प्र1.
हमने देखा है कि जब किसी वस्तु पर बल लगाया जाता है और वह विस्थापित हो जाती है तो उस पर कार्य होता है। क्या इससे वस्तु में आगे कार्य करने की क्षमता आ जाती है?
उत्तर
हाँ। किसी वस्तु पर किया गया धनात्मक कार्य उसे ऊर्जा प्रदान करता है, और ऊर्जा का अर्थ ही है कार्य करने की क्षमता।
- क्षेत्ररक्षक गेंद फेंकते समय उस पर कार्य करता है। फिर वही गतिमान गेंद विकेट गिरा देती है — अर्थात गेंद ने विकेट पर कार्य किया (चित्र 7.8 क, ख)।
- गमले को खिड़की की मुँडेर तक उठाने में कार्य किया जाता है। यदि गमला गिर जाए तो नीचे रखी वस्तु को क्षति पहुँचा सकता है — यह भी कार्य ही है (चित्र 7.8 ग)।
वस्तु पर किया गया कार्य = उसकी ऊर्जा में परिवर्तन (समीकरण 7.3)
धनात्मक कार्य → ऊर्जा में वृद्धि → किसी अन्य वस्तु पर कार्य करने की क्षमता
धनात्मक कार्य → ऊर्जा में वृद्धि → किसी अन्य वस्तु पर कार्य करने की क्षमता
ऐसा क्यों होता है: स्थानांतरण में ऊर्जा नष्ट नहीं होती, केवल आगे बढ़ जाती है। क्षेत्ररक्षक द्वारा दी गई ऊर्जा गेंद तब तक अपने पास रखती है जब तक वह विकेट से नहीं टकराती, फिर उसे सौंप देती है। गेंद विकेट पर धनात्मक कार्य करती है और विकेट गेंद पर उतना ही ऋणात्मक कार्य — इसलिए गेंद ठीक उतना ही खोती है जितना विकेट पाता है।