प्र1.
किसी वस्तु में उसकी गति के कारण कितनी ऊर्जा होती है?
उत्तर
m द्रव्यमान की वस्तु जो v चाल से गतिमान है, उसकी गतिज ऊर्जा K = ½mv2 होती है।
m द्रव्यमान की वस्तु पर नियत बल F लगे और वह s विस्थापन में चाल u से v हो जाए।
शुद्धगतिक समीकरण: v2 = u2 + 2as, अतः s = (v2 – u2) ÷ 2a
किया गया कार्य: W = F × s = ma × (v2 – u2) ÷ 2a
W = ½m(v2 – u2) (समीकरण 7.5)
कार्य-ऊर्जा प्रमेय के अनुसार यही वस्तु की ऊर्जा में परिवर्तन है।
विरामावस्था से आरंभ करने पर (u = 0) यह पूरा भाग गतिज ऊर्जा ही है:
K = ½mv2 (समीकरण 7.6)
शुद्धगतिक समीकरण: v2 = u2 + 2as, अतः s = (v2 – u2) ÷ 2a
किया गया कार्य: W = F × s = ma × (v2 – u2) ÷ 2a
W = ½m(v2 – u2) (समीकरण 7.5)
कार्य-ऊर्जा प्रमेय के अनुसार यही वस्तु की ऊर्जा में परिवर्तन है।
विरामावस्था से आरंभ करने पर (u = 0) यह पूरा भाग गतिज ऊर्जा ही है:
K = ½mv2 (समीकरण 7.6)
वर्ग का महत्त्व: K, v के साथ नहीं बल्कि v2 के साथ बढ़ती है। किसी वाहन की चाल दोगुनी करने पर उसकी गतिज ऊर्जा चार गुनी हो जाती है (उदाहरण 7.4), अतः ब्रेक को चार गुनी ऊर्जा हटानी पड़ती है। यही कारण है कि सड़क दुर्घटनाओं में द्रव्यमान से कहीं अधिक बड़ा कारक चाल होती है।
ध्यान दीजिए: गतिज ऊर्जा की कोई दिशा नहीं होती। 5 m s–1 से पूर्व की ओर जाती गेंद और उतनी ही चाल से पश्चिम की ओर जाती गेंद की गतिज ऊर्जा बिल्कुल समान होती है। इसका मात्रक जूल है: 1 J = 1 kg m2 s–2।