कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 7 सोचिए और बताइए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
पिछले अध्याय के चित्र (6.8) में एक भारोत्तोलक दर्शाई गई है जिसने भारोत्तोलन दंड (barbell) को अपने हाथों में पकड़ कर स्थिर रखा हुआ है। क्या वह इस दंड को स्थिर पकड़े रखने में कोई कार्य करती है?
उत्तर

नहीं। वह दंड पर शून्य कार्य करती है, क्योंकि दंड का कोई विस्थापन नहीं होता।

W = F × s
वह ऊपर की ओर जो बल लगाती है = दंड का भार = mg
दंड का विस्थापन, s = 0
W = mg × 0 = 0 J
ऐसा क्यों होता है: विज्ञान में कार्य के लिए बल की दिशा में विस्थापन आवश्यक है। दंड अपने स्थान पर ही रहता है, अतः उसे कोई ऊर्जा स्थानांतरित नहीं होती — न उसकी गतिज ऊर्जा बदलती है, न स्थितिज ऊर्जा।
फिर भी वह थक जाती है। बल लगाए रखने के लिए उसकी माँसपेशियों के तंतु बार-बार सिकुड़ते और फैलते हैं। इसमें शरीर में संचित रासायनिक ऊर्जा व्यय होती है और उसका अधिकांश भाग ऊष्मा बन जाता है। अर्थात ऊर्जा उसके शरीर के भीतर व्यय होती है, दंड पर नहीं। थकान कार्य होने की वैज्ञानिक कसौटी नहीं है।
प्र2.
बताइए पिछले अध्याय के चित्र 6.13 (ग) में दर्शाई गई किसी खुरदरी सतह (rough surface) पर गतिमान एक के ऊपर एक रखे सिक्कों के एक ढेर पर घर्षण द्वारा किया गया कार्य धनात्मक होगा, ऋणात्मक होगा या शून्य होगा?
उत्तर

सिक्कों के ढेर पर घर्षण द्वारा किया गया कार्य ऋणात्मक होगा।

सिक्कों की गति की दिशा →
घर्षण बल की दिशा ← (सदैव सापेक्ष गति का विरोध करता है)
बल और विस्थापन परस्पर विपरीत हैं
W = F × (– s) = ऋणात्मक
ऐसा क्यों होता है: घर्षण सरकते हुए सिक्कों पर पीछे की ओर कार्य करता है, अतः वह उन्हें ऊर्जा देता नहीं बल्कि उनसे ऊर्जा लेता है। यही खोई हुई गतिज ऊर्जा सिक्कों तथा मेज की सतह में ऊष्मा के रूप में प्रकट होती है — और इसी कारण ढेर धीमा होकर अंततः रुक जाता है।
स्वयं जाँचिए: अपनी दोनों हथेलियों को तेजी से रगड़िए। वे गर्म हो जाती हैं। गतिमान हथेलियों पर घर्षण द्वारा किया गया ऋणात्मक कार्य ही तापीय ऊर्जा बन गया है।
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