार्य करती है। सभी सिक्के एक समान भार के हैं, अतः सिक्कों की संख्या सीधे बल का माप है। भार दोगुना करने पर आलंब से उसकी दूरी आधी करनी पड़ती है, क्योंकि दोनों ओर मिलान बल × भुजा के गुणनफल का होता है।
ध्यान दीजिए: एक जैसे एक रुपये के सिक्के और मजबूत प्लास्टिक का पैमाना लीजिए, तथा पलड़ों को पतले धागे से लटकाइए ताकि भुजा की लंबाई सरलता से पढ़ी जा सके। यदि खाली दंड आरंभ में ही क्षैतिज न हो तो एक पलड़े को थोड़ा खिसकाकर उसे क्षैतिज कीजिए, अन्यथा सभी पाठ्यांक गलत आएँगे।
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